
हिंदी सिनेमा में जब भी डरावनी फिल्मों का ज़िक्र होता है, तो 'वीराना' का नाम किसी भूले हुए डर की तरह ज़ेहन में लौट आता है। 80 के दशक में जब इस फिल्म ने दस्तक दी, तो थिएटर से बाहर निकलते दर्शकों के चेहरों पर सिहरन साफ़ देखी जा सकती थी। इस फिल्म ने न सिर्फ डर पैदा किया, बल्कि उस दौर के लोगों की रातों की नींद भी उड़ा दी थी।
कम बजट, लेकिन बेजोड़ कमाई ने सबको चौंका दिया
1988 में रिलीज हुई इस फिल्म को रामसे ब्रदर्स ने बनाया था, जो अपने समय के हॉरर मास्टरमाइंड माने जाते थे। महज 60 लाख की लागत में बनी 'वीराना' ने सिनेमाघरों में मानो डर की आंधी ला दी थी। रिपोर्ट्स की मानें, तो फिल्म ने 2 करोड़ रुपये से भी ज्यादा की कमाई की थी। उस जमाने में ये आंकड़ा किसी ब्लॉकबस्टर से कम नहीं था।
जैस्मिन: जिसने एक झलक में सबका दिल चुरा लिया
फिल्म की लीड एक्ट्रेस जैस्मिन, जिनकी आंखों में रहस्य और चेहरे पर अजीब सा आकर्षण था, वो मानो दर्शकों के दिल में बस गईं। उनकी सुंदरता को देख उस समय के युवा पागल हो गए थे। लेकिन हैरानी तब हुई जब फिल्म के हिट होने के बाद जैस्मिन अचानक गायब हो गईं। जैसे वो परदे पर आईं और फिर उसी रहस्य में कहीं खो गईं।
देश छोड़ गईं जैस्मिन, पर क्यों?
अंदर की खबरों की मानें तो जैस्मिन को अंडरवर्ल्ड से धमकियां मिलने लगी थीं। जान के डर ने उन्हें भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि वो अब अमेरिका में रहती हैं। एक्टर हेमंत बिर्जे का भी ऐसा ही दावा रहा है। लेकिन आज तक जैस्मिन ने किसी मीडिया प्लेटफॉर्म पर वापसी नहीं की, जिससे उनकी मौजूदगी एक रहस्य ही बनी हुई है।

'वीराना' आज भी डर का दूसरा नाम है
कई दशकों के बाद भी जब 'वीराना' का नाम आता है तो पुराने दर्शकों को वही डर, वही बैकग्राउंड म्यूज़िक और वही सस्पेंस याद आ जाता है। टीवी हो या ओटीटी, जब भी यह फिल्म चलती है, वो पुरानी यादें और वही कंपकंपाता हुआ डर फिर से लौट आता है।
'वीराना' सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, वो उस दौर का एक अनुभव था — जब कम बजट में भी सिनेमा दिलों पर राज करता था और एक रहस्यमयी चेहरे की मुस्कान सालों बाद भी लोगों को बेचैन कर जाती है।














