
भारतीय सिनेमा के 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' आमिर खान ने एक बार फिर अपनी बहुप्रतीक्षित वापसी के साथ एक नई घोषणा की है। उन्होंने खुलासा किया है कि उनकी अगली कॉमेडी फिल्म में वह दो गाने खुद गाने वाले हैं। यह फिल्म एक ऐसे शैली की है जिसे भारतीय सिनेमा ने लंबे समय से भुला दिया है — ऋषिकेश मुखर्जी और बासु चटर्जी की मासूम और सरल हास्य फिल्मों की शैली।
27 साल बाद फिर गायक बनकर लौटे आमिर खान
1998 में गुलाम फिल्म के 'आती क्या खंडाला' गाने से आमिर खान ने पहली बार गायक के रूप में दर्शकों को चौंकाया था। अब 27 वर्षों बाद, आमिर एक बार फिर पर्दे पर अपनी आवाज़ में गाना गाते नजर आएंगे। लेकिन इस बार यह कोई मज़ाक या प्रयोग नहीं, बल्कि पूरी तैयारी और गायन की ट्रेनिंग के साथ किया जा रहा प्रयास है।
आमिर ने बताया, “जब मैंने ‘आती क्या खंडाला’ गाया था, तब वह बस यूं ही एक मस्ती के तौर पर किया था। लेकिन अब मैं बाकायदा गायन की शिक्षा ले रहा हूं। मेरी गुरु हैं सुचेता भट्टाचार्य, जो मुझे पिछले कुछ वर्षों से सिखा रही हैं।”
कॉमेडी फिल्म में महत्वपूर्ण कैमियो और दो गाने
आमिर ने इस बात का भी खुलासा किया कि यह फिल्म अभी शीर्षकहीन है, लेकिन यह एक बहुत ही मासूम और दिल को छू लेने वाली कॉमेडी है। आमिर ने कहा, “यह वो सिनेमा है जो हम बनाना भूल चुके हैं। इसमें कोई बड़ा ड्रामा या मौत जैसी चीजें नहीं होंगी। यह फिल्म देखने के बाद एक सुकून भरी मुस्कान आपके चेहरे पर आ जाएगी।”
इस फिल्म में आमिर एक कैमियो भूमिका में होंगे, लेकिन वह इसे बेहद अहम भूमिका मानते हैं। उन्होंने कहा, “मैं एक बेहद महत्वपूर्ण कैमियो निभा रहा हूं और उस किरदार के लिए मैंने दो गाने खुद गाए हैं, जिनका संगीत राम संपत ने तैयार किया है।”
लता मंगेशकर से भावनात्मक जुड़ाव
आमिर खान ने बताया कि वह लता मंगेशकर के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं और उनका दिन उनके गानों से शुरू होता है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मैं लता दीदी को बहुत मिस करता हूं। वह मुझसे बेहद स्नेह करती थीं। काश वह मेरे गाए इन नए गानों को सुन पातीं। मैं उनके आशीर्वाद से गाने की कोशिश कर रहा हूं।”
संगीत के ज़रिए सिनेमा की वापसी का प्रयास
आमिर खान की यह नई पहल न केवल उनके बहुआयामी टैलेंट को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि बॉलीवुड में अब एक बार फिर से हल्के-फुल्के और सुकून देने वाले सिनेमा का दौर लौट सकता है। एक ऐसे दौर में जब ज़्यादातर फिल्में या तो बड़े बजट की होती हैं या तीव्र भावनात्मक तनाव से भरी होती हैं, आमिर की यह फिल्म एक 'nostalgic retreat' हो सकती है।














