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तला-भुना खाने के बाद होने लगती है एसिडिटी? आजमाएं ये असरदार घरेलू उपाय

गलत खान-पान और अनियमित जीवनशैली के कारण एसिडिटी की समस्या आम हो गई है। मसालेदार और तला-भुना खाना खाने के बाद अगर आपको भी गैस, जलन या खट्टी डकारें आती हैं, तो कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर राहत पाएं। जानें असरदार नुस्खे।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 22 Mar 2025 10:18:58

तला-भुना खाने के बाद होने लगती है एसिडिटी? आजमाएं ये असरदार घरेलू उपाय

सुबह उठने से लेकर रात सोने तक हम सभी तरह-तरह की चीजें खाते हैं, लेकिन इन्हें पचाने के लिए पेट को काफी मेहनत करनी पड़ती है। इसी वजह से कई बार कब्ज, गैस, ब्लोटिंग जैसी समस्याएं हो जाती हैं। जब हमारा पेट पाचन करता है, तो हाइड्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड और मिथेन जैसी गैसें बनती हैं, जो पेट में गैस यानी एसिडिटी (Acidity) का कारण बनती हैं। अगर पेट में गैस बन रही है, तो इसका मतलब है कि खाना ठीक से पच नहीं रहा है और आंतों में ही अटका हुआ है। यह समस्या इतनी आम हो गई है कि हर तीसरा इंसान इससे परेशान रहता है। गलत खान-पान और अनियमित जीवनशैली इसका मुख्य कारण हैं। ऑयली, तला-भुना, तीखा और मसालेदार खाना, देर रात जागना, कम पानी पीना, गुस्सा और तनाव एसिडिटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। एसिडिटी की समस्या सिर्फ पेट में जलन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इससे सिरदर्द, सीने में दर्द, खट्टी डकारें, मुंह का स्वाद खराब होना और भूख न लगने जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। लंबे समय तक इस समस्या को नजरअंदाज करने से यह गंभीर रूप ले सकती है और अल्सर जैसी समस्याओं का कारण भी बन सकती है। अगर आपको भी तला-भुना या मसालेदार खाने के बाद एसिडिटी की समस्या होती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है। सही खान-पान और कुछ आयुर्वेदिक नुस्खों को अपनाकर आप पेट की गैस और एसिडिटी से बच सकते हैं। आइए जानते हैं इन घरेलू उपायों के बारे में...

तला-भुना खाने के बाद होने लगती है एसिडिटी? आजमाएं ये असरदार घरेलू उपाय

# गुनगुना पानी पिएं

तली-भुनी और मसालेदार चीजें खाने के बाद ठंडा पानी पीने से बचें, क्योंकि यह पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकता है और एसिडिटी बढ़ा सकता है। इसकी जगह गुनगुना पानी पिएं, जिससे पेट में जमी चर्बी और तेल आसानी से टूट सके और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करे। गुनगुना पानी गैस, पेट में जलन और एसिडिटी को कम करने में मदद करता है।

खाना खाने के 15-20 मिनट बाद एक गिलास गुनगुना पानी पीने से भोजन को पचाने में आसानी होती है और पेट हल्का महसूस होता है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह पाचन तंत्र (Digestive System) को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में सहायता करता है।

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं, जिससे न सिर्फ पाचन सही रहता है बल्कि त्वचा भी हेल्दी और चमकदार बनती है। रात में सोने से पहले एक गिलास गुनगुना पानी पीने से पेट साफ रहता है और कब्ज की समस्या भी दूर होती है।

अगर आप एसिडिटी से परेशान रहते हैं, तो दिनभर में 7-8 गिलास पानी पीने की आदत डालें। खासतौर पर सुबह उठते ही और भोजन के बाद गुनगुना पानी पीना पाचन में सहायक होता है। इससे एसिडिटी, गैस और पेट में जलन जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।

तला-भुना खाने के बाद होने लगती है एसिडिटी? आजमाएं ये असरदार घरेलू उपाय

# सौंफ का करें सेवन

सौंफ एक बेहतरीन आयुर्वेदिक उपाय है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करने और एसिडिटी की समस्या को दूर करने में मदद करता है। इसमें एंटी-एसिडिक गुण होते हैं, जो पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को कम करके जलन, गैस और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं।

