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ये है भारत का चौथा सबसे ऊंचा वाटरफॉल, नाम के पीछे है यह दुखद कहानी

यह झरना एक विशाल चट्टान से जमीन पर लगभग 340 मीटर की उंचाई से गिरता है और प्रकृति के अदभुद दृश्य को प्रस्तुत करता है। यह झरना देश का सबसे खूबसूरत और भव्य झरनों में से एक है। इस सुंदर झरने को मेघालय का गौरव भी कहा जाता है। यह झरना एक विशाल चट्टान से जमीन पर गिरते हुए बेहद अद्भुत दिखता है और इसकी खूबसूरती पर्यटकों के मन को रम लेती है।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Mon, 06 Jun 2022 6:08:40

ये है भारत का चौथा सबसे ऊंचा वाटरफॉल, नाम के पीछे है यह दुखद कहानी

आज हम आपको भारत के सबसे ऊंचे वॉटरफॉल के बारे में बताने जा रहे है साथ ही इसके पीछे की एक दुखद कहानी के बारे में भी। इस वाटरफॉल का नाम नोहकलिकाई फॉल्स। नोहकलिकाई फॉल्स मेघालय राज्य में चेरापूंजी के पास स्थित एक प्रसिद्ध झरना है जिसका नाम दुनिया के चौथे सबसे ऊँचें झरने के रूप में जाना जाता है। इस वाटरफॉल को देखने के लिए देश के कोने-कोने से टूरिस्ट आते हैं और यहां की खूबसूरती और प्राकृतिक सम्पदा से रूबरू होते हैं। आपको बता दें कि यह झरना एक विशाल चट्टान से जमीन पर लगभग 340 मीटर की उंचाई से गिरता है और प्रकृति के अदभुद दृश्य को प्रस्तुत करता है। यह झरना देश का सबसे खूबसूरत और भव्य झरनों में से एक है। इस सुंदर झरने को मेघालय का गौरव भी कहा जाता है। यह झरना एक विशाल चट्टान से जमीन पर गिरते हुए बेहद अद्भुत दिखता है और इसकी खूबसूरती पर्यटकों के मन को रम लेती है।

ये है भारत का चौथा सबसे ऊंचा वाटरफॉल, नाम के पीछे है यह दुखद कहानी

नोहकलिकाइ झरने की कहानी

बेहद खूबसूरत नोहकलिकाइ झरने के नाम से एक दुखद कहानी जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि इस जलप्रपात का नाम ‘का लिकाई’ नाम की महिला की दुखद कहानी को बयां करता है। का लिकाई नाम की महिला ने अपने पति की मौत के बाद एक दूसरे पुरुष से शादी की थी। अपने बच्चे के लालन-पालन के लिए का लिकाई को कुली तक बनना पड़ा। अपनी बेटी की परवरिश में ज्यादातर वक्त देने के कारण वह अपने पति को उस तरह से प्यार नहीं दे पाती थी। जिस वजह से उसके पति के मन में ईष्या का भाव जाग्रत हो गया। वह अपनी ही बेटी से घृणा करने लगा। जब एक महिला काम कर रही थी उसके दूसरे पति ने अपनी बेटी को मार डाला। इतना ही नहीं उसके पति ने अपनी बेटी को मारकर उसका मांस पकाकर अपनी पत्नी को परोस दिया। खाना खाने के बाद महिला अपनी बेटी को देखने के लिए बाहर गई तो उसको सुपारी की टोकरी में बेटी की उंगुलियां मिली। जिसे देखकर वह काफी दुखी हो गई और उसी पहाड़ की चोटी से कूद गई जहां झरना बहता है। इसी वजह से इस झरने का नाम का 'नोह का लिकाई' पड़ा।

जो भी पर्यटक नोहकलिकाई झरने का दौरा करने की योजना बना सकते हैं। वे लोग इस आकर्षक झरने को देखने के अलावा यहां पर एंगलिंग, ट्रेकिंग, लैंडस्केप फ़ोटोग्राफ़ी, बर्ड वॉचिंग और स्विमिंग जैसी गतिविधियों का मजा ले सकते हैं।

ये है भारत का चौथा सबसे ऊंचा वाटरफॉल, नाम के पीछे है यह दुखद कहानी

नोहकलिकाई झरने घूमने के लिए टिप्स

- अगर आप नोहकलिकाई झरने को देखने के लिए जा रहें हैं तो यहां पर आप धूप से अपनी त्वचा को बचाने के लिए सनस्क्रीन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- यात्रा के दौरान पर्याप्त मात्र में पानी पियें।
- नोहकलिकाई की यात्रा के दौरान आप चेरापूंजी के अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा भी कर सकते हैं।

सबसे अच्छा समय


चेरापूंजी के नोहकलिकाई फॉल घूमने जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से दिसंबर और मार्च से मई तक होता है। इन महीनों के दौरान चेरापूंजी में कम वर्षा होती है। लेकिन यहां कब बादल हो जाएं इसकी कोई गारंटी नहीं दे सकता है।

कैसे पंहुचा जाये

नोहकलिकाई झरने को देखने के लिए आप सड़क, हवाई और रेल मार्ग के जरिए जा सकते हैं। यहां का निकटतम हवाई अड्डा शिलांग है। इसी तरह यहां जाने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन गुवाहाटी है।अगर आप सड़क मार्ग से जा रहे हैं तो आप चेरापूंजी तक जा सकते हैं जो शिलांग से 53 किमी दूर है। शिलांग से चेरापूंजी के लिए आपको बस मिल जाएगी। चेरापूंजी से आप नोहकलिकाइ झरने के लिए टैक्सी ले सकते हैं।

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