उत्तर प्रदेश की सियासत में अलग पूर्वांचल राज्य का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने रविवार, 20 सितंबर को देवरिया में आयोजित सामाजिक समरसता महारैली में उत्तर प्रदेश के भविष्य में चार हिस्सों में बंटने का दावा किया। उन्होंने कहा कि अगर अलग पूर्वांचल राज्य बनता है तो वहां राजभर समाज के बेटे को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
राजभर का यह बयान किसी नए प्रशासनिक फैसले की घोषणा नहीं है, बल्कि अलग पूर्वांचल राज्य और उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन को लेकर उनका राजनीतिक रुख है। फिलहाल उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में बांटने को लेकर केंद्र या राज्य सरकार की ओर से किसी नए विभाजन संबंधी फैसले की जानकारी सामने नहीं आई है।
देवरिया की रैली में क्या बोले ओपी राजभरदेवरिया के सोनूघाट स्थित जनता इंटर कॉलेज में आयोजित सामाजिक समरसता महारैली को संबोधित करते हुए राजभर ने कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश का चार हिस्सों में बंटना तय है। उनके बयान के मुताबिक इन क्षेत्रों में पूर्वांचल के साथ बुंदेलखंड, पश्चिम प्रदेश और अवध प्रदेश की बात शामिल है।
पूर्वांचल राज्य बनने की स्थिति को लेकर उन्होंने अपने बेटे और सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर का नाम सीधे मुख्यमंत्री पद के संदर्भ में लिया। हालांकि यह राजभर का दावा है और इसे मौजूदा समय में किसी संवैधानिक या प्रशासनिक प्रक्रिया के पूरा होने के रूप में नहीं देखा जा सकता।
पूर्वांचल राज्य की मांग पुरानी हैउत्तर प्रदेश को अलग-अलग राज्यों में बांटने की मांग नई नहीं है। ओम प्रकाश राजभर पहले भी अलग पूर्वांचल राज्य की मांग करते रहे हैं। मार्च 2026 में महराजगंज की एक रैली में उन्होंने कहा था कि अगर भविष्य में उत्तर प्रदेश का बंटवारा होता है तो राजभर का बेटा पूर्वांचल का मुख्यमंत्री होगा।
मार्च में ही चंदौली में आयोजित एक कार्यक्रम से जुड़ी रिपोर्ट में भी राजभर के हवाले से कहा गया था कि पूर्वांचल राज्य बनने पर राजभर समाज का कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री होगा।
अप्रैल 2026 में वाराणसी में दिए गए एक बयान में राजभर ने पूर्वांचल राज्य के गठन की बात दोहराते हुए कहा था कि नए राज्य का निर्माण डॉ. आंबेडकर और महाराजा सुहेलदेव के आदर्शों पर होगा।
यूपी को चार हिस्सों में बांटने की बात पहले भी कह चुके हैंराजभर का उत्तर प्रदेश के विभाजन को लेकर रुख पहले से रहा है। अक्टूबर 2023 में उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश बड़ा राज्य है और वह इसे चार हिस्सों में बांटने के पक्ष में हैं। उस समय उन्होंने पूर्वांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश जैसी अलग-अलग क्षेत्रीय राज्य की मांगों का भी उल्लेख किया था।
इसके बाद सुभासपा ने अपने संगठनात्मक ढांचे को भी पूर्वांचल, पश्चिमांचल, बुंदेलखंड और मध्यांचल जैसे चार क्षेत्रों में विभाजित किया था।
27 फीसदी OBC आरक्षण का मुद्दा भी उठायादेवरिया की रैली में राजभर ने उत्तर प्रदेश के बंटवारे के साथ अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण का मुद्दा भी उठाया। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने 27 फीसदी OBC आरक्षण में हिस्सेदारी का सवाल उठाया और पिछड़े वर्गों को उनकी संख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व देने की मांग दोहराई।
राजभर लंबे समय से पिछड़े वर्गों के आरक्षण में हिस्सेदारी और सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते रहे हैं। उनके राजनीतिक बयानों में अलग पूर्वांचल राज्य की मांग भी इसी व्यापक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा रही है।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले सक्रिय हैं राजभरउत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है और उससे पहले सुभासपा ने पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज की हैं। फरवरी 2026 में पार्टी ने आजमगढ़ की रैली के बाद पूर्वांचल के कई जिलों में सामाजिक समरसता महारैलियों की योजना बनाई थी। पार्टी ने इन कार्यक्रमों के जरिए अलग पूर्वांचल राज्य और शराबबंदी जैसे मुद्दों को उठाने की बात कही थी।
हाल के दिनों में भी राजभर अलग-अलग जिलों में सभाओं के जरिए सपा और उसके नेतृत्व पर निशाना साधते रहे हैं। 18 सितंबर को अंबेडकरनगर में उन्होंने 2027 के चुनाव को लेकर सपा पर हमला किया था।
फिलहाल देवरिया की रैली में राजभर का बयान अलग पूर्वांचल राज्य की मांग को लेकर उनके पुराने रुख की ही एक नई सार्वजनिक अभिव्यक्ति है। उत्तर प्रदेश के चार हिस्सों में वास्तविक विभाजन या नए पूर्वांचल राज्य के गठन को लेकर इस समय कोई नया सरकारी निर्णय सामने नहीं आया है।