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हिजाब पर हाईकोर्ट के फैसले से क्यों नाराज हुए ओवैसी? बोले- धर्म में क्या जरूरी है, ये जज कैसे तय...

हिजाब पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की असदुद्दीन ओवैसी ने आलोचना की। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता, छात्राओं की शिक्षा और यूनिफॉर्म नियम को लेकर सवाल उठाए।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 26 Aug 2026 12:01:29

हिजाब पर हाईकोर्ट के फैसले से क्यों नाराज हुए ओवैसी? बोले- धर्म में क्या जरूरी है, ये जज कैसे तय...

इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्कूल यूनिफॉर्म में हिजाब पहनने से जुड़े फैसले पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ी आपत्ति जताई है। हैदराबाद सांसद ने अदालत के निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि किसी धर्म में क्या जरूरी है और क्या नहीं, यह तय करने का अधिकार न्यायिक व्यवस्था को नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बताया।

ओवैसी की प्रतिक्रिया इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा प्रयागराज के एक निजी स्कूल की 11वीं कक्षा की छात्रा की याचिका खारिज किए जाने के बाद सामने आई। छात्रा ने स्कूल ड्रेस के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगी थी।

ओवैसी ने क्या कहा?


हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “यह हमारा धर्म है और हम तय करेंगे कि हमारे लिए क्या आवश्यक है। यह तय करने वाले जज कौन होते हैं? यह हमारी धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।”

ओवैसी ने अपने तर्क को संविधान के अनुच्छेद 19 और अनुच्छेद 25 से भी जोड़ा। उनके मुताबिक, फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता की मूल भावना के अनुरूप नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक धार्मिक प्रथाओं से जुड़ा विषय पहले से सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। ओवैसी ने शबरीमाला मामले में नौ जजों की संविधान पीठ का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे में हाईकोर्ट को इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए था।

मुस्लिम छात्राओं की पढ़ाई को लेकर जताई चिंता

ओवैसी ने हिजाब के मुद्दे को मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा से भी जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में माध्यमिक स्तर पर मुस्लिम छात्राओं का नामांकन पहले से कम है और ऐसे फैसलों का उनकी पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

उन्होंने हिजाब को छात्रा की व्यक्तिगत पसंद और निजता से जुड़ा विषय बताया। ओवैसी ने कहा, “वह अपने सिर पर हिजाब पहन रही है, अपने दिमाग पर नहीं। समानता का मतलब यह नहीं होता कि हर किसी पर एक जैसा नियम जबरन थोप दिया जाए।”

किस मामले में आया था हाईकोर्ट का फैसला?

यह मामला प्रयागराज के एक निजी स्कूल की 11वीं कक्षा की छात्रा से जुड़ा है। छात्रा के मुताबिक, उसने 10वीं कक्षा तक स्कूल यूनिफॉर्म के साथ स्कार्फ पहना था। 11वीं में प्रवेश के समय स्कूल की ओर से इसे रोक दिया गया। इसके बाद छात्रा ने हाईकोर्ट का रुख किया और यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति मांगी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो जजों की पीठ ने उसकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान को अपनी अनुशासन संहिता और यूनिफॉर्म लागू करने का अधिकार है। कोर्ट के अनुसार, कोई छात्र अपनी निजी पसंद के आधार पर निर्धारित यूनिफॉर्म में बदलाव की मांग नहीं कर सकता।

धार्मिक प्रथा को लेकर कोर्ट की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई धार्मिक प्रमाण मौजूद नहीं था, जिससे स्कूल परिसर में हिजाब पहनने को इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा साबित किया जा सके।

इसी टिप्पणी को लेकर ओवैसी ने अदालत के फैसले की आलोचना की है और धार्मिक स्वतंत्रता तथा आवश्यक धार्मिक प्रथाओं के सवाल को उठाया है।

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