
अनुराग बासु की बहुचर्चित फिल्म मेट्रो... इन दिनो भले ही बॉक्स ऑफिस पर हॉलीवुड फिल्मों की टक्कर में स्क्रीन पाने के लिए संघर्ष कर रही हो, लेकिन इसकी सादगी और संवेदनशील कहानी दर्शकों के दिल जीत रही है। अब फिल्म को लेकर एक और अहम जानकारी सामने आई है—इसका बजट जितना रिपोर्ट किया गया था, असल में वह उसका आधा है।
फिल्म का बजट केवल ₹40 करोड़, न कि ₹85 करोड़
हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में मेट्रो... इन दिनो का बजट ₹85 करोड़ से लेकर ₹100 करोड़ तक बताया गया। लेकिन फिल्म से जुड़े सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि असल में फिल्म का निर्माण केवल ₹40 करोड़ में किया गया है। इसके अलावा लगभग ₹7 करोड़ प्रचार-प्रसार और प्रिंट पर खर्च किए गए। इस हिसाब से फिल्म की कुल लागत ₹47 करोड़ है।
सूत्रों के अनुसार, "मेट्रो... इन दिनो को हमेशा ही एक छोटे लेकिन असरदार बजट में बनाना तय था। यह फिल्म किसी भव्य सेट या एक्शन सीक्वेंस पर आधारित नहीं है, बल्कि इसका केंद्रबिंदु है – रिश्तों की वास्तविकता और भावनाओं की गहराई।"
कमाई में हो रहा है निरंतर सुधार
फिल्म ने अपने आठवें दिन तक कुल ₹32.10 करोड़ (नेट) की कमाई कर ली है। दूसरे शनिवार को इसमें ₹3.5 करोड़ तक की बढ़त देखने को मिल रही है। ये आंकड़े खासकर महानगरों और शहरी मल्टीप्लेक्स सर्किट में सकारात्मक ट्रेंड दिखा रहे हैं। यही संकेत हैं कि अगले कुछ दिनों में फिल्म अपने खर्चे की भरपाई कर लेगी।
थिएटर व्यवसाय को भी मिला सहारा
PVR INOX लिमिटेड के बिज़नेस प्लानिंग प्रमुख कमल जिआंचांदानी ने कहा कि दर्शकों की सिनेमाघरों में वापसी और इस फिल्म को मिल रही प्रतिक्रियाएं साबित करती हैं कि भारत में आज भी संवेदनशील और कहानी-आधारित सिनेमा को सराहा जा रहा है। उन्होंने कहा, “मेट्रो... इन दिनो इस साल की सफल फिल्मों में से एक बनने की ओर अग्रसर है।”
मजबूत अभिनय और यथार्थवादी किरदार
भूषण कुमार के टी-सीरीज़ के बैनर तले बनी यह फिल्म आधुनिक रिश्तों पर आधारित है और इसे खासतौर पर महिला पात्रों की यथार्थवादी प्रस्तुति के लिए सराहना मिल रही है। फिल्म में अली फज़ल, फातिमा सना शेख, सारा अली खान, आदित्य रॉय कपूर, पंकज त्रिपाठी, कोंकणा सेन शर्मा, नीना गुप्ता और अनुपम खेर जैसे मजबूत कलाकार शामिल हैं।
मेट्रो... इन दिनो यह साबित करती है कि बड़े बजट की जरूरत नहीं होती, अगर आपके पास सच्ची और सजीव कहानी हो। अनुराग बासु की यह फिल्म न केवल दिल जीत रही है, बल्कि यह एक मिसाल भी बन रही है कि सादगी और भावना आज भी भारतीय दर्शकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।














