
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हाल ही में विधानसभा में विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए आरएसएस का एंथम गाया था। इस घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी और विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया। मंगलवार (26 अगस्त 2025) को मीडिया से बातचीत के दौरान शिवकुमार ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य आरएसएस की प्रशंसा करना नहीं, बल्कि भाजपा नेता आर. अशोक को घेरना था। शिवकुमार ने स्पष्ट किया, “अगर मेरे शब्दों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं खेद व्यक्त करता हूं। लेकिन यह माफी किसी राजनीतिक दबाव के चलते नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया ताकि जनता में गलतफहमी फैलाई जा सके।
कांग्रेस और गांधी परिवार के प्रति वफादारी
डीके शिवकुमार ने इस विवाद से हटकर अपनी निष्ठा कांग्रेस और गांधी परिवार के प्रति दोहराई। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार को लेकर किसी को भी संदेह नहीं होना चाहिए। “मैं जन्म से कांग्रेसी हूं और जीवन की आखिरी सांस तक कांग्रेस में रहूंगा। गांधी परिवार मेरा ईश्वर है और मैं उनका भक्त हूं,” उन्होंने साफ शब्दों में कहा। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से अपने 30 साल पुराने रिश्ते का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी और नेतृत्व के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अटूट है।
संघर्ष और बलिदान का हवाला
अपने राजनीतिक सफर और संघर्षों की चर्चा करते हुए शिवकुमार ने कहा कि जब-जब पार्टी संकट में आई, उन्होंने पूरी निष्ठा से संगठन का साथ निभाया। उन्होंने बताया कि एक दौर में उन्होंने लगभग 200 विधायकों को एकजुट कर कांग्रेस सरकार को बचाने का काम किया था। उन्होंने तिहाड़ जेल में बिताए कठिन दिनों का भी जिक्र किया और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांचों का सामना करने की बात कही। “मुसीबतें आईं, मुकदमे झेले, जेल भी गया, लेकिन कांग्रेस को कभी नहीं छोड़ा,” उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा। महात्मा गांधी की 100वीं जयंती पर 100 कांग्रेस भवनों के निर्माण का संकल्प लेने का जिक्र करते हुए उन्होंने पार्टी को ‘मंदिर’ बताया, और कहा कि इस मंदिर की सेवा करना ही उनका धर्म है।
राजनीतिक महत्व
शिवकुमार का यह बयान कर्नाटक ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अहम माना जा रहा है। यह एक ओर जहां उनकी कांग्रेस में केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है, वहीं यह भी दिखाता है कि वे गांधी परिवार के साथ अटूट निष्ठा से खड़े हैं। विवाद के बीच उनका यह रुख पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को साफ संदेश देता है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, डीके शिवकुमार कांग्रेस और गांधी परिवार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से कभी पीछे नहीं हटेंगे।














