जुलाई-अगस्त की खरीदारी के बाद विदेशी निवेशकों की फिर बिकवाली, सितंबर में बेचे ₹23,676 करोड़ के शेयर

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI की बिकवाली सितंबर में और बढ़ गई है। 19 सितंबर तक विदेशी निवेशकों ने एक्सचेंजों के जरिए भारतीय इक्विटी से करीब ₹23,676 करोड़ की शुद्ध निकासी की है। यह आंकड़ा 20 सितंबर को उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में सामने आया है और 18 सितंबर तक दर्ज ₹20,974 करोड़ की निकासी से अधिक है।

विदेशी निवेशकों की यह बिकवाली ऐसे समय में बढ़ी है, जब जुलाई और अगस्त में भारतीय शेयर बाजार में उनकी खरीदारी देखने को मिली थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में FPI ने करीब ₹11,045 करोड़ और अगस्त में ₹10,231 करोड़ का शुद्ध निवेश किया था। सितंबर में यह रुख फिर बदल गया है।

क्यों बेच रहे हैं विदेशी निवेशक?

सितंबर में FPI की बिकवाली के पीछे कई वैश्विक कारक बताए जा रहे हैं। इनमें कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, अमेरिका की ब्याज दरों से जुड़ी अनिश्चितता और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं। इन परिस्थितियों ने उभरते बाजारों में विदेशी निवेशकों के जोखिम लेने के रुझान को प्रभावित किया है।

भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि महंगा तेल आयात बिल और महंगाई के दबाव को प्रभावित कर सकता है। इसी दौरान रुपये पर भी दबाव बना हुआ है। 18 सितंबर को रुपया डॉलर के मुकाबले 95.875 पर बंद हुआ था।

2026 में FPI की कुल निकासी ₹2.45 लाख करोड़ के पार

सितंबर की ताजा बिकवाली के बाद 2026 में भारतीय इक्विटी से FPI की कुल निकासी करीब ₹2.45 लाख करोड़ हो गई है। यह राशि पूरे 2025 में दर्ज करीब ₹1.66 लाख करोड़ की FPI निकासी से भी अधिक है।

हालांकि, विदेशी निवेशकों का भारत से पैसा निकालना पूरी तस्वीर नहीं बताता। सितंबर में जहां सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली जारी रही, वहीं प्राथमिक बाजार में FPI निवेश बना हुआ है। 19 सितंबर तक प्राथमिक बाजार में विदेशी निवेश करीब ₹2,703 करोड़ बताया गया है।

जुलाई और अगस्त में बदली थी तस्वीर

2026 की शुरुआत में लगातार कई महीनों तक FPI बिकवाली के बाद जुलाई और अगस्त में स्थिति कुछ बदली थी। जुलाई और अगस्त दोनों महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में शुद्ध खरीदारी की। सितंबर में फिर से बिक्री शुरू होने से विदेशी पूंजी प्रवाह का रुख दोबारा चर्चा में आ गया है।

सितंबर की शुरुआत में ही FPI ने भारतीय शेयरों में करीब ₹7,443 करोड़ की निकासी की थी। इसके बाद महीने के मध्य तक बिकवाली बढ़ती गई और 19 सितंबर तक यह आंकड़ा ₹23,676 करोड़ तक पहुंच गया।
किन सेक्टरों पर पड़ा ज्यादा असर?

सितंबर के पहले पखवाड़े में वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली सबसे ज्यादा रही। इस अवधि में वित्तीय सेवाओं से करीब ₹6,204 करोड़ की निकासी दर्ज की गई। दूसरी ओर, हेल्थकेयर सेक्टर में विदेशी निवेशकों ने करीब ₹2,114 करोड़ का निवेश किया।

इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों की गतिविधि केवल पूरी तरह बाजार से बाहर निकलने तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग सेक्टरों के बीच पूंजी का पुनर्विन्यास भी हो रहा है।

आगे FPI निवेश पर किन बातों की नजर?

आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक ब्याज दरों का माहौल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम FPI के निवेश रुख को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रह सकते हैं। 18 सितंबर को प्रकाशित रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक इक्विटी फंडों से भी उस सप्ताह बड़ी निकासी हुई और उभरते बाजारों के इक्विटी फंडों में भी बहिर्वाह दर्ज किया गया।

फिलहाल उपलब्ध 20 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में विदेशी निवेशकों की भारतीय इक्विटी में बिकवाली जारी है। हालांकि प्राथमिक बाजार में निवेश बना हुआ है, इसलिए सेकेंडरी मार्केट की बिकवाली और प्राथमिक बाजार में निवेश के बीच अंतर भी नजर आ रहा है।