नीट पेपर लीक विवाद और देशभर में तेज होते छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। सूत्रों के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मामले से जुड़े 47 अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही कुछ अधिकारियों के खिलाफ मिली रिपोर्टों के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू करने का भी फैसला लिया गया है। माना जा रहा है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बहाल करने और छात्रों के बीच बढ़ते असंतोष को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार ने यह निर्णय ऐसे समय लिया है जब नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं। इससे पहले गुरुवार को केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल भी किया था। 17 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादलों के दौरान उच्च शिक्षा विभाग के तत्कालीन सचिव को उनके पद से हटाकर 1994 बैच के आईएएस अधिकारी नरेश पाल गंगवार को नया सचिव नियुक्त किया गया। सरकार के इन लगातार फैसलों को परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पेपर लीक पर सरकार का सख्त रुखजंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच केंद्र सरकार अब पेपर लीक नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई करती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देर रात जारी वीडियो संदेश के बाद शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में पेपर लीक से जुड़े नए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित कानून में दोषियों के लिए पहले से कहीं अधिक कठोर दंड का प्रावधान रखा गया है।
बताया जा रहा है कि नए बिल में संगठित पेपर लीक या परीक्षा धांधली के मामलों में शामिल लोगों पर अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। इसके अलावा दोषी पाए जाने पर कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक के कठोर कारावास का प्रावधान भी प्रस्तावित है। कई मामलों में अदालत परिस्थितियों के अनुसार जेल और जुर्माना दोनों की सजा एक साथ भी दे सकेगी।
मौजूदा कानून से अधिक कठोर होंगे नए प्रावधानवर्तमान कानूनी व्यवस्था के तहत पेपर लीक के मामलों में सामान्यतः तीन से पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। वहीं यदि कोई व्यक्ति संगठित परीक्षा माफिया या बड़े स्तर की परीक्षा धांधली में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ दस वर्ष तक की कैद और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान लागू हो सकता है। इसके बावजूद बीते वर्षों में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।
इसी कारण केंद्र सरकार अब कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी में है। सरकार का मानना है कि कठोर दंड, भारी आर्थिक जुर्माना और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया के जरिए संगठित पेपर लीक गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी।
छात्र आंदोलन के बीच बढ़ा सरकार पर दबावनीट पेपर लीक का मुद्दा पिछले कई सप्ताह से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकार लगातार यह भरोसा दिला रही है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। हालांकि, इस पूरे विवाद ने उस समय और अधिक तूल पकड़ लिया जब सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद यह मामला फिर से सुर्खियों में आ गया।
शुरुआत में सीमित स्तर पर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है। जंतर-मंतर पर हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर जुटे हुए हैं। एक ओर सरकार लगातार प्रशासनिक और कानूनी कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी अब भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाली बातचीत और नए कानूनी कदमों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।