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सावन में क्यों करते हैं भोलेनाथ का जलाभिषेक, जानें इससे जुड़ी आस्था और वैज्ञानिक वजहें भी

सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक क्यों किया जाता है? जानिए इसके पीछे छिपी पौराणिक कथा, भोलेनाथ की नीलकंठ स्वरूप की कहानी और कौन-सी चीजें शिवलिंग पर चढ़ाना शुभ या वर्जित मानी जाती हैं। सावन में शिव की पूजा का महत्व भी समझें।

Posts by : Kratika Maheshwari | Updated on: Tue, 08 July 2025 2:34:08

सावन में क्यों करते हैं भोलेनाथ का जलाभिषेक, जानें इससे जुड़ी आस्था और वैज्ञानिक वजहें भी

सावन का महीना आते ही हर शिवालय गूंज उठता है "हर-हर महादेव" के जयघोष से। भक्तों की भीड़ मंदिरों में उमड़ पड़ती है और जलाभिषेक की परंपरा पूरे भक्ति भाव के साथ निभाई जाती है। लेकिन क्या कभी आपने इस परंपरा के पीछे की वजह जानने की कोशिश की है? इसमें सिर्फ श्रद्धा ही नहीं, बल्कि एक गहराई से जुड़ा पौराणिक प्रसंग भी है, जो हमें भगवान शिव की त्याग भावना और हमारी संस्कृति की समृद्ध परंपरा को याद दिलाता है।

दरअसल, दे‌वशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान विष्णु पाताल लोक में विश्राम करने चले जाते हैं और अगले चार महीनों तक योग निद्रा में रहते हैं। इस अवधि में सृष्टि का संचालन शिवजी अपने हाथों में ले लेते हैं। सावन का महीना इन्हीं चार महीनों में आता है और इसे बेहद पावन माना गया है। इस दौरान भक्तजन भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ करते हैं।

अब बात करें इसके पौराणिक कारण की—जब समुद्र मंथन हुआ, तो उसमें से अमृत के साथ-साथ एक खतरनाक विष 'हलाहल' भी निकला। वह विष इतना तीव्र था कि उससे पूरी सृष्टि के नष्ट होने का खतरा उत्पन्न हो गया। ऐसे समय में, सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। इस कारण उनका गला नीला पड़ गया और उन्हें "नीलकंठ" कहा जाने लगा। लेकिन उस विष की ज्वाला इतनी तीव्र थी कि शिवजी को असहनीय पीड़ा होने लगी। उनकी यही पीड़ा शांत करने के लिए, उनके भक्त तब से लेकर आज तक जल, दूध, शहद और गंगाजल से उनका अभिषेक करते आ रहे हैं, ताकि उन्हें शीतलता प्रदान की जा सके।

भक्तों की यह भावना आज भी उतनी ही प्रबल है। मान्यता है कि सावन में भोलेबाबा का जलाभिषेक करने से वो न सिर्फ प्रसन्न होते हैं बल्कि अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण करते हैं।

शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए:

श्रद्धा के साथ अर्पित की गई वस्तुएं जब नियमों के अनुसार होती हैं, तो उसका प्रभाव और भी गहरा होता है। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, भांग, चंदन, अक्षत, धतूरा, दही, शहद, घी और सफेद फूल चढ़ाना अत्यंत शुभ और पुण्यदायक माना गया है। ये सभी चीजें भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय हैं और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि लाने वाली मानी जाती हैं।

शिवलिंग पर क्या नहीं चढ़ाना चाहिए:

जैसे कुछ चीजें शिवजी को बेहद प्रिय हैं, वैसे ही कुछ वस्तुएं ऐसी भी हैं जिन्हें अर्पित करना वर्जित माना गया है। शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते, केतकी का फूल, शंख से जल, चमेली और लाल फूल, कटे-फटे बेलपत्र नहीं चढ़ाने चाहिए। तुलसी और शंख भगवान विष्णु को अर्पित किए जाते हैं, इसलिए इन्हें शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित है। साथ ही केतकी के फूल को शापित माना गया है, इसलिए इसका प्रयोग भी निषिद्ध है।

इसलिए, जब भी आप सावन में शिवलिंग पर अभिषेक करें तो पूरी श्रद्धा के साथ सही नियमों का पालन करते हुए जल, दूध और पवित्र गंगाजल से भोलेनाथ को अर्पण करें—क्योंकि आपकी भावना ही उन्हें सबसे प्रिय है।

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