खाने के बाद 1 छोटा चम्मच सौंफ चबाने से न सिर्फ मुंह की ताजगी बनी रहती है, बल्कि पाचन क्रिया भी बेहतर होती है। सौंफ में मौजूद फाइबर पेट को ठंडक पहुंचाते हैं और गैस्ट्रिक समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।

अगर आपको बार-बार एसिडिटी या पेट दर्द की शिकायत होती है, तो एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच सौंफ डालकर 5-10 मिनट तक उबालें। इसे छानकर गुनगुना पीने से पेट की जलन शांत होती है और डाइजेशन बेहतर होता है। रोजाना सोने से पहले और खाने के बाद सौंफ का पानी पीने से पेट हल्का महसूस होता है और कब्ज की समस्या भी दूर होती है।

इसके अलावा, सौंफ को मिश्री के साथ चबाने से भी एसिडिटी में राहत मिलती है और पेट ठंडा रहता है। अगर आप रोजाना एक चम्मच सौंफ का सेवन करते हैं, तो इससे न केवल पाचन दुरुस्त रहता है बल्कि पेट से जुड़ी कई समस्याओं से भी बचाव होता है।

तला-भुना खाने के बाद होने लगती है एसिडिटी? आजमाएं ये असरदार घरेलू उपाय

# अदरक की चाय पिएं

अदरक एक प्राकृतिक औषधि है, जो पेट को शांत करने और गैस्ट्रिक एसिड को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसमें मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पेट में सूजन, गैस और एसिडिटी की समस्या को दूर करने में कारगर होते हैं।

अगर आपको एसिडिटी या पेट में जलन की शिकायत होती है, तो एक कप पानी में 1 इंच ताजा अदरक कद्दूकस करके डालें और इसे 5-7 मिनट तक उबालें। इसके बाद इसे छानकर गुनगुना करें और स्वाद के लिए थोड़ा सा शहद मिलाकर पिएं। यह न केवल पेट की जलन शांत करता है, बल्कि पाचन क्रिया को भी दुरुस्त करता है।

आप अदरक को नींबू पानी में मिलाकर भी सेवन कर सकते हैं। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में आधा नींबू का रस और आधा चम्मच कद्दूकस किया हुआ अदरक मिलाएं। इसे सुबह खाली पेट पीने से पेट की समस्याओं में आराम मिलता है और पाचन तंत्र मजबूत होता है।

इसके अलावा, अदरक का सेवन करने के अन्य तरीके भी हैं:


अदरक-शहद मिश्रण: ताजा अदरक के रस में शहद मिलाकर खाने से एसिडिटी में राहत मिलती है।
अदरक-गुड़ का सेवन: अदरक के छोटे टुकड़े को गुड़ के साथ चबाने से पाचन क्रिया तेज होती है और गैस की समस्या कम होती है।
अदरक और पुदीना का काढ़ा: अदरक के साथ पुदीना डालकर काढ़ा बनाकर पीने से पेट की गर्मी कम होती है और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है।

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# केला खाएं

केला एक नैचुरल एंटासिड के रूप में काम करता है, जो पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को न्यूट्रलाइज करने में मदद करता है। इसमें पोटैशियम की उच्च मात्रा होती है, जो पेट में एसिड के उत्पादन को नियंत्रित करके एसिडिटी और जलन को कम करता है। अगर आपको तला-भुना या मसालेदार खाना खाने के बाद एसिडिटी की समस्या होती है, तो तुरंत एक पका हुआ केला खाएं। यह आपके पेट को ठंडक पहुंचाएगा और गैस्ट्रिक समस्याओं से राहत दिलाएगा।

केला खाने के अन्य फायदे:

पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है – केले में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज की समस्या को दूर करता है।
पेट की परत को कोट करता है – केला पेट की आंतरिक परत पर एक सुरक्षात्मक परत बनाता है, जिससे एसिड का प्रभाव कम हो जाता है।
पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है – इसमें ऐसे प्राकृतिक एंजाइम होते हैं, जो भोजन के सही तरह से पचने में मदद करते हैं।

केला खाने के अन्य तरीके:

केला और दही – केला और ताजा दही को मिलाकर खाने से एसिडिटी और अपच से जल्दी राहत मिलती है।
केला शेक – एक गिलास दूध में केला मिलाकर शेक बनाएं और इसका सेवन करें, यह पेट के लिए ठंडक देने वाला होता है।
केला और शहद – 1 पका हुआ केला मसलकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं और खाएं, इससे एसिडिटी और जलन कम होती है।
केला और ओट्स – नाश्ते में केले के साथ ओट्स खाने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और पेट की समस्याएं दूर रहती हैं।

