पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के कारण एलपीजी आपूर्ति पर पैदा हुई अनिश्चितता के बीच इंडक्शन कुकटॉप और इलेक्ट्रिक केतली की मांग में तेजी आई है। लोग अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और स्टोर दोनों से इन उपकरणों की खरीदारी कर रहे हैं।
क्रोमा के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, 'पिजन' ब्रांड बनाने वाली स्टोवक्राफ्ट लिमिटेड की औसत साप्ताहिक ऑनलाइन बिक्री में चार गुना उछाल देखा गया है।
ग्राहक कर रहे हैं एहतियाती खरीदारीइन्फिनिटी रिटेल लिमिटेड (क्रोमा) के सीईओ और एमडी शिबाशीष राय ने बताया कि अचानक बढ़ी मांग के कारण औसत दैनिक बिक्री दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। राय ने कहा कि ग्राहक एक साथ कई चूल्हे खरीद रहे हैं, जो इस संकट के समय एहतियाती खरीदारी का संकेत है।
इलेक्ट्रिक केतली की मांग भी सामान्य स्तर से लगभग दोगुनी हो गई है। क्रोमा ने ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अपने स्टोर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इन उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की है।
ऑनलाइन बिक्री में रिकॉर्ड उछालअमेज़न इंडिया के प्रवक्ता ने बताया कि पिछले दो दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री 30 गुना बढ़ गई है। इसके अलावा, चावल पकाने वाले कुकर (राइस कुकर) और इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर की बिक्री में चार गुना की वृद्धि हुई है। एयर फ्रायर और इलेक्ट्रिक केतली की बिक्री भी दोगुनी हो गई है।
प्रवक्ता ने कहा कि एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु के कुछ हिस्सों में ग्राहक अमेज़न नाउ के माध्यम से कुछ ही मिनटों में ये उत्पाद प्राप्त कर पा रहे हैं। स्टोवक्राफ्ट के प्रबंध निदेशक राजेंद्र गांधी ने भी कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद ऑनलाइन बिक्री में चार गुना उछाल आया है।
खानपान उद्योग वैकल्पिक उपायों की तलाश मेंदेश भर के रेस्तरां, स्ट्रीट फूड विक्रेता और खानपान व्यवसाय वाले अब एलपीजी की कमी के चलते वैकल्पिक उपायों पर ध्यान दे रहे हैं। वे इंडक्शन कुकटॉप, माइक्रोवेव, जलाऊ लकड़ी और सौर ऊर्जा जैसे विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
दिल्ली में अनियमित एलपीजी आपूर्ति के कारण कई रेस्तरां के पास केवल एक-दो दिन का स्टॉक बचा है। इससे उन्हें अस्थायी रूप से बंद होने का डर है और कर्मचारियों के वेतन को लेकर भी चिंता बनी हुई है। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का कहना है कि कई भोजनालय स्थिति से निपटने के लिए नए वैकल्पिक उपायों को लागू करने में जुटे हैं।