मेडिकल की पढ़ाई को देश के सबसे चुनौतीपूर्ण शैक्षणिक क्षेत्रों में गिना जाता है। लंबे अध्ययन, प्रशिक्षण और काम के दबाव के बीच मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक शोध रिपोर्ट ने चिंता बढ़ाने वाली स्थिति सामने रखी है। इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल छात्रों में आत्महत्या के विचार आम आबादी के मुकाबले अधिक पाए गए हैं।
इस अध्ययन में देशभर के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब 37 हजार छात्रों से उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जानकारी जुटाई गई थी। इसमें MBBS के साथ पोस्टग्रेजुएट यानी PG स्तर के छात्र भी शामिल थे। रिपोर्ट में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की ओर से गठित नेशनल टास्क फोर्स के अध्ययन का हवाला दिया गया है।
MBBS छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या
रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन में शामिल 27.8 प्रतिशत MBBS छात्रों ने किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझने की बात कही। इनमें 16.2 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि उनके मन में आत्महत्या करने के विचार आते हैं।
यह आंकड़ा मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर स्थिति की ओर संकेत करता है। रिपोर्ट में मेडिकल शिक्षा के दौरान छात्रों पर पड़ने वाले तनाव और उससे निपटने के लिए प्रभावी व्यवस्थाओं की जरूरत पर जोर दिया गया है।
PG छात्रों में आत्महत्या के विचार का आंकड़ा अधिक
पोस्टग्रेजुएट मेडिकल छात्रों के आंकड़ों में भी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, 15.3 प्रतिशत PG छात्र किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से प्रभावित थे। वहीं, 31.2 प्रतिशत PG छात्रों ने आत्महत्या के विचार आने की बात स्वीकार की।
रिपोर्ट में आम आबादी से जुड़े आंकड़े की भी तुलना की गई है। इसमें बताया गया है कि आम लोगों पर किए गए अध्ययन में 10.6 प्रतिशत लोगों ने आत्महत्या के विचार आने की बात कही थी। इस तुलना में मेडिकल छात्रों के आंकड़े अधिक बताए गए हैं।
2024 में 37 हजार छात्रों से हुई थी बातचीत
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने मेडिकल छात्रों में बढ़ते तनाव और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों का अध्ययन करने के लिए नेशनल टास्क फोर्स का गठन किया था। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में इस टास्क फोर्स ने देशभर के मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले करीब 37 हजार छात्रों से उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बातचीत की थी।
इसमें MBBS और PG स्तर के छात्रों को शामिल किया गया। अध्ययन के निष्कर्षों को इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में प्रकाशित शोध रिपोर्ट में शामिल किया गया है।
छात्रों के लिए टास्क फोर्स ने दिए कई सुझाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस स्थिति से निपटने के लिए टास्क फोर्स ने कई उपाय सुझाए थे। इनमें मेडिकल छात्रों की ड्यूटी को सप्ताह में अधिकतम 74 घंटे तक सीमित करने की सिफारिश शामिल थी।
इसके अलावा शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण देने, MBBS पाठ्यक्रम में मानसिक रोगों से संबंधित पढ़ाई को शामिल करने और छात्रों को उचित भुगतान देने की सिफारिश की गई थी।
टास्क फोर्स ने इन उपायों को लागू किए जाने की समीक्षा हर दो सप्ताह में करने का सुझाव भी दिया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन उपायों को देशभर में लागू किया गया है।














