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हर साल जून में लद्दाख की फेमस नुब्रा घाटी में आयोजित होता है सियाचिन लोक महोत्सव, उत्सव का लुत्फ उठाने आते है विदेशी पर्यटक

इस फेस्टिवल की खासियत है कि इसे देखने के लिए देश और विदेश से बड़ी तादाद में टूरिस्ट नुब्रा घाटी आते हैं और इस उत्सव का लुत्फ उठाते हैं। दो दिन चलने वाले इस उत्सव में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह के कई आगंतुक आते हैं।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Tue, 31 May 2022 5:06:28

हर साल जून में लद्दाख की फेमस नुब्रा घाटी में आयोजित होता है सियाचिन लोक महोत्सव, उत्सव का लुत्फ उठाने आते है विदेशी पर्यटक

लद्दाख कई लोगों के लिए ड्रीम डेस्टिनेशन है और हो भी क्यों न लद्दाख एक अद्भुत जगह जो है। लद्दाख वेकेशन मनाने के लिए और एडवेंचर गतिविधियों के लिए शानदार जगह है। हिमालय की गोद में समुद्र तल से 3542 मीटर की ऊंचाई पर स्थित लद्दाख प्रकृति से घिरा हुआ है। अगर आप जून में लद्दाख की सैर करने का मन बना रहे है तो आप 5 जून से शुरू होने वाले दो दिवसीय सियाचिन लोक महोत्सव का आनंद जरुर उठाए। यह आयोजन लद्दाख की फेमस नुब्रा घाटी में होगा। सियाचिन लोक महोत्सव का यह 6ठा संस्करण है जो कि नुब्रा के चामसेन पोलो मैदान में आयोजित होगा। इस फेस्टिवल की खासियत है कि इसे देखने के लिए देश और विदेश से बड़ी तादाद में टूरिस्ट नुब्रा घाटी आते हैं और इस उत्सव का लुत्फ उठाते हैं। दो दिन चलने वाले इस उत्सव में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह के कई आगंतुक आते हैं।

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इस महोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे और तीरंदाजी जैसे पारंपरिक खेल भी आयोजित होंगे। पारंपरिक तीरंदाजी प्रतियोगिता हमेशा भारी भीड़ खींचने वाली रही है। जिसे देखने के लिए दूर-दूर से टूरिस्ट आते हैं। इस फेस्टिवल में टूरिस्ट लद्दाख के पारंपरिक खाद्य पदार्थों का भी स्वाद ले सकेंगे। आपको बता दें कि पुराने रेशम मार्ग व्यापार की विरासत को जीवित रखने के लिए सियाचिन लोक महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस महोत्सव के द्वारा लोगों को लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में अधिक जानकारी दी जाती है।

जिस पोलोग्राउंड इस यह उत्सव हो रहा है वो कोई साधारण पोलो ग्राउंड नहीं है। पोलो ग्राउंड से पहले यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग था। इस फेस्टिवल में नृत्य और गीत प्रस्तुत करने वाले विभिन्न समूह भी हिस्सा लेते हैं। इस फेस्टिवल के जरिए टूरिस्ट लद्दाख की संस्कृति से रूबरू हो सकते हैं। ये गतिविधियां वर्तमान युवा पीढ़ी को उनकी संस्कृति की सुंदरता और अपनी पुरानी परंपराओं और संस्कृतियों के संरक्षण के महत्व को सिखाने के तरीके हैं।

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लेह लद्दाख में घूमने लायक जगह

पैंगोंग झील


पैगोंग झील (Pangong Lake) पूर्वी लद्दाख से पश्चिम तिब्बत फैली एक मशहूर झील है। आज इसका 50 प्रतिशत हिस्सा तिब्बत चीन में पड़ता है और 40 प्रतिशत हिस्सा भारत में पड़ता है। वहीं बाकी हिस्सा भारत और चीन के बीच बफर जोन में आता है। यह झील 134 किलोमीटर लंबी है। लेह शहर से सिर्फ 160 किमी दूर, यह लुभावने परिवेश से भरा हुआ है। सर्दियों में ये झील पूरी तरह से जम जाती है। इसका तापमान -5 डिग्री सेल्सियस से 10 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। इस झील को पैंगॉन्ग त्सो के रूप में भी जाना जाता है और यह लम्बे समय से लेह लाद्द्ख का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। पैंगोंग झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता, क्रिस्टल जल और कोमल पहाड़ियाँ क्षेत्र के सुंदर परिदृश्य की वजह से एक लेह-लद्दाख का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है।

