
दिल्ली और मेरठ के बीच यात्रा अब पहले से कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक होने जा रही है। महज 55 मिनट में यह दूरी तय की जा सकेगी, क्योंकि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘नमो भारत रैपिड ट्रेन’ परियोजना को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। उत्तर प्रदेश के मेरठ दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री करीब 12,930 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। दोपहर लगभग 12:30 बजे वे शताब्दी नगर स्थित नमो भारत स्टेशन से मेरठ मेट्रो और नमो भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
मेट्रो यात्रा और जनसभा का कार्यक्रम
उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री शताब्दी नगर से मेरठ साउथ स्टेशन तक मेट्रो में सफर भी करेंगे, जो इस नई परिवहन व्यवस्था का प्रतीकात्मक शुभारंभ माना जा रहा है। इसके पश्चात वे दोपहर करीब एक बजे मेरठ में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण करेंगे। इस मौके पर एक बड़ी जनसभा को संबोधित करते हुए वे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखेंगे।
82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का राष्ट्र को समर्पण
प्रधानमंत्री दिल्ली-मेरठ के बीच 82 किलोमीटर लंबे नमो भारत कॉरिडोर को औपचारिक रूप से देश को समर्पित करेंगे। यह भारत की पहली नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) परियोजना है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में तेज, सुरक्षित और आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। इस अवसर पर कॉरिडोर के शेष हिस्सों का भी उद्घाटन किया जाएगा।
इन खंडों का भी होगा शुभारंभ
परियोजना के तहत दिल्ली में सराय काले खां से न्यू अशोक नगर तक लगभग 5 किलोमीटर के हिस्से और उत्तर प्रदेश में मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक करीब 21 किलोमीटर लंबे खंड को भी संचालन के लिए खोला जाएगा। इन दोनों हिस्सों के जुड़ने से यात्रियों को निर्बाध और तीव्र यातायात सुविधा मिलेगी, जिससे रोजाना हजारों लोगों को लाभ होने की उम्मीद है।
180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार
नमो भारत रैपिड ट्रेन 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति से दौड़ने में सक्षम है। इसे देश की पहली रीजनल रैपिड ट्रांजिट प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है, जो दिल्ली और आसपास के प्रमुख शहरों के बीच दूरी को समय के लिहाज से काफी कम कर देगी। साहिबाबाद, गाजियाबाद, मोदीनगर और मेरठ जैसे महत्वपूर्ण शहरी केंद्र अब राजधानी से अधिक तेजी और सुविधा के साथ जुड़ पाएंगे।
इस परियोजना के शुरू होने से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों, रोजगार के अवसरों और शहरी विकास को भी नई गति मिलने की संभावना है। दिल्ली-एनसीआर में आधुनिक परिवहन ढांचे की दिशा में इसे एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।














