MPSC विवाद पर फिर मैदान में अभिजीत दीपके, प्रथमेश देशमुख की मौत के बाद महाराष्ट्र में बड़े आंदोलन का ऐलान

महाराष्ट्र में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC की परीक्षा प्रक्रिया को लेकर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। पुणे में परीक्षा की तैयारी कर रहे 25 वर्षीय प्रथमेश देशमुख की मौत के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। अब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इस मामले में आंदोलन का ऐलान किया है। दीपके ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक, परीक्षा की तारीखों में बदलाव और भर्ती प्रक्रिया में देरी को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं।

दीपके का कहना है कि छात्रों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन को महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों तक ले जाया जाएगा। हालांकि, सरकार की ओर से MPSC से जुड़े हर आरोप को दोष सिद्ध तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। इसलिए पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

प्रथमेश देशमुख की मौत से बढ़ा विवाद

धाराशिव जिले के परंडा तालुका के खासापुरी गांव के रहने वाले प्रथमेश देशमुख पुणे में MPSC की तैयारी कर रहे थे। उनकी मौत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के बीच चिंता और नाराजगी बढ़ गई। उपलब्ध पुलिस जानकारी के अनुसार प्रथमेश पर करीब 2.5 लाख रुपये का कर्ज था और उनके पास एक नोट भी मिला था। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

अभिजीत दीपके ने प्रथमेश के परिवार से मुलाकात की और उनकी मौत को परीक्षा व्यवस्था और युवाओं पर बढ़ते दबाव से जोड़कर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने छात्रों से किसी भी तरह का चरम कदम नहीं उठाने और एकजुट होकर अपनी मांगें रखने की अपील भी की।

पेपर लीक और परीक्षा में देरी पर छात्रों का गुस्सा

MPSC को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों की कई मांगें हैं। इनमें परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच, लंबित परिणामों और नियुक्तियों को जल्द पूरा करना तथा परीक्षा कार्यक्रम में बार-बार होने वाले बदलावों पर रोक जैसी मांगें शामिल हैं। छात्रों ने आयोग के शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया है।

पुणे, छत्रपति संभाजीनगर और अन्य शहरों में छात्रों के प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पहले ही वर्षों का समय और बड़ी रकम खर्च होती है। ऐसे में परीक्षा की तारीखों में बदलाव, परिणाम में देरी या कथित पेपर लीक जैसी घटनाओं से उनके करियर पर सीधा असर पड़ता है।
सरकार के खिलाफ आंदोलन की तैयारी

अभिजीत दीपके ने कहा है कि छात्रों की मांगों पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो CJP आंदोलन में सक्रिय रूप से उतरेगी। ABP Live की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने MPSC की कार्यप्रणाली के खिलाफ महाराष्ट्र में बड़ा आंदोलन खड़ा करने की घोषणा की है।

टीवी9 मराठी के अनुसार दीपके ने सरकार और MPSC से छात्रों की मांगों पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा है और ऐसा नहीं होने पर पुणे समेत राज्यभर में प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

फडणवीस सरकार पर दीपके के सवाल

इस पूरे विवाद में दीपके ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार को भी निशाने पर लिया है। उनका आरोप है कि परीक्षा व्यवस्था की समस्याओं और युवाओं के बढ़ते दबाव पर सरकार को गंभीरता से आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने प्रथमेश की मौत को केवल एक व्यक्तिगत घटना मानने के बजाय प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था की बड़ी समस्या से जोड़ने की मांग की है।

दीपके ने प्रथमेश की मौत के बाद छात्रों से कहा कि उन्हें न्याय की मांग को लेकर पीछे नहीं हटना चाहिए। NDTV के मुताबिक उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी आंदोलन कर रहे हैं, उन्हें एकजुट रहना चाहिए और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाना चाहिए।

MPSC अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

मौजूदा विरोध में सामने आई प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना, कथित पेपर लीक की जांच, लंबित परिणाम और नियुक्तियों की प्रक्रिया में तेजी तथा परीक्षा कार्यक्रम में बार-बार होने वाले बदलावों को रोकना शामिल है। कुछ प्रदर्शनकारी MPSC के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।

इस बीच, प्रथमेश देशमुख की मौत की पुलिस जांच अपनी जगह जारी है। उनकी मौत का कारण केवल किसी एक प्रशासनिक फैसले को मान लेना अभी उचित नहीं होगा। पुलिस की शुरुआती जानकारी में आर्थिक दबाव और कर्ज का उल्लेख सामने आया है, जबकि दीपके और छात्र संगठनों ने इसे व्यापक परीक्षा व्यवस्था से जोड़कर सवाल उठाए हैं।

अब आगे क्या होगा?

अभिजीत दीपके के आंदोलन के ऐलान के बाद MPSC विवाद के और राजनीतिक रूप लेने की संभावना है। छात्रों की मांगों पर सरकार और आयोग की प्रतिक्रिया इस मामले की दिशा तय करेगी। फिलहाल अभ्यर्थियों का आंदोलन परीक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग पर केंद्रित है।

प्रथमेश देशमुख की मौत ने इस बहस को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में आंदोलन के साथ-साथ उनकी मौत की जांच के निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि व्यक्तिगत आर्थिक दबाव और परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी परेशानियों में किस तरह का संबंध था