मुंबई। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले पर शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक की कार्रवाई केवल निचले स्तर के लोगों तक सीमित रही है, जबकि पूरे मामले में जिन प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। राउत ने मांग की कि जांच का दायरा बढ़ाते हुए सभी जिम्मेदार व्यक्तियों को कानून के दायरे में लाया जाए।
मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है तो उसे किसी भी व्यक्ति के पद या प्रभाव से प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में चंपत राय, अनिल मिश्रा, गोपाल राव तथा उन लोगों से भी पूछताछ और कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने कथित तौर पर जमीन खरीदकर उसे ट्रस्ट को बेचा। इसके साथ ही उन्होंने अयोध्या के मेयर की भूमिका की भी जांच की मांग की। राउत ने आरोप लगाया कि अब तक जांच एजेंसियों ने केवल छोटी मछलियों को पकड़ा है, जबकि बड़े लोगों तक कार्रवाई नहीं पहुंची है।
उन्होंने दावा किया कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि भगवान राम की आस्था से जुड़े एक राष्ट्रीय प्रतीक के साथ कथित विश्वासघात का विषय है। उनके अनुसार, यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो इसे राम द्रोह और देश के साथ गंभीर विश्वासघात के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इसी प्रकार के आरोप किसी अन्य संस्था या संगठन पर लगे होते तो भारतीय जनता पार्टी इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाती और हिंदुत्व के खतरे की बात करती।
इसी संदर्भ में संजय राउत ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई नहीं हो रही है, तो क्या इसे हिंदुत्व की रक्षा कहा जाएगा? उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या अब यही हिंदुत्व की नई परिभाषा है। राउत ने कहा कि जांच का उद्देश्य केवल कुछ लोगों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाना होना चाहिए।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की भी मांग की। उनका कहना था कि जब तक जांच रिपोर्ट देश के सामने नहीं लाई जाएगी, तब तक लोगों के मन में उठ रहे सवालों का समाधान नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रिपोर्ट को सार्वजनिक करना जरूरी है, ताकि जनता स्वयं तथ्यों को समझ सके।
राउत ने यह भी सुझाव दिया कि यदि राम मंदिर ट्रस्ट में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए कोई स्वतंत्र समिति गठित की जाती है, तो उसमें सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के एक-एक प्रतिनिधि को शामिल किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि पूरे देश की आस्था और विश्वास से जुड़ा मामला है, इसलिए जांच प्रक्रिया में व्यापक राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है। ऐसे में यदि चढ़ावे या ट्रस्ट के संचालन में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना आवश्यक है। उनका कहना था कि देश की जनता इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच चाहती है और किसी भी दोषी को कानून से ऊपर नहीं माना जाना चाहिए।
अपने बयान के अंत में संजय राउत ने चेतावनी दी कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे नहीं बढ़ी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो उनकी पार्टी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करेगी। उन्होंने दोहराया कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी कथित भ्रष्टाचार या अनियमितता की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।