करीब 23 दिनों तक चली भूख हड़ताल के बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। सोमवार को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे। उनके साथ कई अन्य प्रदर्शनकारी भी आंदोलन का हिस्सा थे, जिनमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के तीन सदस्य भी शामिल थे। CJP नेताओं का कहना है कि सरकार की ओर से संवाद की पहल होने के बाद अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
पत्नी ने पहले ही रखी थी अनशन समाप्त करने की शर्तइस घटनाक्रम से एक दिन पहले सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने संकेत दिए थे कि यदि विभिन्न राजनीतिक दल संसद के मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा संबंधी जवाबदेही के मुद्दे को गंभीरता से उठाने का आश्वासन देते हैं, तो वांगचुक अपना अनशन समाप्त कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि वांगचुक चाहते हैं कि प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित हो और किसी तरह की हिंसा या टकराव की स्थिति पैदा न हो।
सरकार और CJP के बीच शुरू हुआ संवादसोमवार को केंद्र सरकार और CJP के बीच औपचारिक बातचीत की शुरुआत हुई। पार्टी की ओर से प्रवक्ता सौरव दास और नेता आशुतोष रांका केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात करने पहुंचे। CJP ने बैठक के दौरान अपनी प्रमुख मांगों को सरकार के सामने रखा और कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
जेपी नड्डा ने दी बातचीत की जानकारीकेंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट साझा करते हुए बताया कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पहली बार सरकार के साथ औपचारिक बातचीत का प्रस्ताव आया। उन्होंने लिखा कि सुबह 11:50 बजे से चर्चा शुरू हुई और सौहार्दपूर्ण माहौल में प्रतिनिधिमंडल के साथ विस्तृत बातचीत हुई। नड्डा ने बताया कि पहले मौखिक चर्चा हुई और बाद में शाम करीब चार बजे प्रदर्शनकारियों की ओर से उन्हें एक लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया।
CJP ने सरकार के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगेंबैठक के दौरान CJP प्रतिनिधियों ने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा दिए जाने की मांग और सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई की मांग शामिल थी। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि केंद्रीय मंत्री ने उनकी बातों को उचित स्तर पर उठाने का भरोसा दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार की ओर से किसी मांग को स्वीकार करने का औपचारिक आश्वासन नहीं दिया गया है।
आंदोलन जारी रखने का भी दिया संकेतसौरव दास ने कहा कि यदि मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है, तो आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे लोग तब तक अपने अभियान को जारी रखेंगे, जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता। उनका कहना था कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों और युवाओं की आवाज है।
CJP संस्थापक और AISA के सदस्य भी पहले ही समाप्त कर चुके थे अनशनसोनम वांगचुक से पहले कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके भी अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर चुके थे। इसके अलावा AISA के तीन सदस्यों ने भी 23 दिनों तक चले अनशन को खत्म कर दिया था। अभिनेत्री एवं पूर्व सांसद शबाना आज़मी, राज्यसभा सांसद मनोज झा और अभिनेता प्रकाश राज अनशन स्थल पहुंचे थे, जहां उन्होंने इन आंदोलनकारियों को तरल पदार्थ पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। इसके बाद अब सोनम वांगचुक द्वारा भी भूख हड़ताल समाप्त किए जाने से आंदोलन के अगले चरण को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।