द्रविड़ शैली का बेहतरीन नमूना है हम्पी का विरुपाक्ष मंदिर, जानें इससे जुड़ी जानकारी

By: Ankur Fri, 19 Aug 2022 5:15 PM

द्रविड़ शैली का बेहतरीन नमूना है हम्पी का विरुपाक्ष मंदिर, जानें इससे जुड़ी जानकारी

भारत को अपनी वास्तुकला के लिए जाना जाता हैं जहां देशभर में कई ऐसी इमारतें हैं जो अपनी कलाकृति के चलते विश्वभर में विख्यात हैं। इन्हीं इमारतों में से एक हैं हम्पी का विरुपाक्ष मंदिर जो कि द्रविड़ शैली का बेहतरीन नमूना है। विश्व स्तर के विशाल और प्राचीन मंदिरों में से एक विरुपाक्ष मंदिर, भगवान शिव को समर्पित है जो कई अनसुनी कहानियों के लिए भी प्रसिद्ध हैं। यह मंदिर हम्पी शहर के खंडहरों के बीच अभी भी स्थित है। आज इस कड़ी में हम आपको विरुपाक्ष मंदिर से जुड़ी महत्वपूर्ण और जरूरी जानकारी के बारे में बताने जा रहे हैं। आइये जानते है इसके बारे में...

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कहां है मंदिर?

उत्तरी कर्नाटक के बेल्लारी जिले में बेंगलुरु से लगभग 350 किमी की दूरी पर मौजूद है। आपको यह भी बता दें कि यह यह मंदिर हम्पी शहर से कुछ ही दूरी पर मौजूद है। माना जाता है कि हप्पी रामायण काल का किष्किंधा हुआ करता था। भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग की पूजा प्राचीन काल से होती आ रही है। एक अन्य तथ्य यह है कि इस मंदिर का इतिहास प्रसिद्ध विजयनगर साम्राज्य से जुड़ा है।

द्रविड़ शैली का है बेहतरीन नमूना

द्रविड़ स्थापत्य शैली में ये मंदिर ईंट तथा चूने से बना है। इस मंदिर के पास मौजूद छोटे-छोटे मंदिर भी द्रविड़ स्थापत्य शैली के हैं। हेम कूट पहाड़ी की तलहटी पर श्री विरुपाक्ष मंदिर यूनेस्को की घोषित राष्ट्रीय धरोहरों में भी शामिल है। यह भगवान शिव को समर्पित एक हिन्दू मंदिर है। इस विरुपाक्ष मंदिर के दक्षिण में भगवान शंकर के पुत्र गणेश की बड़ी प्रतिमा एवं पूर्व में नंदी की विशाल प्रतिमा बनी हुई है। यहां पर स्थापित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के बारे में बताया जाता है, कि इस मंदिर का निर्माण के समय यहां पर इतनी प्रतिमाएं नहीं थी। लेकिन समय के साथ-साथ यहां पर प्रतिमाओं की संख्या में बढ़ोतरी होती गई।

तुगभद्रा नदी के किनारे स्थित यह श्री विरूपाक्ष मंदिर 16 वीं शताब्दी के हमले के बावजूद अन्य स्मारकों की तरह खंडहर में तब्दील नहीं हुआ। हालांकि इस मंदिर को भी यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में शामिल कर लिया गया है, लेकिन यहां पर वर्तमान समय में भी पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं की काफी ज्यादा भीड़ देखी जाती है। इस मंदिर में की गई नक्काशी एवं कलाकृतियां देखने में काफी ज्यादा आकर्षण से भरी दिखती है, जो किसी का भी मन को मोहित करने के लिए काफी है।