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मैग्नेटिक हिल

लेह से लगभग 30 किमी दूर लेह-कारगिल-बाल्टिक राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित, मैग्नेटिक हिल मूल रूप से एक ग्रेविटी हिल है, जो अपने चुंबकीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। यह पहाड़ी समुद्र के स्तर से लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई पर है। इसका मैग्नेटिस्म इतना मजबूत है कि यहां वाहन गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से अपने आप पहाड़ी की तरफ बढ़ते हैं। इस पहाड़ी की शक्तियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां से गुजरने वाले विमान ग्रेविटी के प्रभाव से बचने के लिए अपनी ऊंचाई को बढ़ा लेते हैं। लद्दाख में मेगनेटिक हिल का रहस्य दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करता है।

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लेह पैलेस

1553 ईस्वी में निर्मित, सेमो हिल की चोटी पर स्थित, लेह पैलेस लेह के पूर्व शाही परिवार का पूर्व निवास है। लेह पैलेस जिसे ‘Lhachen Palkhar’ के नाम से भी जाना जाता है जो लेह लद्दाख का एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है और देश की एक ऐतिहासिक समृद्ध सम्पदाओं में से एक है। लेह पैलेस को ल्हाचेन पालकर के रूप में भी जाना जाता है, जिसे आप रोजाना सुबह 07:00 बजे से शाम 04:00 बजे के बीच कभी भी देख सकते हैं। इस 9 मंजिला संरचना में अब शाही सामान के साथ-साथ एक म्यूजियम भी है। पैलेस थोड़ा अब खंडहर की स्थिति में है, लेकिन बाहर से नजारा बेहद अद्भुत है। इस भव्य और आकर्षक संरचना को 17 वीं शताब्दी में राजा सेंगगे नामग्याल ने एक शाही महल के रूप में बनवाया था और इस हवेली में राजा और उनका पूरा राजसी परिवार रहता था।

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चादर ट्रैक

चादर ट्रैक लेह लद्दाख के सबसे कठिन और सबसे साहसिक ट्रेक में से एक है। इस ट्रैक को चादर ट्रैक इसलिए कहा जाता है क्योंकि जांस्कर नदी सर्दियों के दौरान नदी से बर्फ की सफेद चादर में बदल जाती है। चदर फ्रोजन रिवर ट्रेक दूसरे ट्रेकिंग वाली जगह से बिलकुल अलग है। ट्रैकिंग करने के दौरान आप ज़ांस्कर नदी पर चलने का रोमांच अनुभव कर सकते हैं। फिर नदी के किनारे कैम्पिंग कर सकते हैं, जहां आपको घाटी की मनमोहक और अछूती सुंदरता देखने को मिलेगी। साथ ही यहां से आप बर्फ से ढके पहाड़ों को निहार सकते हैं।

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फुगताल मठ

फुगताल (फुकताल) मठ लद्दाख में ज़ांस्कर क्षेत्र के दक्षिण-पूर्व भाग में स्थित एक बौद्ध मठ है। यह उन उपदेशकों और विद्वानों की जगह है जो प्राचीन काल में यहां रहते थे। यह जगह ध्यान करने, शिक्षा, सीखने और एन्जॉय करने की जगह थी। झुकरी बोली में फुक का अर्थ है 'गुफा', और ताल का अर्थ है 'आराम' होता है। इस मठ को लगभग 2500 साल पहले बनाया गया था। फुगताल मठ दूर से एक छत्ते की तरह दिखता है। इस मठ तक पहुंचने के लिए कठिन ट्रैकिंग से गुजरना पड़ता है। फुकताल मठ स्कूल पास में स्थित है, जो बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है। फुगताल मोनेस्ट्री की खास बात यह है कि गुफा से बहने वाला फ्लो की मात्रा और बाहर तक जाने वाले फ्लो की मात्रा एकदम समान रहती है। इसमें लगभग 700 भिक्षुओं के लिए 4 प्रार्थना कक्ष, पुस्तकालय, रसोई, अतिथि कक्ष और रहने की जगह मौजूद है।

