अमेरिका ने भारत सहित 17 देशों से आयात किए जाने वाले कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह फैसला उन वस्तुओं को लेकर लिया गया है, जिनके उत्पादन में कथित तौर पर जबरन मजदूरी (Forced Labour) का इस्तेमाल होने की आशंका जताई गई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने शुक्रवार को 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत यह बड़ा फैसला घोषित किया। खास बात यह है कि यह घोषणा पहले से लागू 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क की अवधि समाप्त होने से ठीक एक दिन पहले की गई है।
ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत बड़ा कदमअमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। बयान के अनुसार, ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत कुल 60 देशों पर नए टैरिफ लागू किए गए हैं। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि संबंधित देश जबरन मजदूरी से तैयार उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने और उससे जुड़े नियमों को सख्ती से लागू करने में नाकाम रहे हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य केवल व्यापारिक असंतुलन को दूर करना नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के संरक्षण को भी बढ़ावा देना है। उनके मुताबिक, यह निर्णय वैश्विक स्तर पर श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने और अनुचित व्यापारिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में उठाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नई रणनीतिइस फैसले की पृष्ठभूमि में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट का वह निर्णय भी अहम माना जा रहा है, जिसमें फरवरी में ट्रंप प्रशासन द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए Reciprocal Tariffs को अवैध ठहराते हुए निरस्त कर दिया गया था। अदालत के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने सभी देशों पर अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू किया था, जिसकी अवधि शुक्रवार को समाप्त हो रही थी। अब उसकी जगह नया टैरिफ ढांचा लागू करने का ऐलान किया गया है।
इससे पहले अमेरिकी प्रशासन यह भी घोषणा कर चुका है कि अगस्त 2028 से आयातित जेनेरिक दवाओं पर भी टैरिफ लागू किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह कदम अमेरिका की व्यापक व्यापार नीति और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने की रणनीति का हिस्सा है।
भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ सकता है असरभारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध हैं। अमेरिका, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार होने के साथ-साथ भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा बाजार भी है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का कुल व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इसमें भारत का निर्यात करीब 87.3 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया।
इस बीच भारत ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की ओर से शुरू की गई जांचों और प्रस्तावित टैरिफ पर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई है। भारत का कहना है कि इन सभी मुद्दों पर दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) की वार्ताओं के दौरान बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जा सकता है। भारतीय पक्ष का मानना है कि परस्पर संवाद और सहमति से व्यापारिक विवादों को सुलझाना दोनों देशों के हित में होगा।