दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से जारी छात्र आंदोलन को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का दौर तेज हो गया है। आंदोलन को समाप्त कराने की दिशा में शुक्रवार को अहम बैठक आयोजित की गई। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। उन्होंने सरकार की ओर से नीट समेत विभिन्न मुद्दों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के हाथों जूस पीकर अपना अनशन तोड़ा। वहीं दूसरी ओर सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों के बीच भी विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने अपनी पांच पैराग्राफ की लिखित मांग सरकार को सौंपी।
सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच हुई अहम बैठकशुक्रवार को केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। संगठन की ओर से सौरभ दास और आशुतोष रांका बैठक में शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच यह बैठक दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई, जहां आंदोलन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों का विस्तृत लिखित दस्तावेज सरकार को सौंपा, जिसमें कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि इस बातचीत के जरिए आंदोलन के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश की गई है।
इससे पहले सरकार ने CJP नेताओं को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के आवास या कार्यालय में बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि संगठन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और कहा कि यदि सरकार बातचीत करना चाहती है तो या तो जंतर-मंतर आए या फिर किसी निष्पक्ष स्थान पर बैठक आयोजित की जाए। अंततः दोनों पक्षों की सहमति से कॉन्स्टिट्यूशन क्लब को बैठक के लिए चुना गया। इस घटनाक्रम को सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ी CJPएक तरफ जहां सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है, वहीं CJP ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका आंदोलन अभी खत्म नहीं होगा। संगठन का कहना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कोई भी समाधान स्वीकार नहीं किया जाएगा। CJP का आरोप है कि पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए।
संगठन के प्रतिनिधि अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने दोहराया कि सरकार की ओर से अन्य आश्वासनों के बावजूद उनकी यह प्रमुख मांग फिलहाल बरकरार है और आंदोलन इसी मुद्दे पर आगे भी जारी रहेगा।
पेपर लीक पर सख्त कानून लाने की तैयारीइधर केंद्र सरकार भी पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए नए और अधिक कठोर कानूनी प्रावधान तैयार करने में जुटी हुई है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्तावित मसौदे पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद आगामी सप्ताह संसद में नया विधेयक पेश किया जा सकता है।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित कानून में पेपर लीक और संगठित परीक्षा धांधली के मामलों की सुनवाई विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने की व्यवस्था होगी, ताकि तीन महीने के भीतर मामलों का निपटारा किया जा सके। साथ ही दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किए जाने की भी तैयारी है। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना बताया जा रहा है।