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# ठंडा दूध पिएं

ठंडा दूध पेट की जलन और एसिडिटी को शांत करने का एक बेहतरीन घरेलू उपाय है। दूध में मौजूद कैल्शियम पेट में बनने वाले अतिरिक्त एसिड को न्यूट्रलाइज करता है और एसिडिटी के लक्षणों को तुरंत कम करने में मदद करता है। अगर आपको अक्सर सीने में जलन, खट्टी डकारें या पेट में गैस की समस्या होती है, तो ठंडा दूध पीना फायदेमंद हो सकता है।

ठंडा दूध पीने के फायदे:

एसिडिटी को तुरंत शांत करता है – दूध का ठंडा तापमान पेट की परत को ठंडक पहुंचाता है और एसिडिटी से राहत दिलाता है।
पाचन को सुधारता है – इसमें मौजूद कैल्शियम पेट में एसिड के उत्पादन को नियंत्रित करता है, जिससे पाचन प्रक्रिया बेहतर होती है।
गैस और ब्लोटिंग से राहत देता है – दूध पीने से पेट में बनने वाली अतिरिक्त गैस को कम किया जा सकता है।
पेट की परत को कोट करता है – ठंडा दूध पेट की परत पर एक सुरक्षात्मक परत बनाता है, जिससे एसिड का प्रभाव कम हो जाता है और पेट को आराम मिलता है।
सीने में जलन और एसिड रिफ्लक्स को कम करता है – ठंडा दूध एसिड रिफ्लक्स को कंट्रोल करता है, जिससे खट्टी डकारें और पेट में जलन की समस्या दूर होती है।

ठंडा दूध पीने का सही तरीका:

बिना चीनी वाला ठंडा दूध पिएं – चीनी मिलाने से दूध का प्रभाव कम हो सकता है, इसलिए इसे बिना मीठा मिलाए पिएं।
हल्का ठंडा दूध पिएं – बहुत ज्यादा ठंडा दूध पीने से पेट में ऐंठन हो सकती है, इसलिए हल्का ठंडा दूध ज्यादा फायदेमंद होता है।
खाली पेट न पिएं – दूध को हमेशा हल्का स्नैक या भोजन के बाद पिएं, खाली पेट पीने से यह कुछ लोगों के लिए भारी लग सकता है।
एक कप दूध में शहद या इलायची मिलाएं – अगर आपको दूध पीना पसंद नहीं है, तो इसमें थोड़ा सा शहद या इलायची पाउडर मिलाकर पी सकते हैं।

अन्य तरीकों से दूध का सेवन:

दही और छाछ – अगर आपको दूध पचाने में दिक्कत होती है, तो ठंडी छाछ या ताजा दही का सेवन करें, ये भी एसिडिटी को कम करने में मदद करते हैं।
केला मिलाकर दूध पिएं – दूध और केला मिलाकर पीने से इसका प्रभाव और बढ़ जाता है और यह पेट को ज्यादा राहत देता है।
ओट्स के साथ दूध – ओट्स और दूध का सेवन करने से पाचन दुरुस्त होता है और एसिडिटी की समस्या कम होती है।

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# अजवाइन और काला नमक

अजवाइन और काला नमक का मिश्रण पाचन समस्याओं और एसिडिटी से राहत पाने का एक बेहतरीन घरेलू नुस्खा है। अजवाइन में मौजूद डाइजेस्टिव एंजाइम्स पेट में बनने वाले गैस और एसिड को नियंत्रित करने में मदद करते हैं, जबकि काला नमक पेट को ठंडक पहुंचाता है और एसिडिटी को कम करता है। अगर आपको बार-बार पेट में जलन, गैस, खट्टी डकारें और एसिडिटी की शिकायत रहती है, तो इस नुस्खे को आजमाकर तुरंत राहत पा सकते हैं।

अजवाइन और काला नमक के फायदे:

