राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर पलटवार किया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बयानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कांग्रेस मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया का विरोध नहीं कर रही, बल्कि इसमें सामने आ रही कथित अनियमितताओं पर जवाब मांग रही है। जूली ने सवाल किया कि यदि मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हट रहे हैं तो उनके मतदान के अधिकार की जिम्मेदारी कौन लेगा?
जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत बयान देने के बजाय गहलोत की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष ने जयपुर में भाजपा की प्रेसवार्ता के दौरान हुई अव्यवस्था, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल जैसे मुद्दे भी उठाए।
‘SIR प्रक्रिया नहीं, इसमें हो रही गड़बड़ियों का विरोध’
टीकाराम जूली ने कहा कि भाजपा नेता कांग्रेस पर SIR को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि कांग्रेस की आपत्ति प्रक्रिया को लेकर नहीं है। उनका कहना है कि पार्टी इस दौरान सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं और पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने के मुद्दे उठा रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि किसी भी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए और किसी को भी मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। जूली ने भाजपा से पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए पूछा कि SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों के अधिकारों की जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम सूची से बाहर हो गए हैं, उनके लिए दोबारा नाम जुड़वाना भी बड़ी चुनौती बन सकता है। पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग की ओर से सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी भी इस बहस के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। सितंबर 2026 में आयोग ने अदालत को बताया था कि पुनरीक्षण के बाद निर्णय प्रक्रिया में हटाए गए 27.16 लाख मतदाताओं में से 22.21 लाख ने नाम दोबारा शामिल कराने के लिए अपील की थी। यह आंकड़ा उन नामों से संबंधित है जिन्हें निर्णय प्रक्रिया के तहत हटाया गया था; इसे राज्य में SIR के दौरान हुई कुल कटौती का आंकड़ा नहीं समझना चाहिए।
भजनलाल शर्मा की भाषा पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के खिलाफ की गई बयानबाजी पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। जूली ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सवालों का जवाब देने के बजाय व्यक्तिगत टिप्पणियां कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो उसे पूछे गए सवालों का सीधा जवाब देना चाहिए। जूली के मुताबिक, मुख्यमंत्री पद पर बैठे व्यक्ति की भाषा में मर्यादा और गरिमा दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्रियों भैरों सिंह शेखावत और वसुंधरा राजे का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध के बावजूद इन नेताओं ने सार्वजनिक संवाद में पद की गरिमा का ध्यान रखा। उन्होंने भजनलाल शर्मा को भी अपने पूर्ववर्तियों की इस परंपरा से सीख लेने की सलाह दी।
अश्विनी वैष्णव के छह सवालों पर भी दिया जवाब
अश्विनी वैष्णव की प्रेसवार्ता पर प्रतिक्रिया देते हुए जूली ने कहा कि केंद्रीय मंत्री कांग्रेस से छह सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन उन्हें अपनी पार्टी के सामने उठ रहे सवालों का भी जवाब देना चाहिए। वैष्णव ने जयपुर में SIR को लेकर कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया था और इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस जब भी किसी विषय पर चर्चा की मांग करती है, सरकार उसे चर्चा का अवसर देती है। जूली ने वैष्णव की बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर की गई टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि विधान परिषद (MLC) चुनाव और लोकसभा-विधानसभा चुनावों की मतदान व्यवस्था एक जैसी नहीं है। उनके मुताबिक, MLC चुनाव में सीमित मतदाता वर्ग मतदान करता है, जबकि आम चुनावों में देश के सामान्य मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। इसलिए MLC चुनाव का उदाहरण देकर आम चुनावों की पारदर्शिता से जुड़े सवालों को खारिज नहीं किया जा सकता।
नागपुर MLC चुनाव का नतीजा भी उठाया
जूली ने महाराष्ट्र के नागपुर विभागीय स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के हालिया MLC चुनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा अपनी सुविधा के अनुसार चुनाव परिणामों की व्याख्या क्यों करती है। इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराया था। वंजारी को 67,231 और कोहले को 63,960 वोट मिले थे। यह परिणाम 29 अक्टूबर 2026 को घोषित हुआ था। नेता प्रतिपक्ष का तर्क था कि अलग-अलग चुनावों की प्रकृति और मतदाता वर्ग को समझे बिना उनके परिणामों के आधार पर आम चुनावों की व्यवस्था पर सवालों को खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा से इस चुनाव के नतीजे पर भी अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा।
‘लोकतंत्र में सवाल पूछना संवैधानिक अधिकार’
जूली ने कहा कि मतदाता सूची में गड़बड़ी, पात्र मतदाताओं के नाम हटने और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करना लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे सवाल उठाने का उद्देश्य चुनावी व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा हर सवाल को भ्रम या षड्यंत्र बताकर मूल मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सबसे महत्वपूर्ण है। उसका नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रखना और उसके मताधिकार की रक्षा करना चुनाव आयोग तथा सरकार की जिम्मेदारी है। जूली ने कहा कि कांग्रेस संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठा रही है और भाजपा को आरोप लगाने के बजाय SIR से जुड़ी अनियमितताओं पर जवाब देना चाहिए।
कश्मीर में पैलेट गन और युवाओं के अधिकारों का मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष ने संसद में चर्चा और सरकार की जवाबदेही का सवाल उठाते हुए कश्मीर में युवाओं पर पैलेट गन के इस्तेमाल तथा वहां के हालात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब युवाओं और उनके अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल सरकार के सामने रखे जाते हैं, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी जवाब देना चाहिए। जूली ने कहा कि संसद केवल विपक्ष से सवाल पूछने का मंच नहीं है। सरकार की भी जिम्मेदारी है कि वह जनता और जनप्रतिनिधियों की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब दे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष जवाबदेही से मुक्त नहीं हो सकता।
जयपुर के परकोटे में अव्यवस्था पर भाजपा को घेरा
जूली ने जयपुर में भाजपा की प्रेसवार्ता के दौरान हुए जमावड़े और उससे पैदा हुई अव्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धनतेरस जैसे बड़े त्योहार से ठीक एक दिन पहले परकोटा क्षेत्र में इस आयोजन के कारण व्यापारियों और आम लोगों को परेशानी हुई। उनका कहना था कि त्योहारों के समय बाजारों में कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण गतिविधियां होती हैं और व्यापारी ग्राहकों का इंतजार करते हैं। ऐसे समय में राजनीतिक आयोजन से पैदा हुई अव्यवस्था ने उनकी मुश्किलें बढ़ाईं। जूली ने कहा कि भाजपा को राजनीतिक कार्यक्रम करने का अधिकार है, लेकिन उसे स्थानीय व्यापारियों के हितों और आमजन की सुविधा का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने अंत में दोहराया कि भाजपा नेताओं को कांग्रेस से सवाल पूछने के बजाय SIR में सामने आ रही कथित अनियमितताओं पर जवाब देना चाहिए। उनके अनुसार, मतदाता का नाम सूची में सुरक्षित रखना और उसके वोट देने के अधिकार की रक्षा करना चुनाव आयोग तथा सरकार की जिम्मेदारी है।














