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मानसून आते ही छा जाता है डेंगू का खतरा: इन तरीकों से करें बचाव

गंदगी, बरसात और घर की सफाई ठीक से न होने से मच्छर जमा होना शुरू हो जाते हैं। कई बार इन्हीं में डेंगू मच्छर भी पनपने लगते हैं। मादा मादा एडीज़ मच्छर के काटने से हम डेंगू फीवर का शिकार हो जाते हैं।

Posts by : Priyanka | Updated on: Tue, 13 Aug 2024 09:55:30

मानसून आते ही छा जाता है डेंगू का खतरा: इन तरीकों से करें बचाव

गंदगी, बरसात और घर की सफाई ठीक से न होने से मच्छर जमा होना शुरू हो जाते हैं। कई बार इन्हीं में डेंगू मच्छर भी पनपने लगते हैं। मादा मादा एडीज़ मच्छर के काटने से हम डेंगू फीवर का शिकार हो जाते हैं। यह गर्म प्रदेशों में अधिक फैलता है। बारिश के मौसम में हवा में नमी बढ़ने और गड्ढों में पानी जमा होने की वजह से वायरस, बैक्टीरिया और मच्छर पनपने लगते हैं। इससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इस बुखार की वैश्विक स्तर पर चिंता का एक बड़ा विषय है।हर साल दुनियाभर के करोड़ो लोग इस बीमारी की चपेट में आते हैं। बारिशों के बाद डेंगू के रोगियों की संख्या में तेजी से इजाफा होता है। इस बीमारी में व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। कुछ गंभीर मामलों में यह बुखार जानलेवा भी साबित हो सकता है।

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डेंगू बुखार के सामान्य लक्षण

तेज़ बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी आना, आँखों में दर्द होना और विभिन्न अंगों में सूजन डेंगू बुखार के सामान्य लक्षण हैं। गू बुखार से पीड़ित अधिकांश लोग एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में, लक्षण बिगड़ सकते हैं और संक्रमण घातक हो सकता है। इसे गंभीर डेंगू, हेमरेजिक बुखार या डेंगू शॉक विकार के रूप में भी जाना जाता है। गंभीर डेंगू में ब्लड आर्टरीज़ को नुकसान पहुंचता है और ब्लड के भीतर प्लेटलेट्स बनाने वाली कोशिकाओं की संख्या कम हो जाती है।

डेंगू बुखार से बचाव के क्या उपाय हैं?

भारत में मानसून का समय (जुलाई से अक्टूबर) आते ही डेंगू के मामले सबसे ज्यादा बढ़ने लगते हैं। डेंगू का मच्छर स्थिर पानी में प्रजनन करता है, इसलिए घर के आसपास गमलों, बाल्टियों, पुराने टायरों या छत के कोनों जैसी जगहों पर पानी को रुकने न दें। बारिश के समय ऐसी जगहों की नियमित साफ-सफाई करें। इसके अलावा मच्छरों को मारने वाली कॉइल या वेपोराइजर का इस्तेमाल करें।

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क्या डेंगू एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है?

यह समस्या एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती हैं। यदि आप डेंगू से प्रभावित किसी व्यक्ति के संपर्क में आ रही हैं तो इस स्थिति में आपको डेंगू नहीं होगा। डेंगू से प्रभावित व्यक्ति अन्य मच्छरों को संक्रमित कर देते हैं। इस स्थिति में जब इन्फेक्टेड मच्छर दूसरों को काटते हैं तो उन्हें डेंगू डिटेक्ट होता है।

डेंगू बुखार कितने दिनों तक रहता है?


डेंगू बुखार का समय (दिन) हर व्यक्ति और उसकी गंभीर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। आमतौर पर यह डेंगू का बुखार 4 से 10 दिनों तक रहता है। डेंगू एडिज नामक मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर दिन में भी काट सकते हैं। एम्स के अनुसार इसमें इंफेक्शन तेजी से फैलता है और व्यक्ति को बुखार हो जाता है। इस बीमारी के मच्छर भरे हुए पानी में पनपते हैं। वैसे तो डेंगू का बुखार 10 दिनों तक रह सकता है। लेकिन, कुछ गंभीर मामलों में यह ज्यादा दिनों तक भी रह सकता है।

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क्यों जरूरी है ब्लड टेस्ट करवाना

एंटीबॉडी नामक प्रोटीन के लिए ब्लड की जांच की जाती है, जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस और अन्य कीटाणुओं से लड़ने के लिए तैयार करती हैं। डेंगू से लड़ने के लिए आपके शरीर को विशिष्ट एंटीबॉडी बनाने के लिए समय चाहिए होता है। इसलिए, इस टेस्ट को सबसे प्रभावी माना जाता है। यह टेस्ट लक्षण शुरू होने के चार दिन या उससे अधिक समय के बाद किया जाता है। इससे पता लगया जाता है की आपका शरीर डेंगू वायरस से लड़ने के लिए तैयार है या नहीं।

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डेंगू वायरस से जल्दी रिकवर होने में किस तरह का खानपान मददगार है?

किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम का मजबूत होना बेहद जरूरी है। डेंगू से जल्दी रिकवर होने के लिए पौष्टिक और संतुलित भोजन करना चाहिए । इससे शरीर को वायरस से लड़ने की शक्ति मिलेगी। डेंगू फीवर होने पर विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर फल खाएं। इसके लिए संतरा, कीवी और नींबू जैसे सिट्रस फल खा सकते हैं। ये विटामिन सी का बेहतरीन सोर्स होते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं। डेंगू मरीजों के लिए पपीते की पत्तियां खाना बेहद फायदेमंद है। इनमें एसिटोजेनिन पाया जाता है, जो प्लेटेलेट्स की संख्या तेजी से बढ़ाने में कारगर है। डेंगू बुखार में लेमन वॉटर, नारियल पानी और छाछ या लस्सी पी सकते हैं। इससे शरीर हाइड्रेटेड रहता है। इसके अलावा कद्दू, पालक, बंदगोभी और चुकंदर प्लेटेलेट्स बढ़ाने में मदद करते हैं।

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