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शांति स्तूप

लेह से लगभग 5 किमी दूर, शांति स्तूप एक सफेद गुंबद वाला स्तूप है, जो चनस्पा में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। शांति स्तूप का निर्माण एक जापानी बौद्ध भिक्षु ग्योम्यो नाकामुरा द्वारा बनाया गया था और 14 वें दलाई लामा द्वारा खुद को विस्थापित किया गया था। यह स्तूप अपने आधार पर बुद्ध के अवशेष रखता है और यहां के आसपास के परिदृश्य का मनोरम दृश्य प्रदान करता है। शांति स्तूप को लेह में एक प्रमुख पर्यटन स्थल माना जाता है जो समुद्र तल से 4,267 मीटर की ऊंचाई पर स्तिथ है। यहां से सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा बेहद ही खूसबूरत लगता है। इस दो मंजिला संरचना के पहले भाग में आसन पर बैठे हुए बुद्ध की मूर्ति है।

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खारदुंग ला पास

खारदुंग ला पास को लद्दाख क्षेत्र में नुब्रा और श्योक घाटियों के प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है। खारदुंग ला दर्रा, जिसे आमतौर पर खड़जोंग ला कहा जाता है, यह सियाचिन ग्लेशियर में एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्ट्रेटेजिक पास है जो 5359 मीटर की ऊंचाई पर दुनिया के सबसे ऊँचे मोटर सक्षम पास होने का दावा करता है। लद्दाख में घूमने के लिए 12 सबसे अच्छी जगहों में से एक, यह लेह से लगभग 40 किमी दूर है। इसे 'लोअर कैसल का दर्रा' भी कहा जाता है, जिसे 1988 में वाहनों के लिए खोला गया था। मोटरबाइकिंग के प्रति उत्साही लोगों के बीच यह सड़क काफी लोकप्रिय है। यहां आप सेना की कैंटीन में चाय पानी का भी लुत्फ उठा सकते हैं।

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स्टोक पैलेस

स्टोक पैलेस सिंधु नदी के करीब स्थित लेह-लद्दाख में देखने की सबसे अच्छी जगहों में से एक है। इस महल को 1825 ईस्वी में राजा त्सेपाल तोंदुप नामग्याल द्वारा बनाया गया था। यह आकर्षक महल अपनी वास्तुकला, डिजाइन, सुंदर उद्यानों और अद्भुत दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। इसके साथ ही यह महल शाही पोशाक, मुकुट और अन्य शाही सामग्रियों के संग्रह का स्थान भी है। स्टोक पैलेस को देखने के लिए आप जीपों और साझा टैक्सियों के माध्यम से आसानी से पहुंच सकते हैं।

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लेह मार्केट

लेह लद्दाख की यात्रा करने वाले लोगों को स बाजार का दौरा जरुर करना चाहिए। लेह मार्किट एक ऐसी जगह है जहाँ पर आप बहुत कुछ खरीद सकते हैं। बता दें कि इस मार्किट में कई छोटे तिब्बती बाजार और स्मारिका की दुकानें हैं जो कशीदाकारी पैच जैसे विभिन्न लेख पेश करती हैं जो कस्टम मेड, पश्मीना शॉल, प्रार्थना के पहिये और विभिन्न चांदी की कलाकृतियों के रूप में हो सकते हैं। शॉपिंग करने के अलावा आप यहां लेह के कई तरह के स्थानीय भोजन का भी आनंद ले सकते हैं।

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हेमिस मठ

हेमिस मठ 11 वीं शताब्दी से पहले अस्तित्व में है और इसको 1672 में फिर से स्थापित किया गया था। यह एक तिब्बती मठ है जो सबसे धनी है और लद्दाख में सबसे बड़ा है। हेमिस मठ लेह शहर से 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जो हर 12 साल में खुलता है। हेमिस मठ हर साल भगवान पद्मसंभव के सम्मान में आयोजित वार्षिक उत्सव की मेजबानी करता है। यह दुनिया में होने वाले आकर्षक उत्सवों में से एक है। आपको बता दें कि हेमिस लुप्तप्राय प्रजाति “शो तेंदुआ” का भी घर है, जो यहां स्थित हेमिस नेशनल पार्क में पाया जाता है।

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