‘ऑपरेशन टाइगर’ के बाद महाराष्ट्र की सियासत में मचे भारी उथल-पुथल के बीच अब राम मंदिर से जुड़ा विवाद भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। शिवसेना (यूबीटी) के आक्रामक और मुखर नेता संजय राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके गुट पर अब तक का सबसे गंभीर और विवादित आरोप लगाते हुए दावा किया है कि सांसदों की खरीद-फरोख्त के लिए राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित रूप से चुराए गए धन का इस्तेमाल किया गया।
राउत के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है और सत्तापक्ष व विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
संजय राउत के गंभीर और तीखे आरोपशुक्रवार को मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने आरोप लगाया कि मंदिरों में आने वाली दानराशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा, “जो लोग मंदिर की दानपेटियों से पैसे चुराते हैं, वही लाखों-करोड़ों की रकम निकालकर उसे राजनीति में इस्तेमाल करते हैं।” राउत ने दावा किया कि राम मंदिर से कथित तौर पर 2000 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई और इसी राशि का उपयोग उनकी पार्टी के सांसदों को तोड़ने में किया गया।
उन्होंने आगे कहा कि शिवसेना (यूबीटी) से शिंदे गुट में शामिल हुए छह सांसदों को कथित रूप से 50-50 करोड़ रुपये दिए गए, जो राम मंदिर की दानराशि से जुड़े थे। राउत का यह भी दावा है कि इसी तरह की धनराशि का उपयोग तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों को प्रभावित करने में भी किया गया।
FIR, जांच और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपअयोध्या स्थित राम मंदिर चंदा संग्रह में कथित अनियमितताओं को लेकर 8 लोगों के खिलाफ दर्ज FIR पर प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने कहा कि इस पूरे मामले के मुख्य आरोपी अभी भी ट्रस्ट में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग स्वयं को हिंदुत्व का प्रतिनिधि बताते हैं, वही मंदिरों से जुड़ी धनराशि में गड़बड़ी कर रहे हैं और उसी पैसे का इस्तेमाल राजनीतिक तोड़फोड़ में किया जा रहा है।
राउत ने दोहराया कि राम मंदिर से कथित तौर पर चोरी हुए 2000 करोड़ रुपये का इस्तेमाल न केवल शिवसेना (यूबीटी) बल्कि TMC जैसे दलों के सांसदों को तोड़ने में किया गया।
शिंदे पर सीधा निशाना और व्यंग्यात्मक टिप्पणीसंजय राउत ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मंदिर की दानराशि का उपयोग राजनीतिक सौदों में किया गया है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यह पैसा पहले मंदिर में दान के रूप में आया और फिर राजनीतिक लेन-देन में वापस इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने आगे कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि यही प्रवृत्ति जारी रही तो भविष्य में शिंदे यह भी दावा कर सकते हैं कि बड़े राजनीतिक नेताओं को भी प्रभावित कर लिया गया है। राउत ने तीखे शब्दों में इसे पूरी तरह अस्वीकार्य और हास्यास्पद बताया।
‘चांदी की ईंट’ गायब होने का पुराना आरोप फिर चर्चा मेंइस ताजा 2000 करोड़ रुपये वाले आरोप से पहले संजय राउत ने सोशल मीडिया पर यह दावा भी किया था कि राम मंदिर निर्माण के दौरान उद्धव ठाकरे ने 1 करोड़ रुपये नकद और लगभग 4 किलो वजनी एक पवित्र चांदी की ईंट दान की थी। उनका कहना है कि वर्षों बाद भी इस दान की कोई आधिकारिक पावती ट्रस्ट के पास मौजूद नहीं है और वह चांदी की ईंट कथित रूप से गायब है। राउत ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी।
शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों का बड़ा दलबदल23 जून 2026 को राजनीतिक घटनाक्रम के तहत शिवसेना (यूबीटी) के छह लोकसभा सांसदों ने औपचारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया था। इन सांसदों में ओमराजे निंबालकर, संजय दीना पाटील, संजय जाधव, संजय देशमुख, नागेश पाटील आष्टिकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं।
इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बाद लोकसभा में उद्धव ठाकरे गुट की स्थिति काफी कमजोर हो गई और उनकी सीटें 9 से घटकर केवल 3 रह गईं।
राम मंदिर चंदा विवाद और FIR की पृष्ठभूमिअयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चंदा संग्रह में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर हाल ही में SIT जांच के बाद 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इस मामले में कुछ प्रमुख आरोपियों को हिरासत में भी लिया गया है।
इसके साथ ही, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी लखनऊ में SIT कार्यालय पहुंचकर राम मंदिर भूमि विवाद और चंदा घोटाले से जुड़े दस्तावेज अधिकारियों को सौंपे हैं। पूरा मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।