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जानें अंतरिक्ष में फिटनेस बनाए रखने के लिए एस्ट्रोनॉट्स कौन से वर्कआउट करते हैं?

अंतरिक्ष में समय बिताने वाले एस्ट्रोनॉट्स के लिए फिट रहना अत्यंत जरूरी है, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के अभाव में शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं। इसके बावजूद, एस्ट्रोनॉट्स अपने शरीर को फिट और मजबूत रखने के लिए विशेष वर्कआउट्स करते हैं।

Posts by : Nupur Rawat | Updated on: Sun, 16 Mar 2025 7:28:05

जानें अंतरिक्ष में फिटनेस बनाए रखने के लिए एस्ट्रोनॉट्स कौन से वर्कआउट करते हैं?

जब भी हम अंतरिक्ष यात्रियों (Astronauts) के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में एकदम फिट और मजबूत शरीर वाले लोग आते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जीरो ग्रेविटी वाले माहौल में वे खुद को फिट कैसे रखते हैं? धरती पर रहकर हम जिम, योग और रनिंग जैसी एक्टिविटीज से खुद को फिट रख सकते हैं, लेकिन स्पेस में ये संभव नहीं है। वहां की वेटलेसनेस शरीर पर गहरा असर डालती है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं। ऐसे में एस्ट्रोनॉट्स को फिट रहने के लिए खास तरह के वर्कआउट करने पड़ते हैं।

स्पेस में एक्सरसाइज करना सिर्फ एक फिटनेस रूटीन नहीं, बल्कि वहां लंबे समय तक टिके रहने के लिए एक जरूरी फिजिकल जरूरत भी है। नासा (NASA) और अन्य स्पेस एजेंसियां अपने एस्ट्रोनॉट्स को ट्रेनिंग के दौरान ही खास एक्सरसाइज की आदत डालती हैं, ताकि वे वहां जाकर अपनी हड्डियों और मांसपेशियों की ताकत बनाए रख सकें।

अंतरिक्ष में बिना गुरुत्वाकर्षण के वातावरण में, एस्ट्रोनॉट्स के शरीर पर वजन का कोई प्रभाव नहीं पड़ता, जिसके कारण उनके हड्डी और मांसपेशियों में तेजी से कमजोरी आ सकती है। इसलिए स्पेस में फिट रहने के लिए नासा के पास एक विशेष ट्रेनिंग और वर्कआउट सिस्टम है, जिसमें स्पेस शटल्स और अंतरिक्ष स्टेशन पर स्पेस एक्सरसाइज करने के लिए विशेष उपकरण और तकनीकें होती हैं।

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रेसिस्टेंस ट्रेनिंग:

वेटलेसनेस के कारण मांसपेशियों में कमजोरी न आए, इसके लिए एस्ट्रोनॉट्स Advanced Resistive Exercise Device (ARED) का उपयोग करते हैं। इस उपकरण से एस्ट्रोनॉट्स डेडलिफ्ट, स्क्वाट, बेंच प्रेस जैसी एक्सरसाइज करते हैं, जो मांसपेशियों को मजबूती देती हैं। इसके माध्यम से शरीर में शक्ति और सहनशक्ति बनाए रखी जाती है। ARED न केवल मांसपेशियों को मजबूत करता है, बल्कि हड्डियों की ताकत भी बढ़ाता है, जिससे लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने के दौरान स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का बुरा असर नहीं पड़ता।

साइक्लिंग:

जीरो ग्रेविटी में कार्डियो फिटनेस बनाए रखने के लिए एस्ट्रोनॉट्स स्पेस में स्टेशनरी बाइक का उपयोग करते हैं। यह एक शानदार तरीका है, जिससे दिल की सेहत और पैरों की मांसपेशियों को मजबूत रखा जाता है। स्पेस में स्थिरता बनाए रखने के लिए साइकलिंग के दौरान बंजी कॉर्ड्स से शरीर को बांध लिया जाता है ताकि वे फ्लोट न करें। इससे फेफड़ों और हृदय की कार्यक्षमता भी बनी रहती है, जो शारीरिक सहनशक्ति के लिए जरूरी है।

ट्रेडमिल रनिंग:

स्पेस में ट्रेडमिल पर दौड़ने के लिए एस्ट्रोनॉट्स को बंजी कॉर्ड्स से बांधना पड़ता है ताकि वे वजनहीनता की वजह से फ्लोट न करें। ट्रेडमिल पर दौड़ने से हड्डियों की मजबूती बनी रहती है और स्टैमिना बढ़ता है। इसके अलावा, यह वर्कआउट दिल की सेहत को बनाए रखने में भी मदद करता है। अंतरिक्ष में व्यायाम करने से शरीर के अंगों को पर्याप्त रक्त प्रवाह मिलता है, जो दिमागी स्थिति और ऊर्जा स्तर को बेहतर बनाए रखता है।

