केतन मर्डर केस में बड़ा खुलासा, सिया गोयल और चेतन चौधरी कोड वर्ड में करते थे बातचीत

पुणे के चर्चित केतन हत्याकांड की जांच में लगातार नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस जांच के दौरान अब यह जानकारी सामने आई है कि मामले के दो आरोपियों, सिया गोयल और चेतन चौधरी, के बीच होने वाली बातचीत कथित तौर पर कोड वर्ड और निकनेम के जरिए होती थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस तरह की बातचीत का उद्देश्य संवाद को सामान्य लोगों की समझ से दूर रखना हो सकता है। इसी वजह से पुलिस अब दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर विस्तृत पूछताछ करने की तैयारी में है, ताकि इन कोडेड संदेशों का वास्तविक अर्थ समझा जा सके।

सिया गोयल और चेतन चौधरी पर आरोप है कि उन्होंने केतन की हत्या की साजिश रची और उसे पुणे के लोहागढ़ किले की पहाड़ी से करीब 400 फीट गहरी खाई में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनकी पड़ताल अभी भी जारी है।

दूसरे मोबाइल की जांच से खुल सकते हैं नए राज

जांच अधिकारियों के अनुसार, सिया और चेतन आपसी बातचीत में अक्सर विशेष कोड वर्ड और अलग-अलग निकनेम का इस्तेमाल करते थे। इसी क्रम में पुलिस ने सिया गोयल का एक दूसरा मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस डिवाइस से प्राप्त डेटा मामले की जांच में कई नए सुराग दे सकता है और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में मदद मिलेगी।

इसी बीच पुणे की एक अदालत ने शुक्रवार को सिया गोयल और चेतन चौधरी को हत्या के मामले में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में रहेंगे, जबकि पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच जारी रखेगी।
कोडेड चैट को समझने के लिए पुलिस ने मांगी थी अतिरिक्त कस्टडी

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत से दोनों आरोपियों की पुलिस हिरासत तीन दिन और बढ़ाने का अनुरोध किया था। अभियोजन ने दलील दी कि आरोपियों के मोबाइल फोन से जो चैट रिकॉर्ड मिले हैं, उनमें सामान्य भाषा के बजाय संकेतों और कोडेड शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इन संदेशों का सही अर्थ समझने और मामले की पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए दोनों से और पूछताछ आवश्यक है।

हालांकि बचाव पक्ष ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस को पहले ही पर्याप्त समय मिल चुका है और आगे की पूछताछ के लिए अतिरिक्त पुलिस हिरासत की जरूरत नहीं है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अभियोजन की अतिरिक्त कस्टडी की मांग स्वीकार नहीं की और दोनों आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।

पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए सिया ने दी सहमति

इससे पहले गुरुवार को सिया गोयल ने पॉलीग्राफ टेस्ट, जिसे आमतौर पर लाइ डिटेक्टर टेस्ट कहा जाता है, कराने के लिए अपनी सहमति दे दी थी। इस प्रक्रिया के दौरान जांच एजेंसियां आरोपी से विभिन्न सवाल पूछते हुए उसकी शारीरिक प्रतिक्रियाओं, जैसे हृदय गति, रक्तचाप, पसीना और अन्य जैविक संकेतों का विश्लेषण करती हैं, ताकि यह समझा जा सके कि जवाबों में किसी प्रकार का विरोधाभास तो नहीं है। भारतीय कानून के तहत यह परीक्षण आरोपी की स्वैच्छिक सहमति के बिना नहीं किया जा सकता।

घटनास्थल पर दोबारा कराया गया घटनाक्रम का पुनर्निर्माण

जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस सिया गोयल और चेतन चौधरी को एक बार फिर लोहागढ़ किले के पहाड़ी क्षेत्र में भी लेकर गई। वहां जांच टीम ने एक डमी की मदद से पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया, ताकि यह समझा जा सके कि घटना वाले दिन कथित रूप से क्या हुआ था और केतन के खाई में गिरने की परिस्थितियां क्या थीं। पुलिस का मानना है कि इस प्रक्रिया से घटनाओं का क्रम स्पष्ट करने और उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, फोरेंसिक साक्ष्यों और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटी हुई हैं।