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भगवान शिव ने रावण को दिया था शिवलिंग?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह मंदिर भगवान विरुपाक्ष और उनकी पत्नी देवी पंपा को समर्पित है। विरुपाक्ष, भगवान शिव का ही एक रूप है। पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण जब शिव जी के दिए हुए शिवलिंग को लेकर लंका जा रहा था, तो यहां रुका हुआ था और उसने इसी जगह एक बूढ़े आदमी को शिवलिंग पकड़ने के लिए दिया था और उस बूढ़े आदमी ने शिवलिंग को जमीन पर रख दिया था, तब से शिवलिंग इसी जगह मौजूद है।

श्री विरूपाक्ष टेम्पल घूमने जाने का अच्छा समय

कर्नाटक के हम्पी या यहां पर स्थित इस श्री विरूपाक्ष मंदिर के अलावा किसी भी पर्यटन और धार्मिक स्थल को विजिट करने का अच्छा समय के बारे में बात करें, तो वैसे तो आप यहां पर पूरे साल में कभी भी आ सकते हैं, लेकिन यहां पर वर्षा ऋतु एवं गर्मी के मौसम के दौरान आने से लोगों को माना किया जाता है। क्योंकि इस समय यहां पर आना आपके लिए कठिनाइयों से भरा हो सकता है।

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विरुपाक्ष मंदिर हम्पी के पास के दर्शनीय स्थल

विठ्ठला मंदिर


यह हम्पी के स्थित सबसे प्रभावशाली संरचनाओं में से एक है। विट्ठल मंदिर का निर्माण 16 वीं शताब्दी में किया गया था, और यह समृद्ध वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है। यहाँ एक पत्थरों का रथ स्थित है। जो हम्पी की वास्तुकला का एक प्रतिष्ठित प्रतीक है। जो इस मंदिर के परिसर के अंदर स्थित है।

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लोटस पैलेस

हम्पी का लोटस पैलेस इस शहर के सबसे प्रतिष्ठित स्थलों में से एक है। इसकी संरचना खिले हुए कमल की तरह दिखती है। यह महल विजयनगर साम्राज्य की शाही महिलाओं के लिए नामित क्षेत्र था। यह शहर मुगल आक्रमण के समय उनके विनाश से खो गया था। लेकिन अब इस पैलेस का जीर्णोद्धार कर दिया गया है।

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हम्पी बाजार

हम्पी बाजार वह जगह है जहां आप अपनी हम्पी की यात्रा को याद करने के लिए छोटी-छोटी चीजें, स्मृति चिन्ह, सस्ते कपड़े और ट्रिंकेट लेने जाते हैं। यह विरुपाक्ष मंदिर के ठीक सामने स्थित है। यह बाजार जो एक किलोमीटर से अधिक लंबा है, यह हम्पी के मुख्य स्थलों में से एक है। यहाँ कशीदाकारी शॉल, फाइबर हस्तशिल्प, और पत्थर की नक्काशी वाली वस्तुएं मिलती हैं।

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हाथी अस्तबल
हाथी अस्तबल विजयनगर साम्राज्य के दिनों में शाही हाथियों के लिए एक बाड़े के रूप में कार्य करता था। यहाँ ग्यारह गुंबददार कक्ष विशेष रूप से सजाए गए हैं, जो किसी भी प्रदर्शन के दौरान संगीतकारों के लिए एक बाड़े के रूप में कार्य करते हैं। इनका निर्माण 15 वीं शताब्दी में किया गया था। इस पूरी संरचना का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के शाही हाथियों के घर के लिए किया गया था।

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लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर

इस मंदिर में शेषनाग पर बैठे नरसिंह का सबसे बड़ा पुतला है। यहाँ देवी लक्ष्मी की मूर्ति को भी नरसिंह के साथ रखा गया है। इसे हम्पी में सबसे बड़ी अखंड मूर्ति के रूप में जाना जाता है। यह मूर्ति सन 1528 ईस्वी में विजयनगर शासक कृष्णदेवराय के शासनकाल के दौरान बनाई गई थी। यह मूर्ति वर्तमान में कमलापुरा में पुरातत्व संग्रहालय में रखी गई है।

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