कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार, 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में देश की व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के सिस्टम पर कुछ चुनिंदा लोगों का कब्जा है और यह व्यवस्था छात्रों के सवाल पूछने की क्षमता को दबाती है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में सिस्टम के शीर्ष स्तर पर छह लोगों के होने का दावा किया।
राहुल गांधी ने किन लोगों का लिया नामराहुल गांधी ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उद्योगपति गौतम अदाणी तथा मुकेश अंबानी का नाम लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की अलग-अलग संस्थाओं और व्यवस्थाओं में प्रभाव कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित है।
राहुल ने अजीत डोभाल पर संचार व्यवस्था और फोन निगरानी से जुड़े आरोप भी लगाए। उन्होंने यह दावा भी किया कि अदाणी और अंबानी का आर्थिक प्रभाव व्यवस्था के संचालन में भूमिका निभाता है। ये सभी आरोप राहुल गांधी के भाषण में लगाए गए, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती है।
‘सिस्टम को छात्र नहीं, अंधभक्त चाहिए’कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों और ‘अंधभक्तों’ के बीच तुलना करते हुए कहा कि छात्र सवाल पूछते हैं, जबकि उनके अनुसार अंधभक्त सवाल नहीं करते। उन्होंने छात्रों की जिज्ञासा, प्रेम, विनम्रता, निडरता और ईमानदारी को महत्वपूर्ण गुण बताया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था छात्रों की जगह ऐसे लोगों को बढ़ावा देती है, जो सवाल नहीं उठाते। उन्होंने कहा कि छात्रों को अपने भविष्य को लेकर चिंता है और वे दबाव में हैं।
पेपर लीक, भर्ती और हॉस्टल की कमी का मुद्दाराहुल गांधी ने अपने संबोधन में पेपर लीक, सरकारी भर्तियों, हॉस्टल की कमी और छात्रों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने सवाल किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक क्यों होते हैं, हॉस्टल की इमारतें क्यों गिरती हैं और ऐसी घटनाओं में छात्रों की जान क्यों जाती है।
उन्होंने शिक्षा को सरकार की जिम्मेदारी बताते हुए किंडरगार्टन से लेकर विश्वविद्यालय तक शिक्षा की उपलब्धता पर जोर दिया। भाषण के दौरान राहुल गांधी ने शिक्षा बजट, छात्रवृत्ति, स्कूलों के बंद होने और शिक्षकों के रिक्त पदों से जुड़े कुछ आंकड़े भी पेश किए। इन आंकड़ों को यहां राहुल गांधी के दावों के रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी पर किया पलटवारराहुल गांधी के कार्यक्रम के बाद पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उनकी टिप्पणियों की आलोचना की। प्रधान ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी छात्रों की समस्याओं को राजनीतिक मुद्दे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं और छात्रों को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय ठोस समाधान चाहिए।
प्रधान ने उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात, शिक्षा ऋण सहायता और परीक्षा प्रणाली में किए गए बदलावों का उल्लेख किया। इस तरह राहुल गांधी के आरोपों के जवाब में भाजपा की ओर से शिक्षा क्षेत्र में सरकार के कार्यों और नीतियों को सामने रखा गया।
छात्रों के साथ संवाद पर राहुल का जोर‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद करते हुए उनके भविष्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि छात्रों की जिज्ञासा और सवाल पूछने की क्षमता को सुरक्षित रखना जरूरी है, क्योंकि इन्हीं गुणों से देश का निर्माण होता है।
इंदौर में हुआ यह कार्यक्रम कांग्रेस के विद्यार्थी संवाद अभियान का हिस्सा था। कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था के व्यापक सवालों से जोड़कर अपनी बात रखी।