
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद ऑनलाइन डिलीवरी और कैब सेवाओं से जुड़े गिग वर्कर्स (Gig Workers) पर आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ गया है। बीते चार वर्षों में ईंधन दरों में यह पहली बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है, जिसने इस सेक्टर की लागत संरचना को सीधे प्रभावित किया है। इसी के विरोध में गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन ने रविवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक देशभर में ऐप-आधारित सेवाओं को ठप रखने का निर्णय लिया है। यूनियन ने कंपनियों से प्रति किलोमीटर भुगतान दर में तत्काल संशोधन की मांग की है।
यूनियन का कहना है कि इस ईंधन महंगाई का सीधा असर लगभग 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स पर पड़ेगा, जो अपनी रोजमर्रा की कमाई के लिए दोपहिया वाहनों पर पूरी तरह निर्भर हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण हालात को इस बढ़ोतरी के पीछे प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
एलपीजी संकट ने बढ़ाई मुश्किलें
ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच एलपीजी सप्लाई में आई बाधाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कई रेस्तरां और क्लाउड किचन या तो सीमित संचालन कर रहे हैं या अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं। इसका सीधा असर फूड डिलीवरी सेक्टर पर पड़ा है, जहां ऑर्डर वॉल्यूम में 50 से 70 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा रही है। ऑर्डर कम होने से डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई पर भी भारी असर पड़ा है, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा इंसेंटिव और ऑर्डर फ्रीक्वेंसी पर निर्भर करता है।
20 रुपये प्रति किलोमीटर न्यूनतम रेट की मांग
GIPSWU की अध्यक्ष सीमा सिंह ने बढ़ती ईंधन लागत को श्रमिकों के लिए आर्थिक संकट बताया है। उन्होंने कहा कि “Swiggy, Zomato, Blinkit जैसी कंपनियों के डिलीवरी पार्टनर्स पहले से ही कम आय और अधिक खर्च के दबाव में हैं। अब ईंधन महंगा होने से उनकी स्थिति और खराब हो गई है।” यूनियन ने मांग की है कि सरकार और कंपनियां मिलकर न्यूनतम 20 रुपये प्रति किलोमीटर का भुगतान सुनिश्चित करें, ताकि वर्कर्स की आय स्थिर रह सके।
यूनियन ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर ईंधन और मेंटेनेंस खर्च के मुकाबले कमाई में सुधार नहीं किया गया तो बड़ी संख्या में वर्कर्स इस सेक्टर को छोड़ सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस संकट का सबसे अधिक असर महिला गिग वर्कर्स, डिलीवरी राइडर्स और कैब ड्राइवर्स पर पड़ रहा है, जो प्रतिदिन 10 से 14 घंटे तक कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं।
कल होने वाली 5 घंटे की इस हड़ताल में Swiggy, Zomato, Blinkit, Zepto, Ola, Uber और Rapido जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स से जुड़े वर्कर्स के शामिल होने की संभावना है, जिससे इन सेवाओं की सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
गिग इकॉनमी के भविष्य पर नजर
नीति आयोग के अनुमानों के अनुसार, चुनौतियों के बावजूद भारत में गिग इकॉनमी तेजी से विस्तार कर रही है। वर्ष 2020-21 में देश में गिग वर्कर्स की संख्या लगभग 77 लाख थी, जो आने वाले वर्षों में लगातार बढ़ने की उम्मीद है। अनुमान है कि 2029-30 तक यह संख्या बढ़कर 2.3 करोड़ से अधिक हो सकती है। यह दर्शाता है कि यह सेक्टर भविष्य में रोजगार का बड़ा केंद्र बन सकता है, लेकिन इसके साथ श्रमिकों की आय और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना भी जरूरी है।













