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देवभूमि उत्तराखंड में स्थित हैं ये 10 प्राचीन शिव मंदिर, रखते हैं पौराणिक काल से संबंध

हिन्दू मास का पवित्र महीना सावन जारी हैं जिसमें सभी शिव की भक्ति कर उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। इन दिनों में शिव मंदिरों में आपको बहुत भीड़ देखने को मिलेगी। जब बात शिव मंदिर की हो तो देवभूमि उत्तराखंड को कैसे भूल सकते हैं।

Posts by : Ankur Mundra | Updated on: Wed, 27 July 2022 4:56:12

देवभूमि उत्तराखंड में स्थित हैं ये 10 प्राचीन शिव मंदिर, रखते हैं पौराणिक काल से संबंध

हिन्दू मास का पवित्र महीना सावन जारी हैं जिसमें सभी शिव की भक्ति कर उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश करते हैं। इन दिनों में शिव मंदिरों में आपको बहुत भीड़ देखने को मिलेगी। जब बात शिव मंदिर की हो तो देवभूमि उत्तराखंड को कैसे भूल सकते हैं। वैसे तो उत्तराखंड को कई देवी-देवताओं का निवास स्थल बताया जाता हैं लेकिन शिव का प्रमुख धाम केदारनाथ भी यहीं हैं। लेकिन ऐसा नहीं हैं कि उत्तराखंड में शिव का बस यही मंदिर हैं, जबकि यहां शिव के कई ऐसे मंदिर हैं जिनका पौराणिक काल से भी संबंध हैं। आज इस कड़ी में हम आपको देवभूमि उत्तराखंड में स्थित प्रसिद्द शिव मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां आप धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं।

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बैजनाथ मंदिर

बैजनाथ मंदिर गोमती नदी के पावन तट पर बसा हुआ है। बैजनाथ मंदिर बागेश्वर जिले के गरुड़ तहसील के अंतर्गत आता है। यह मंदिर गरुड़ से दो किलोमीटर की दूरी पर गोमती नदी के किनारे पर स्थित है। यह उत्तराखंड के सबसे प्राचीन शिव मंदिरों में से एक है। बैजनाथ धाम एक ऐसा शिव धाम है, जहां शिव और पार्वती एक साथ विराजमान हैं। कहा जाता है कि शिव और पार्वती का विवाह यहीं हुआ था। उत्तराखंड की कई लोक गाथाओं में बैजनाथ मंदिर का जिक्र आता है। इस शिव मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां भगवान बैजनाथ से मांगी गई मनोकामना जरूर पूरी होती है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1204 ईस्वी में हुआ था। मंदिर की वास्तुकला और दीवारों की नक्काशी बेहद आकर्षक है। मंदिर के अदंर आपको शिलालेख भी दिखाई देंगे।

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कोटेश्वर महादेव मंदिर

कोटेश्वर मंदिर हिन्दुओ का प्रख्यात मंदिर है, जो कि रुद्रप्रयाग शहर से 3 कि.मी. की दुरी पर स्थित एक प्राचीन मंदिर है। कोटेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। कोटेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण 14वि शताब्दी में किया गया था, इसके बाद 16 वी और 17 वी शताब्दी में मंदिर का पुनः निर्माण किया गया था। चारधाम की यात्रा पर निकले ज्यादातर श्रद्धालु इस मंदिर को देखते हुए ही आगे बढते है, गुफा के रूप में मौजूद यह मंदिर अलकनंदा नदी के किनारे पर स्थित है। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने केदारनाथ जाते समय, इस गुफा में साधना की थी और यह मूर्ति प्राकर्तिक रूप से निर्मित है। गुफा के अन्दर मौजूद प्राकृतिक रूप से बनी मूर्तियाँ और शिवलिंग यहाँ प्राचीन काल से ही स्थापित है।

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केदारनाथ

हिमालय की बर्फीली पहाड़ियों के बीच स्थित केदारनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में गिना जाता है, जहां सिर्फ देश नहीं बल्कि विश्व भर से श्रद्धालुओं का आगमन होता है। यह मंदिर भोलेनाथ के 12 सबसे ज्योतिर्लिंगों में भी शामिल है। इसके अलावा भगवान शिव का यह भव्य मंदिर भारत की प्रसिद्ध चार धाम यात्रा में भी गिना जाता है। यह मंदिर राज्य के रूद्रप्रयाग जिले में स्थित है। बता दें कि सर्दीयों के दौराना मंदिर के द्वार बंद हो जाते हैं, लेकिन अप्रैल से नंवबर के बीच बाबा केदारनाथ के दर्शन किए जान सकते हैं।

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बिनसर महादेव मंदिर

बिनसर महादेव मंदिर एक लोकप्रिय हिंदू मंदिर है। यह मंदिर रानीखेत से लगभग 20 किमीकी दूरी पर स्थित है। कुंज नदी के सुरम्य तट पर करीब साढ़े पांच हजार फीट की ऊंचाई पर बिनसर महादेव का भव्य मंदिर है। समुद्र स्तर या सतह से 2480 मीटर की ऊंचाई पर बना यह मंदिर हरे-भरे देवदार आदि के जंगलों से घिरा हुआ है। हिंदू भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर का निर्माण 10 वीं सदी में किया गया था। महेशमर्दिनी, हर गौरी और गणेश के रूप में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों के साथ निहित, इस मंदिर की वास्तुकला शानदार है। बिनसर महादेव मंदिर क्षेत्र के लोगों का अपार श्रद्धा का केंद्र है। यह भगवान शिव और माता पार्वती की पावन स्थली मानी जाती है। प्राकृतिक रूप से भी यह स्थान बेहद खूबसूरत है। हर साल हजारों की संख्या में मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालु आते हैं।