पाचन को मजबूत बनाता है – अजवाइन में थायमोल नामक तत्व होता है, जो पेट में पाचक रसों के स्राव को बढ़ाता है और खाना जल्दी पचाने में मदद करता है।
एसिडिटी और गैस से राहत – अजवाइन और काला नमक मिलाकर लेने से पेट में बनने वाली अतिरिक्त गैस और एसिड को कंट्रोल किया जा सकता है।
खट्टी डकारों और पेट में जलन को शांत करता है – यह मिश्रण एसिड को न्यूट्रलाइज करने में मदद करता है, जिससे पेट में जलन और खट्टी डकारों से राहत मिलती है।
ब्लोटिंग और अपच को दूर करता है – अजवाइन का सेवन करने से पेट में भारीपन नहीं रहता और खाना जल्दी पचता है।
मेटाबॉलिज्म को बढ़ाता है – अजवाइन और काला नमक पाचन को दुरुस्त करके मेटाबॉलिज्म को भी तेज करते हैं, जिससे शरीर हल्का महसूस करता है।

कैसे करें सेवन?

अजवाइन और काला नमक पाउडर – आधा चम्मच अजवाइन को भूनकर पीस लें और उसमें चुटकीभर काला नमक मिलाएं। इस मिश्रण को गुनगुने पानी के साथ सेवन करें।
अजवाइन पानी – एक गिलास पानी में 1 चम्मच अजवाइन उबालें, इसे छानकर हल्का ठंडा होने दें और फिर पिएं।
शहद के साथ अजवाइन – अजवाइन पाउडर में थोड़ा सा शहद मिलाकर खाने से भी पेट की समस्याओं में राहत मिलती है।
रातभर भीगे हुए अजवाइन के पानी का सेवन करें – एक चम्मच अजवाइन को रातभर पानी में भिगोकर सुबह छानकर पिएं, इससे पेट का डिटॉक्सिफिकेशन होता है और एसिडिटी नहीं बनती।

कब करें सेवन?

- खाना खाने के बाद अजवाइन और काला नमक लें, इससे पाचन बेहतर होगा।
- अगर आपको बार-बार एसिडिटी होती है, तो इसे सुबह खाली पेट लें।
- भारी और तला-भुना खाना खाने के बाद इसका सेवन करने से एसिडिटी की समस्या नहीं होती।

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# नारियल पानी पिएं

नारियल पानी एक प्राकृतिक एंटासिड की तरह काम करता है और पेट में एसिड के संतुलन को बनाए रखता है। यह न केवल एसिडिटी और गैस की समस्या को दूर करता है, बल्कि पेट को ठंडक भी पहुंचाता है और शरीर को हाइड्रेटेड रखता है। अगर आपको बार-बार एसिडिटी की शिकायत रहती है, तो नारियल पानी को अपने डेली रूटीन में जरूर शामिल करें।

नारियल पानी के फायदे:


एसिडिटी को शांत करता है – नारियल पानी में मौजूद एल्कलाइन तत्व पेट में अतिरिक्त एसिड को न्यूट्रलाइज करने में मदद करते हैं, जिससे एसिडिटी और जलन से राहत मिलती है।
पाचन तंत्र को सुधारता है – यह पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाता है और अपच, ब्लोटिंग, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याओं को कम करता है।
शरीर को हाइड्रेट करता है – नारियल पानी इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है, जिससे शरीर हाइड्रेटेड रहता है और पाचन बेहतर होता है।
डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करता है – यह शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है और पेट को साफ रखता है।
खट्टी डकारों और पेट में जलन को कम करता है – यह पेट में ठंडक पहुंचाकर जलन और खट्टी डकारों से तुरंत राहत दिलाता है।
इम्यूनिटी को मजबूत करता है – इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और पेट की समस्याओं को दूर रखते हैं।
वजन घटाने में मदद करता है – नारियल पानी कैलोरी में कम होता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।

कैसे और कब करें सेवन?


सुबह खाली पेट – नारियल पानी सुबह खाली पेट पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और एसिडिटी नहीं होती।
भारी भोजन के बाद – तला-भुना या मसालेदार खाना खाने के 1 घंटे बाद नारियल पानी पीने से एसिडिटी और पेट की जलन कम होती है।
दिन में दो बार पिएं – बेहतर पाचन के लिए दिन में कम से कम 2 बार नारियल पानी का सेवन करें।
गुनगुने नारियल पानी का सेवन करें – अगर आपको तेज एसिडिटी की समस्या है, तो हल्का गुनगुना नारियल पानी पिएं, यह तुरंत आराम देता है।
नींबू और शहद के साथ ले सकते हैं – नारियल पानी में कुछ बूंदें नींबू और थोड़ा सा शहद मिलाकर पीने से पाचन और भी बेहतर होता है।

कौन-कौन नारियल पानी पी सकता है?