योग और स्ट्रेचिंग:

शरीर को फ्लेक्सिबल बनाए रखने और मानसिक शांति के लिए एस्ट्रोनॉट्स योग और स्ट्रेचिंग करते हैं। जीरो ग्रेविटी में शरीर की अकड़न और मांसपेशियों के दर्द को कम करने के लिए यह जरूरी होता है। योग से रक्त संचार सही रहता है और मानसिक शांति मिलती है, जो लंबी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान तनाव कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, स्ट्रेचिंग से मांसपेशियों की लचीलापन बढ़ती है, जिससे शरीर को आराम मिलता है और सामान्य गतिविधियों में आसानी होती है।

रूटीन कार्डियो एक्सरसाइज:

अंतरिक्ष में रहने के दौरान दिल और फेफड़ों की फंक्शनलिटी बनाए रखने के लिए एस्ट्रोनॉट्स कार्डियो एक्सरसाइज करते हैं। इसमें जंपिंग एक्सरसाइज, हाई-इंटेंसिटी मूवमेंट्स और अन्य शारीरिक गतिविधियां शामिल होती हैं। ये एक्सरसाइज दिल और रक्त वाहिकाओं को मजबूत बनाती हैं और शरीर में ऊर्जा का संचार करती हैं। कार्डियो एक्सरसाइज से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और एस्ट्रोनॉट्स को मानसिक ताजगी और ऊर्जा मिलती है।

कूलिंग और रिकवरी:


अंतरिक्ष में एक्सरसाइज के बाद शरीर को रिकवरी के लिए आराम देना भी जरूरी होता है। एस्ट्रोनॉट्स कूलिंग डाउन्स और रिकवरी एक्सरसाइज करते हैं ताकि शरीर में उत्पन्न हुई गर्मी और थकान को कम किया जा सके। साथ ही, यह मांसपेशियों को आराम देने में मदद करता है ताकि भविष्य में की जाने वाली वर्कआउट्स के दौरान अधिक प्रभावी परिणाम मिल सकें।

मांसपेशियों की मजबूती के लिए स्पेशल ट्रेनिंग:

अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने से शरीर की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं, इसलिए एस्ट्रोनॉट्स को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। इन ट्रेनिंग्स के दौरान, वे प्रतिरोध प्रशिक्षण, लो-इंफेक्ट वर्कआउट्स, और कंडीशनिंग व्यायाम करते हैं, जो शरीर की ताकत बनाए रखने में मदद करता है।

माइंडफुलनेस और स्ट्रेस रिलीफ:

लंबी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद महत्वपूर्ण है। एस्ट्रोनॉट्स माइंडफुलनेस तकनीकों और विश्राम एक्सरसाइज का पालन करते हैं, ताकि वे मानसिक रूप से फिट रहें और तनाव से बच सकें। तनाव को कम करने के लिए श्वास नियंत्रण और ध्यान की प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।

क्यों जरूरी है स्पेस में वर्कआउट?

स्पेस में गुरुत्वाकर्षण (gravity) न होने के कारण शरीर पर गहरा असर पड़ता है। जब एस्ट्रोनॉट्स वजनहीन वातावरण में रहते हैं, तो उनकी हड्डियां और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। इस स्थिति से बचने और शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए एक्सरसाइज करना बेहद जरूरी होता है।

हड्डियों की मजबूती:

स्पेस में लंबे समय तक रहने से हड्डियों की बोन डेंसिटी कम हो जाती है, जिससे हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। वर्कआउट के जरिए इस समस्या को रोका जा सकता है और हड्डियों को मजबूत बनाए रखा जा सकता है।

दिल और रक्त संचार:

स्पेस में वर्कआउट करने से दिल की सेहत भी बनी रहती है। नियमित कार्डियो एक्सरसाइज से दिल स्वस्थ रहता है और रक्त का प्रवाह सही बना रहता है, जिससे शरीर में ऊर्जा और ताजगी बनी रहती है।

मांसपेशियों की ताकत और फ्लेक्सिबिलिटी:

जीरो ग्रेविटी में मांसपेशियां सिकुड़ने लगती हैं, जिससे शरीर कमजोर हो सकता है। वर्कआउट से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और शरीर को फ्लेक्सिबल बनाए रखा जाता है। इससे एस्ट्रोनॉट्स अपने मिशन को प्रभावी ढंग से पूरा कर पाते हैं।

मानसिक और शारीरिक स्थिति का संतुलन:

स्पेस में वर्कआउट करने से सिर्फ शरीर को नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति को भी संतुलित किया जा सकता है। योग और स्ट्रेचिंग जैसी एक्सरसाइज से तनाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है।

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