राघव चड्ढा के झटके के बाद केजरीवाल का नया नियम, राज्यसभा भेजने से पहले 100 बार जांचेंगे उम्मीदवार

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने राज्यसभा सांसदों के चयन को लेकर बड़ा बदलाव करने के संकेत दिए हैं। राघव चड्ढा समेत सात राज्यसभा सांसदों के AAP छोड़कर बीजेपी में जाने के बाद केजरीवाल ने कहा कि अब पार्टी किसी व्यक्ति को राज्यसभा भेजने से पहले उसके बारे में बेहद सावधानी से जांच-पड़ताल करेगी। गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि आगे से उम्मीदवार को चुनने से पहले उसे “100 बार ठोक-बजा कर” देखा जाएगा।

हालांकि, फिलहाल केजरीवाल ने यह नहीं बताया है कि अगली बार AAP की ओर से राज्यसभा में किसे भेजा जाएगा। इसलिए मौजूदा खबर किसी नए उम्मीदवार की घोषणा नहीं, बल्कि पार्टी के भविष्य के चयन-प्रक्रिया में बदलाव से जुड़ी है।

राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के जाने से AAP को बड़ा झटका

इस साल अप्रैल में AAP को राज्यसभा में बड़ा राजनीतिक झटका लगा था। राघव चड्ढा के साथ अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी बीजेपी में चले गए। इससे राज्यसभा में AAP के सांसदों की संख्या 10 से घटकर केवल तीन रह गई।

इन सात सांसदों का दल बदलना इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि वे AAP के राज्यसभा दल के दो-तिहाई से अधिक सदस्य थे। इसी आधार पर उनके बीजेपी में जाने को दलबदल विरोधी कानून के तहत अलग तरीके से देखा गया और राज्यसभा सभापति की ओर से उनके बीजेपी में शामिल होने की प्रक्रिया को मंजूरी मिली।

केजरीवाल ने इसे पार्टी के लिए बताया बड़ा सबक

गोवा में केजरीवाल ने राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने को AAP के लिए गंभीर झटका बताया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं को पार्टी ने राज्यसभा भेजा था, जनता ने सीधे उन्हें नहीं चुना था। इसी घटनाक्रम को उन्होंने पार्टी के लिए एक सीख बताया।

केजरीवाल ने यह भी कहा कि AAP के निर्वाचित प्रतिनिधियों ने लोगों का भरोसा नहीं तोड़ा है। उन्होंने गोवा, जम्मू-कश्मीर और गुजरात में पार्टी के विधायकों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि बीजेपी की ओर से उन्हें तोड़ने की कोशिशों के बावजूद पार्टी के कई निर्वाचित प्रतिनिधि AAP के साथ बने रहे। यह केजरीवाल का राजनीतिक दावा है।
अब राज्यसभा उम्मीदवारों की जांच होगी और सख्त

केजरीवाल के मुताबिक, पार्टी अब राज्यसभा उम्मीदवार चुनते समय पहले की तुलना में कहीं ज्यादा सतर्क रहेगी। उनका कहना था कि भविष्य में किसी व्यक्ति को उच्च सदन भेजने से पहले उसकी राजनीतिक प्रतिबद्धता और विश्वसनीयता को बहुत गहराई से परखा जाएगा।

यही वह बात है जिसे मूल खबर में “नया रूल” कहा गया है। हालांकि, इसे किसी औपचारिक लिखित नियम या पार्टी संविधान में किए गए बदलाव के रूप में पेश करना अभी सही नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक केजरीवाल ने फिलहाल पार्टी की भविष्य की चयन प्रक्रिया के बारे में अपना रुख बताया है।

अगली बार राज्यसभा में कौन जाएगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि AAP भविष्य में राज्यसभा की खाली होने वाली सीटों के लिए किस चेहरे पर भरोसा करेगी। लेकिन केजरीवाल के ताजा बयान में किसी संभावित उम्मीदवार का नाम नहीं लिया गया है। इसलिए अभी किसी नेता का नाम बताना या यह दावा करना कि फलां व्यक्ति को राज्यसभा भेजा जाएगा, अटकल होगी। फिलहाल पुष्टि सिर्फ इतनी है कि AAP अपने अगले राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में पहले से ज्यादा सतर्कता बरतने जा रही है।

गोवा में गठबंधन के ऐलान के दौरान दिया बयान

केजरीवाल ने यह टिप्पणी गोवा में AAP और Goa Forward Party के ‘Goa First’ गठबंधन के ऐलान के दौरान की। दोनों दलों ने 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन किया है और इसे बीजेपी तथा कांग्रेस से अलग विकल्प के तौर पर पेश किया है।

इसी कार्यक्रम में केजरीवाल ने AAP के सात राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम पार्टी के लिए सीख है और अब उम्मीदवारों के चयन में ज्यादा सावधानी बरती जाएगी।

AAP के पास अब राज्यसभा में सिर्फ तीन सांसद

सात सांसदों के बीजेपी में जाने के बाद AAP के राज्यसभा में अब तीन सांसद बचे हैं—संजय सिंह, एनडी गुप्ता और संत बलबीर सिंह सीचेवाल। अप्रैल में हुए बड़े बदलाव के बाद उच्च सदन में पार्टी की संख्या और राजनीतिक प्रभाव दोनों पर असर पड़ा है।

राघव चड्ढा के बाहर होने का असर सिर्फ संख्या तक सीमित नहीं रहा। वह AAP के प्रमुख राष्ट्रीय चेहरों में शामिल थे और पार्टी की ओर से राज्यसभा में मुखर भूमिका निभाते थे। उनके बीजेपी में जाने के बाद AAP नेतृत्व ने पार्टी के भीतर उम्मीदवारों के चयन और राजनीतिक निष्ठा को लेकर नए सिरे से सोचने के संकेत दिए हैं।

राघव चड्ढा का AAP से बीजेपी तक का सफर

राघव चड्ढा ने अप्रैल 2026 में AAP छोड़कर बीजेपी में जाने का ऐलान किया था। उनके साथ कई अन्य राज्यसभा सांसद भी बीजेपी में शामिल हुए। चड्ढा ने उस समय AAP नेतृत्व से मतभेदों का हवाला दिया था और कहा था कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है।

इसके बाद सात सांसदों के बीजेपी में जाने की प्रक्रिया पूरी हुई और राज्यसभा में बीजेपी की संख्या बढ़ी, जबकि AAP की ताकत काफी कम हो गई।

अब आगे क्या?


केजरीवाल के बयान से संकेत मिलता है कि AAP राज्यसभा के लिए ऐसे उम्मीदवार चुनने पर ज्यादा जोर देगी जिनकी पार्टी के साथ लंबे समय तक राजनीतिक प्रतिबद्धता और भरोसेमंद संबंध हों। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी तक किसी नए उम्मीदवार के चयन की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

इसलिए फिलहाल सबसे अहम बदलाव उम्मीदवार का नाम नहीं, बल्कि उसे चुनने की प्रक्रिया को लेकर केजरीवाल का बदला हुआ रुख है। राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के जाने के बाद AAP नेतृत्व अब राज्यसभा के लिए किसी भी नए चेहरे को पहले की तुलना में कहीं अधिक कसौटियों पर परखने की बात कर रहा है।