- एसिडिटी और गैस की समस्या से परेशान लोग।
- गर्भवती महिलाएं, जिन्हें एसिडिटी की समस्या रहती है।
- गर्मियों में पेट की जलन से राहत पाने के लिए।
- डिहाइड्रेशन और कमजोरी महसूस करने वाले लोग।

तला-भुना खाने के बाद होने लगती है एसिडिटी? आजमाएं ये असरदार घरेलू उपाय

# हरी पत्तेदार सब्जियां ज्यादा खाएं

हरी पत्तेदार सब्जियां हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं, खासकर जब बात पाचन और एसिडिटी से राहत की हो। इनमें भरपूर मात्रा में फाइबर, मिनरल्स, और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो पेट के एसिड को नियंत्रित करने और पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।

हरी सब्जियों के फायदे:

एसिडिटी को कम करती हैं – पालक, मेथी, और पत्ता गोभी जैसी सब्जियां पेट के एसिड को बैलेंस करती हैं और जलन व खट्टी डकारों को कम करती हैं।
पाचन को बेहतर बनाती हैं – इनमें मौजूद फाइबर भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है और कब्ज, गैस और ब्लोटिंग से राहत दिलाता है।
पेट को ठंडक पहुंचाती हैं – हरी सब्जियां पेट के अंदर एक नेचुरल कूलिंग इफेक्ट पैदा करती हैं, जिससे एसिडिटी और पेट की जलन कम होती है।
डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करती हैं – इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालते हैं और पेट को साफ रखते हैं।
वजन घटाने में सहायक – हरी सब्जियां कम कैलोरी वाली होती हैं और मेटाबॉलिज्म को तेज करती हैं, जिससे वजन नियंत्रित रहता है।
गट हेल्थ को सुधारती हैं – इनमें मौजूद प्रोबायोटिक्स अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, जिससे आंतों का स्वास्थ्य बेहतर होता है।
हाइड्रेशन बनाए रखती हैं – इनमें भरपूर मात्रा में पानी होता है, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और एसिडिटी को दूर करता है।

कौन-कौन सी हरी सब्जियां खानी चाहिए?


पालक – इसमें भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम होता है, जो पेट के एसिड को संतुलित करता है।
मेथी – यह पाचन तंत्र को मजबूत करती है और पेट में गैस व जलन को कम करती है।
पत्ता गोभी – इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स पेट की सूजन को कम करते हैं और एसिडिटी से राहत दिलाते हैं।
ब्रोकली – यह शरीर को डिटॉक्स करने के साथ-साथ एसिडिटी को भी नियंत्रित करती है।
खीरा और लौकी – ये दोनों सब्जियां पानी से भरपूर होती हैं, जो पेट को ठंडक पहुंचाती हैं और एसिडिटी को कम करती हैं।
गाजर और चुकंदर – ये पेट की समस्याओं को ठीक करने और एसिडिटी से राहत देने में मदद करते हैं।

हरी सब्जियां कैसे खाएं?

सलाद के रूप में – ताजी हरी सब्जियों का सलाद बनाकर भोजन में शामिल करें।
सूप के रूप में – हरी सब्जियों का सूप पीने से पेट को आराम मिलता है और पाचन बेहतर होता है।
स्मूदी में मिलाकर – पालक और खीरे जैसी सब्जियों को स्मूदी में मिलाकर पिएं, यह पेट को ठंडक देता है।
उबली हुई सब्जियां खाएं – तली-भुनी चीजों की जगह हल्की उबली या भाप में पकाई हुई सब्जियां खाना ज्यादा फायदेमंद होता है।
रोटी या पराठे में मिलाकर – आटे में पालक या मेथी मिलाकर हेल्दी पराठा या रोटी बनाएं।

कब और कैसे खानी चाहिए?

- सुबह के नाश्ते में हरी सब्जियों का जूस या स्मूदी पिएं।
- दोपहर के भोजन में हरी सब्जियों की सब्जी और सलाद खाएं।
- रात के खाने में हल्की पकी हुई या सूप के रूप में हरी सब्जियां लें।
- एसिडिटी से बचने के लिए तली-भुनी सब्जियों की जगह उबली या भुनी हुई सब्जियां खाएं।

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