रिश्वतखोरी पर पश्चिम बंगाल सरकार की बड़ी कार्रवाई, दो मोटर वाहन निरीक्षक निलंबित, मुख्यमंत्री बोले- 'भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस'

पश्चिम बंगाल सरकार ने कथित रिश्वतखोरी और प्रशासनिक दुरुपयोग के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पश्चिम बर्धमान के रामपुर चेकपोस्ट पर तैनात दो मोटर वाहन निरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दोनों अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने एक मालवाहक ट्रक के चालक को अनुचित तरीके से रोका, उसे परेशान किया और कथित तौर पर रिश्वत की मांग की। मामले की जानकारी सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने तत्काल कार्रवाई की, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और पद के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगी।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस कार्रवाई की जानकारी साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन, किसी भी विभाग या सरकारी तंत्र में कार्यरत कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रशासन को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है तथा भ्रष्टाचार में शामिल लोगों को सिस्टम से बाहर करना उसकी प्राथमिकता है। उन्होंने दोहराया कि रिश्वतखोरी और अवैध वसूली जैसी गतिविधियों को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने पूरे घटनाक्रम का भी विस्तार से उल्लेख किया। उनके अनुसार, ट्रक संख्या JH09BA3535 सर्विसिंग के बाद गैराज लौट रहा था, तभी पश्चिम बर्धमान स्थित रामपुर चेकपोस्ट पर उसे रोक लिया गया। आरोप है कि ट्रक चालक शिवा यादव को बिना किसी वैध कारण के परेशान किया गया और उससे रिश्वत देने का दबाव बनाया गया। जब चालक ने कथित रूप से रिश्वत देने से इनकार कर दिया, तो वाहन को जब्त कर लिया गया। इसके बाद अधिकारियों ने टैक्स के नाम पर 22 हजार रुपये की मांग की, जबकि संबंधित टैक्स को राज्य सरकार पहले ही समाप्त कर चुकी थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे ही इस मामले में जबरन वसूली और अधिकारों के दुरुपयोग की शिकायत मिली, परिवहन विभाग ने बिना देरी किए कार्रवाई शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर रामपुर चेकपोस्ट पर तैनात मोटर वाहन निरीक्षक नाजिमुल हक और अनुपम बनर्जी को पश्चिम बंगाल सेवा नियम, 1971 के नियम 7(1)(a) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले को विस्तृत आपराधिक जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को भेज दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा पद का दुरुपयोग, अवैध वसूली या भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने सभी प्रशासनिक विभागों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी गैर-कानूनी रूप से पैसे वसूलने या नागरिकों को परेशान करने का दोषी पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जिन वाहनों को गलत तरीके से रोका गया है, उन्हें जल्द से जल्द छोड़ा जाए और ट्रांसपोर्टरों के साथ किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को सख्ती से रोका जाए।

अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार का लक्ष्य एक पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखने और सरकारी व्यवस्था को जवाबदेह बनाने के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।