जांघों का आकार अक्सर शरीर की बनावट, वजन या अतिरिक्त फैट से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन करीब 25 हजार लोगों के आंकड़ों पर आधारित एक अंतरराष्ट्रीय मेटा-एनालिसिस ने इस धारणा को एक अलग नजरिए से देखने का मौका दिया है। अध्ययन में जांघ की परिधि और लंबे समय तक जीवित रहने के बीच एक दिलचस्प संबंध पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, जांघ की परिधि में हर 5 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी सभी कारणों से होने वाली मृत्यु के 18 प्रतिशत कम जोखिम से जुड़ी थी।
हालांकि, इस निष्कर्ष का यह अर्थ नहीं है कि जांघों का आकार बढ़ाने से सीधे उम्र बढ़ाई जा सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जांघ की परिधि के पीछे मांसपेशियां, फैट और हड्डियों सहित कई कारक होते हैं। इसलिए इस संबंध को समझते समय जांघों में मौजूद मांसपेशियों की भूमिका को खास तौर पर ध्यान में रखना जरूरी है।
25 हजार लोगों के आंकड़ों में क्या सामने आया?
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए इस मेटा-एनालिसिस में लगभग 25 हजार लोगों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें जांघ की परिधि और सभी कारणों से होने वाली मृत्यु के जोखिम के बीच संबंध देखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, जांघ की परिधि में प्रत्येक 5 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी 18 प्रतिशत कम मृत्यु जोखिम से जुड़ी हुई थी। यानी अधिक जांघ परिधि वाले लोगों में लंबे समय तक जीवित रहने का संबंध देखने को मिला।
लेकिन इसे सीधे कारण और परिणाम के तौर पर नहीं देखा जा सकता। जांघ का आकार केवल एक चीज से तय नहीं होता। उसमें मांसपेशियों की मात्रा के साथ फैट और हड्डियों की संरचना भी भूमिका निभाती है। इसलिए केवल जांघ की मोटाई देखकर किसी व्यक्ति की सेहत या जीवन प्रत्याशा का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।
बड़ी जांघों में मांसपेशियां क्यों हो सकती हैं अहम?
किंग्स कॉलेज लंदन में एजिंग और हेल्थ की प्रोफेसर क्लेयर स्टीव्स के अनुसार, जांघ में मौजूद तीन प्रमुख प्रकार के ऊतकों में मांसपेशियों का स्वास्थ्य लंबी उम्र से मजबूत संबंध रखता है। इसका मतलब यह है कि बड़ी जांघ का आकार हमेशा अधिक फैट का संकेत नहीं होता।
संभावना यह भी हो सकती है कि जिन लोगों में इस अध्ययन के दौरान अधिक जांघ परिधि और बेहतर सर्वाइवल का संबंध देखा गया, उनकी जांघों में मांसपेशियों की मात्रा अधिक रही हो। मजबूत मांसपेशियां शरीर की सक्रियता बनाए रखने में मदद करती हैं और चलने-फिरने तथा रोजमर्रा के कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसी वजह से जांघों की ताकत और उनकी कार्यक्षमता को शरीर की फिटनेस के एक संकेतक के तौर पर देखा जा सकता है।
बड़ी जांघ का मतलब हमेशा ज्यादा मांसपेशियां नहीं
यह समझना भी जरूरी है कि हर व्यक्ति में जांघों का आकार एक जैसा कारण नहीं बताता। किसी व्यक्ति की जांघें अधिक मांसपेशियों के कारण बड़ी हो सकती हैं, जबकि किसी अन्य व्यक्ति में अधिक फैट इसकी वजह हो सकता है।
इसलिए केवल टेप से जांघ की परिधि नापकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कोई व्यक्ति ज्यादा स्वस्थ है या उसकी उम्र लंबी होगी। अध्ययन में सामने आया संबंध जांघ के आकार और स्वास्थ्य के बीच संभावित कनेक्शन की ओर इशारा करता है, लेकिन इसके पीछे की वजह को केवल आकार के आधार पर तय नहीं किया जा सकता।
शरीर की बनावट को देखने का नजरिया बदल सकता है
जांघों को लेकर आमतौर पर फिटनेस की चर्चा वजन घटाने या आकार कम करने के संदर्भ में होती है। कई लोग बड़ी जांघों को शरीर की कमी मानकर उन्हें पतला करने पर ध्यान देते हैं। लेकिन इस तरह के शोध शरीर के आकार को सिर्फ दिखावट के नजरिए से देखने के बजाय उसकी ताकत और कार्यक्षमता पर ध्यान देने की जरूरत की ओर संकेत करते हैं।
ब्रिटेन की रनर ताशा थॉम्पसन ने भी बताया कि पहले वह अपनी जांघों के आकार को अलग नजरिए से देखती थीं। बाद में उनका ध्यान इस बात पर गया कि उनके पैर और जांघें क्या करने में सक्षम हैं।
क्या बड़ी जांघें लंबी उम्र की गारंटी हैं?
नहीं। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर ऐसा दावा नहीं किया जा सकता कि सिर्फ जांघों की परिधि बढ़ने से व्यक्ति की उम्र बढ़ जाएगी। अध्ययन में केवल एक सांख्यिकीय संबंध सामने आया है।
इसलिए जांघों के आकार को बढ़ाने के बजाय शरीर को सक्रिय रखना और मांसपेशियों की ताकत बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। करीब 25 हजार लोगों के आंकड़ों से निकला यह विश्लेषण जरूर इस बात पर ध्यान खींचता है कि जांघों को सिर्फ फैट या शरीर के आकार के नजरिए से देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता। खासकर जांघों में मौजूद मांसपेशियों का स्वास्थ्य शारीरिक क्षमता और लंबी उम्र से जुड़े संकेतकों में महत्वपूर्ण हो सकता है।
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