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नीलकंठ महादेव मन्दिर

ऋषिकेश के पंकजा और मधुमती नदियों के संगम स्थल पर स्थित नीलकंठ महादेव मन्दिर एक प्रसिद्ध धार्मिक केन्द्र है। समुद्रतल से 1330 मीटर की ऊंचाई पर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के कारण यह तीर्थ विष्णुकूट, ब्रह्माकूट और मणिकूट पहाड़ियों का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। यह मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें नीलकंठ भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि समुद्रमंथन के दौरान निकले कलाकूट विष को पीने के कारण उनका गला नीला पड़ गया था। यह भी माना जाता है कि यह पौराणिक घटना इसी स्थल पर हुई थी। इसलिये इस मन्दिर को नीलकंठ महादेव मन्दिर कहा जाता है।

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रुद्रनाथ मंदिर

उत्तराखंड स्थित भगवान शिव के प्राचीन मंदिरों में आप गढ़वाल के चमोली जिले स्थित रुद्रनाथ मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर पंच केदार में शामिल एक प्राकृतिक रॉक कट टेंपल है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 2220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां भोलेनाथ के मुख की पूजा की जाती है, और पूरे शरीर की पूजा नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में की जाती है। नंदा देवी और त्रिशूल चोटियां इस मंदिर को खास बनाने का काम करती है। यहां तक पहुंचने के लिए आपको पहले गोपेश्वर आना होगा। इसके अलग यहां का आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को बहुत हद तक प्रभावित करता है।

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तुंगनाथ मंदिर

तुंगनाथ मंदिर विश्व के सबसे ऊंचा शिव मंदर है, जो रूद्रप्रयाग जिले के अंतर्गत गड़वाल हिमालय में स्थित है। यह एक प्राचीन मंदिर है जो पंच के केदार मंदिरों में से एक है। पौराणिक साक्ष्यों के अनुसार भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए पांडवों ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था, क्योंकि भगवान शिव महाभारत के नरसंहार से काफी आहत हुए थे। यह मंदिर चोपता से 6 किमी की दूरी पर स्थित है। आध्यात्मिक और धार्मिक अनुभव के लिए आप यहां आ सकते हैं। मंदिर का वास्तुकला श्रद्धालुओं के साथ-साथ यहां आने वाले पर्यटकों को भी काफी ज्यादा प्रभावित करती है।

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बुढ़ा केदार मंदिर

यह नई टिहरी से सड़क मार्ग से 60 किमी की दूरी पर स्थित है। इस स्थान पर बाल गंगा और धर्म गंगा नदियां आपस में मिलती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, दुर्योधन ने इसी जगह पर तप किया था। पांडवों कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद भगवान शिव के लिए खोज करने के निकले तब रास्ते में उनकी मुलाकात भृगु पर्वत पर ऋषि बालखिल्य से मुलाकात हुई। बालखिल्य ऋषि ने पांडवों का मार्गदर्शन किया और बताया की एक बूढ़ा आदमी संगम के पास ध्यान कर रहा है तब पांडव उस जगह पहुंचे, वो बूढ़ा आदमी अचानक शिव लिंग के पीछे गायब हो गया। बुढ़ा केदार मंदिर इस शिवलिंग के ऊपर बनाया गया है। इस लिंग को उत्तरी भारत में सबसे बड़ा लिंग कहा जाता है और इस पर अभी भी पांडवों के हाथ छाप है।

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मुक्तेश्वर महादेव मंदिर

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर के सर्वोच्च बिंदु के ऊपर स्थित है। यह मंदिर “मुक्तेश्वर धाम या मुक्तेश्वर” के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में प्रवेश करने के लिए पत्थर की सीढ़ियों से पहुंचा जा सकता है और यह मंदिर समुद्र तल से 2315 मीटर की ऊँचाई पर कुमाऊं पहाड़ियों में है। मुक्तेश्वर का नाम 350 साल पुराने शिव के नाम से आता है, जिसे मुक्तेश्वर धाम के रूप में जाना जाता है, जो शहर में सबसे ऊपर, सबसे ऊंचा स्थान है। मंदिर के निकट “चौली की जाली” नामक एक चट्टान है। पुराणों में शालीनता के रूप में, यह भगवान शिव के अठारह मुख्य मंदिरों में से एक है। यहाँ एक पहाड़ी के ऊपर शिवजी का मन्दिर है जो की 2315 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

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बालेश्वर मंदिर

आप चंपावत स्थित बालेश्वर मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं। यह एक प्राचीन मंदिर है, जो राज्य के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर की वास्तुकाला और नक्काशी इसके प्राचीन होने के साक्ष्य हैं। मंदिर परिसर में दो अन्य मंदिर भी हैं एक रत्नेश्वर और दूसरा चम्पावती दुर्गा का। यहां कई सारे शिवलिंग मौजूद हैं। यह मंदिर हिन्दू श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र है, इसलिए यहां भक्तों का अच्छा खासा जमावड़ा लगता है। मंदिर की स्थापत्य कला सैलानियों को भी काफी ज्यादा आकर्षित करती है। यहां से प्राप्त शिलालेख के अनुसार मंदिर का निर्माण 1272 के दौरान चंद वंश द्वारा किया गया था। मंदिर की वास्तुकला बनाने वाले कारीगर की दक्षता को भली भांति प्रदर्शित करती है।

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