बिहार की बाढ़ पर तेजस्वी का बड़ा हमला, 7 केंद्रीय मंत्रियों को घेरा; पासवान-मांझी पर भी साधा निशाना

बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को केंद्र सरकार के साथ-साथ बिहार से जुड़े केंद्रीय मंत्रियों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में डबल इंजन की सरकार होने और बिहार से कई केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद केंद्र से बाढ़ राहत के लिए पर्याप्त मदद नहीं मिल पा रही है। तेजस्वी ने खास तौर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बिहार के केंद्रीय मंत्रियों की भूमिका पर सवाल उठाए।

तेजस्वी यादव का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार के कई हिस्से बाढ़ की चपेट में हैं। 13 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में 48 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित थे। हालांकि कई नदियों का जलस्तर कम होना शुरू हुआ है, लेकिन अनेक स्थानों पर पानी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।

तेजस्वी ने केंद्रीय मंत्रियों पर क्यों उठाए सवाल?


पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी ने कहा कि बिहार से केंद्र में कई मंत्री होने के बावजूद राज्य के लिए विशेष राहत पैकेज हासिल नहीं किया जा सका है। उनका आरोप था कि बिहार के केंद्रीय मंत्री केंद्र सरकार से राज्य के लिए पर्याप्त सहायता लेने में प्रभावी भूमिका नहीं निभा पाए।

तेजस्वी ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 7 सितंबर को पत्र लिखकर बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और तत्काल 5,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने की मांग की थी। उनके मुताबिक इस पत्र का उद्देश्य बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए तत्काल राहत और राज्य में क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मदद सुनिश्चित करना था।

उनका हमला खास तौर पर इस राजनीतिक सवाल पर था कि जब केंद्र और राज्य में सहयोगी सरकारें हैं और बिहार से कई केंद्रीय मंत्री मोदी सरकार में शामिल हैं, तो राज्य को अतिरिक्त केंद्रीय सहायता क्यों नहीं मिल रही है। तेजस्वी ने इसी संदर्भ में चिराग पासवान और जीतन राम मांझी जैसे केंद्रीय मंत्रियों समेत बिहार के अन्य केंद्रीय मंत्रियों पर भी निशाना साधा।

चिराग पासवान और जीतन राम मांझी भी निशाने पर

तेजस्वी यादव पिछले कुछ समय से चिराग पासवान और जीतन राम मांझी पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर हमलावर रहे हैं। आरक्षण के सवाल पर भी दोनों नेताओं को लेकर तेजस्वी ने तीखी टिप्पणी की थी। सितंबर की शुरुआत में उन्होंने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी से कहा था कि यदि वे आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखते हैं तो उन्हें सामान्य सीट से चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक स्थिति साबित करनी चाहिए।

हालांकि, मौजूदा बयान का तत्काल मुद्दा आरक्षण नहीं बल्कि बिहार की बाढ़ और केंद्र से राहत सहायता का सवाल है। इसलिए तेजस्वी का पासवान और मांझी पर हमला उनके व्यापक राजनीतिक आरोपों की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर रखी थीं सात मांगें

तेजस्वी यादव ने 7 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में बिहार की बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने राज्य के लिए 5,000 करोड़ रुपये का विशेष आर्थिक पैकेज मांगा था। इसके अलावा बाढ़ में फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए वायुसेना की मदद और एयर ड्रॉपिंग की व्यवस्था करने की मांग भी रखी गई थी।

उनकी मांगों में किसानों और मजदूरों के लिए अलग राहत पैकेज तथा बिहार की वित्तीय स्थिति की CAG से जांच कराने की मांग भी शामिल थी। तेजस्वी ने दावा किया था कि बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति में राज्य को अतिरिक्त केंद्रीय सहायता की जरूरत है।

तेजस्वी ने बिहार सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बाढ़ से पहले राज्य के कॉन्टिजेंसी फंड से 4,000 करोड़ रुपये निकाले गए। यह तेजस्वी का राजनीतिक आरोप है और इसे सरकार की ओर से सिद्ध तथ्य के तौर पर नहीं माना जा सकता।

बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ता गया

बाढ़ के शुरुआती दौर में 7 सितंबर तक राज्य के 13 जिलों के 77 प्रखंडों और 438 ग्राम पंचायतों में करीब 29.13 लाख लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट थी। प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया और अरवल शामिल थे।

इसके बाद 13 सितंबर तक प्रभावित आबादी का आंकड़ा 48 लाख से अधिक बताया गया। हालांकि कई नदियों के जलस्तर में गिरावट शुरू हुई, लेकिन कई जगह स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हुई थी।

केंद्र की ओर से राहत का क्या रुख है?

केंद्र सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए SDRF के केंद्रीय हिस्से से सहायता जारी किए जाने के फैसले पहले भी लिए गए हैं। अगस्त में केंद्र ने सात बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए कुल 2,117.85 करोड़ रुपये की अग्रिम सहायता मंजूर की थी। हालांकि उस घोषणा में बिहार के लिए अलग से राशि का उल्लेख नहीं था।

यही वजह है कि बिहार के लिए विशेष पैकेज की मांग को लेकर राज्य में राजनीतिक बहस तेज हुई है। तेजस्वी चाहते हैं कि केंद्र बिहार की मौजूदा स्थिति को अलग स्तर की गंभीरता के साथ देखे और अतिरिक्त वित्तीय तथा राहत सहायता उपलब्ध कराए।

तेजस्वी ने कहा- बिहार के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार

13 सितंबर को तेजस्वी ने केंद्र पर बिहार के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने गुजरात में बाढ़ के दौरान केंद्र की सक्रियता का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार के मामले में वैसी तत्परता दिखाई नहीं दे रही है। यह उनका राजनीतिक आरोप है, जिसे केंद्र सरकार की ओर से स्वीकार किया गया तथ्य नहीं माना जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र लिखे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक जवाब नहीं मिला है। इसी आधार पर उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

अब आगे क्या?

फिलहाल बिहार में बाढ़ राहत और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाना राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। तेजस्वी यादव केंद्र से राष्ट्रीय आपदा घोषित करने, 5,000 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने और प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त राहत व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार और एनडीए के नेताओं की ओर से राहत एवं बचाव कार्य जारी रहने का दावा किया गया है।

ऐसे में आने वाले दिनों में सबसे अहम मुद्दा यह रहेगा कि केंद्र बिहार के लिए तेजस्वी की 5,000 करोड़ रुपये की मांग पर क्या कदम उठाता है और बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं पुनर्वास के लिए अतिरिक्त सहायता कितनी मिलती है।