उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) गठबंधन की संभावनाओं को लेकर लगातार बयान दे रही है। 20 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी छोटे दलों के साथ बातचीत कर रही है और गठबंधन के विकल्प तलाश रही है। इससे पहले ओवैसी ने स्पष्ट किया था कि किसी भी गठबंधन में उनकी पार्टी को सम्मान, बराबरी और सत्ता में उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।
ओवैसी ने गठबंधन के लिए क्या शर्त रखी?असदुद्दीन ओवैसी ने जून 2026 में कहा था कि AIMIM उत्तर प्रदेश में ऐसे किसी भी दल के साथ गठबंधन के लिए तैयार है, जिसका उद्देश्य बीजेपी को सत्ता में लौटने से रोकना हो। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि उनकी पार्टी को गठबंधन में सम्मानजनक और समान दर्जा मिलना चाहिए।
ओवैसी के अनुसार, AIMIM किसी गठबंधन में केवल सहयोगी या अधीनस्थ भूमिका निभाने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सत्ता में उचित हिस्सेदारी को बातचीत का जरूरी हिस्सा बताया।
सपा के साथ बातचीत पर क्या स्थिति है?20 सितंबर को प्रकाशित ‘द संडे गार्जियन’ की रिपोर्ट में पार्टी सूत्रों के हवाले से कहा गया कि AIMIM की समाजवादी पार्टी के साथ बातचीत से सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है, जबकि बहुजन समाज पार्टी के साथ संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत आगे बढ़ने का दावा किया गया है।
हालांकि, इन बातचीत को लेकर AIMIM या संबंधित दलों की ओर से किसी औपचारिक गठबंधन समझौते की घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए इसे अभी संभावित राजनीतिक बातचीत के तौर पर ही देखा जा सकता है, न कि अंतिम गठबंधन के रूप में।
AIMIM ने सपा के PDA फॉर्मूले पर उठाए सवाल20 सितंबर को मुरादाबाद में AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले पर टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA की अवधारणा असदुद्दीन ओवैसी के बिना अधूरी है।
चौहान ने सपा पर अल्पसंख्यक मुद्दों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों से AIMIM के साथ मिलकर गठबंधन बनाने की अपील की। ये बयान AIMIM के प्रवक्ता की राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं, इन्हें किसी गठबंधन समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं माना जा सकता।
उत्तर प्रदेश में अभियान तेज करेगी AIMIMAIMIM ने उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ाने की योजना बनाई है। हिन्दुस्तान टाइम्स की 20 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, ओवैसी कानपुर में जनसभा को संबोधित करने वाले थे। इसके बाद श्रावस्ती में 27 सितंबर और आजमगढ़ में 11 अक्टूबर को कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
पार्टी की ओर से बताया गया है कि वह मुस्लिम बहुल इलाकों के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व, समान नागरिक संहिता, कथित मस्जिद विध्वंस और अल्पसंख्यक मुद्दों को चुनावी अभियान में उठाएगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवारों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अक्टूबर के अंत तक पूरी होने की संभावना है।
क्या अखिलेश यादव और मायावती से गठबंधन होगा?ओवैसी ने पहले अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की इच्छा जाहिर की थी। जुलाई में उन्होंने सपा प्रमुख से बातचीत शुरू करने की अपील की थी। बाद में AIMIM ने गठबंधन के लिए सम्मान, बराबरी और राजनीतिक हिस्सेदारी को प्रमुख शर्त के रूप में दोहराया।
फिलहाल सपा, बसपा और AIMIM के बीच किसी अंतिम गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। संभावित सीट बंटवारे, दलों की शर्तों और साझा राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।
वर्तमान स्थितिउत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले AIMIM गठबंधन के विकल्प तलाश रही है और राज्य में अपना चुनावी अभियान बढ़ा रही है। ओवैसी की मुख्य शर्त गठबंधन में सम्मानजनक दर्जा, बराबरी और राजनीतिक हिस्सेदारी से जुड़ी है। 20 सितंबर तक उपलब्ध रिपोर्टों में संभावित बातचीत का जिक्र है, लेकिन किसी अंतिम गठबंधन या सीट बंटवारे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।