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प्रतिमा की प्ररिक्रमा से प्राप्त होती है दैवीय ऊर्जा, जानें कौनसे भगवान की कितनी परिक्रमा शुभ

By: Ankur Fri, 19 Feb 2021 07:36 AM

प्रतिमा की प्ररिक्रमा से प्राप्त होती है दैवीय ऊर्जा, जानें कौनसे भगवान की कितनी परिक्रमा शुभ

जब भी कभी मंदिर जाते हैं तो भगवान के दर्शन के बाद सभी देवी-देवताओं की परिक्रमा करते हैं और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं। भगवान की परिक्रमा करने से दैवीय शक्ति के ज्योतिर्मंडल से निकलने वाले तेज की दैवीय ऊर्जा प्राप्‍त होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि परिक्रमा से जुड़े भी कुछ नियम होते हैं जिनका पालन किया जरूरी हैं तभी इसका फायदा मिल पाता हैं। आज इस कड़ी में हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस देवी-देवता के कितनी परिक्रमा की जानी चाहिए। तो आइये जनाते हैं कैसे और कितनी करें परिक्रमा।

कैसे करें परिक्रमा

शास्‍त्रों में बताया गया है कि देवमूर्ति की परिक्रमा सदैव दाएं हाथ की ओर से आरंभ करनी चाहिए, क्योंकि दैवीय शक्ति के आभामंडल की गति दक्षिणावर्ती होती है। बाएं हाथ की ओर से परिक्रमा करने पर दैवीय शक्ति के ज्योतिर्मंडल की गति और हमारे अंदर विद्यमान दिव्य परमाणुओं में टकराव पैदा होता है, जिससे हमारा तेज नष्ट हो जाता है | जाने-अनजाने की गई उल्टी परिक्रमा का हमें दुष्परिणाम भुगतना पड़ता है। इसलिए इस बात का याद रखें परिक्रमा सदैव मूर्ति के दाएं ओर से आरंभ करें।

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गणेशजी और विष्‍णुजी की परिक्रमा

श्रीगणेशजी और हनुमानजी की तीन परिक्रमा करने का विधान है गणेश जी की परिक्रमा करने से अपनी सोची हुई कई अतृप्त कामनाओं की तृप्ति होती है गणेशजी के विराट स्वरूप व मंत्र का विधिवत ध्यान करने पर कार्य सिद्ध होने लगते हैं। भगवान विष्णुजी एवं उनके सभी अवतारों की चार परिक्रमा करनी चाहिए। विष्णुजी की परिक्रमा करने से हृदय परिपुष्ट और संकल्प ऊर्जावान बनकर सकारात्मक सोच की वृद्धि करते हैं।

सूर्य मंदिर की परिक्रमा

सूर्य मंदिर की सात परिक्रमा करने से मन पवित्र और आनंद से भर उठता है तथा बुरे और कड़वे विचारों का विनाश होकर श्रेष्ठ विचार पोषित होते हैं। हमें भास्कराय मंत्र का भी उच्चारण करना चाहिए, जो कई रोगों का नाशक है। सूर्य को अर्घ्य देकर ॐ भास्कराय नमः का जप करते हुए परिक्रमा करना शास्‍त्रों में बहुज श्रेष्‍ठ माना गया है। इससे हम सभी को आरोग्‍य की प्राप्ति के साथ ही समाज में सम्‍मान की प्राप्ति होती है।

वटवृक्ष की परिक्रमा

महिलाओं द्वारा वटवृक्ष की परिक्रमा करना सौभाग्य का सूचक है। वट सावित्री व्रत पर महिलाएं वट वृक्ष की 108 परिक्रमा करती हैं, इससे उनके पति की आयु लंबी होती है और उन्‍हें अखंड सौभाग्‍य की प्राप्ति होती है।

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भगवान शिव और मां दुर्गा की परिक्रमा

शिवजी की आधी परिक्रमा की जाती है। शिवजी की परिक्रमा करने से बुरे रात के सपने में बुरे ख्‍याल और अनर्गल स्वप्नों का खात्मा होता है। भगवान शिव की परिक्रमा करते समय अभिषेक की धार को न लांघें। आधी परिक्रमा करके वापस लौट आएं और फिर बाएं ओर से जाकर आधी परिक्रमा करें। देवी मां की एक परिक्रमा की जानी चाहिए। नवरात्र में मंदिर जाने पर भक्‍तजन मां दुर्गा की म‍ूर्ति की एक परिक्रमा लगाते हैं।

परिक्रमा के संबंध में नियम

- परिक्रमा शुरू करने के पश्चात बीच में रुकना नहीं चाहिए। साथ ही परिक्रमा वहीं खत्म करें जहां से शुरु की गई थी ध्यान रखें कि परिक्रमा बीच में रोकने से वह पूर्ण नहीं मानी जाती।
- परिक्रमा के दौरान किसी से बातचीत कतई ना करें जिस देवता की परिक्रमा कर रहे हैं, उनका ही ध्यान करें।
- उल्‍टी अर्थात बाएं हाथ की तरफ परिक्रमा नहीं करनी चाहिए।
- इस प्रकार देवी-देवताओं की परिक्रमा विधिवत करने से जीवन में हो रही उथल-पुथल व समस्याओं का समाधान सहज ही हो जाता है।

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