आज वसंत पंचमी है, वह दिन जब प्रकृति खुद पीले रंग की चादर ओढ़ लेती है—पीले फूल, पीला तिलक और चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का संचार। पीला रंग केवल परंपरा का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसके पीछे विज्ञान भी छिपा है।
न्यूरोसाइंस के अनुसार पीला रंग मस्तिष्क के अलर्ट सेंटर को सक्रिय करता है। रिसर्च बताती है कि येलो वेवलेंथ देखने से ब्रेन में डोपामाइन का स्तर बढ़ता है और फोकस से जुड़े न्यूरल सिग्नल तेज हो जाते हैं। यही कारण है कि हल्के पीले रंग का वातावरण बच्चों को पढ़ाई में ज्यादा एकाग्र रहने में मदद करता है।
वसंत पंचमी के दिन किताबें मां सरस्वती के चरणों में रखी जाती हैं और प्रार्थना होती है—“मां, इस बार अच्छे नंबर दिला देना।” आज इस प्रार्थना का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि परीक्षा का समय नजदीक है। घर-घर में सिलेबस दोहराया जा रहा है और एक ही आवाज गूंजती है—“पढ़ाई करो, मोबाइल छोड़ो, ध्यान क्यों नहीं लगता?”
लेकिन आज सवाल सिर्फ बच्चों से नहीं, माता-पिता से भी है। क्या केवल बार-बार टोकना ही सही परवरिश है, या पढ़ाई के लिए सही माहौल बनाना भी उतना ही जरूरी है? अगर बच्चों से मोबाइल दूर रखने की उम्मीद है, तो मम्मी-पापा को भी फोन से दूरी बनानी होगी। अगर बच्चा टीवी न देखे, तो बड़ों को भी यह त्याग करना होगा।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बच्चा किताबों से कम और माहौल से ज्यादा भटकता है। घर में शोर, तनाव, गुस्सा और नकारात्मकता जितनी कम होगी, बच्चे का फोकस उतना बेहतर होगा।
एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बच्चे औसतन करीब 7 घंटे मोबाइल और इंटरनेट पर बिताते हैं। ऐसे में अगर घर का वातावरण भी अस्थिर हो, तो पढ़ाई में ध्यान लगना और मुश्किल हो जाता है। पहले के समय को याद करें—जब घर में किसी एक का एग्जाम होता था, तो मानो पूरे परिवार का एग्जाम चल रहा हो। टीवी बंद, संगीत बंद, यहां तक कि ऊंची आवाज में बात भी नहीं होती थी।
आज समय बदल गया है, लेकिन सीख वही है—पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल बनाना ही मां सरस्वती का सच्चा आशीर्वाद है।
बच्चों की एकाग्रता बढ़ाने के प्रभावी उपाय
1. तय और संतुलित दिनचर्याअनुशासन बच्चों के फोकस की नींव है। जब उन्हें पता होता है कि किस समय क्या करना है, तो दिमाग उसी हिसाब से खुद को तैयार कर लेता है। सोने-जागने, पढ़ने और खेलने का एक निश्चित समय तय करें। 8–10 घंटे की पूरी नींद जरूरी है, क्योंकि थकान सबसे बड़ा डिस्ट्रैक्शन होती है।
2. डिस्ट्रैक्शन से दूरीएकाग्रता के लिए शांत वातावरण बेहद जरूरी है। पढ़ाई के दौरान टीवी, तेज आवाज या अनावश्यक शोर न हो। मोबाइल फोन और टैबलेट को स्टडी टाइम में दूर रखें। स्टडी टेबल साफ-सुथरी और व्यवस्थित होगी, तो दिमाग भी ज्यादा फोकस करेगा।
3. माइंड गेम्स से बढ़ाएं फोकसखेल के जरिए एकाग्रता बढ़ाना सबसे आसान और मजेदार तरीका है। पहेलियां, सुडोकू, शतरंज, ‘स्पॉट द डिफरेंस’ और मेमोरी कार्ड गेम्स बच्चों की ध्यान क्षमता और याददाश्त दोनों को मजबूत करते हैं।
4. बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांटेंबड़ा चैप्टर या लंबा प्रोजेक्ट बच्चों को घबरा सकता है। काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दें, ताकि लक्ष्य आसान लगे। हर छोटा टास्क पूरा होने पर तारीफ या शाबाशी दें—यह मोटिवेशन को कई गुना बढ़ा देता है।
याद रखिए, बच्चों की एकाग्रता सिर्फ उनकी जिम्मेदारी नहीं है। सही माहौल, सही आदतें और थोड़ा सा धैर्य—यही वह मंत्र है, जो पढ़ाई में फोकस और सफलता दोनों दिला सकता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी सुझाव को अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।