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आइये जानते है NRC की लिस्ट से बाहर हुए 19 लाख लोगों का अब क्या होगा?

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Sat, 31 Aug 2019 12:18:51

आइये जानते है NRC की लिस्ट से बाहर हुए 19 लाख लोगों का अब क्या होगा?

असम में राष्ट्रीय नागिरक रजिस्टर (NRC) की आखिरी सूची आज यानि शनिवार को जारी कर दी गई है। इस लिस्ट में 3 करोड़ 11 लाख 21 हजार लोगों को जगह मिली और 19,06,657 लोग इससे बाहर हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के कहने पर असम में NRC की लिस्ट को अपडेट किया जा रहा है। इस लिस्ट में ऐसे लोगों को शामिल नहीं किया जाएगा जो 25 मार्च 1971 के बाद भारत आए हो। राज्य के एनआरसी अध्यक्ष प्रतीक हजेला के मुताबिक़ जिन लोगों का नाम लिस्ट में शामिल नहीं है वो ज़रूरी काग़जात जमा कर पाने में असफल रहे। केंद्र सरकार और असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने असम के लोगों को भरोसा दिलाया है कि लिस्ट में नाम न होने पर किसी भी व्यक्ति को हिरासत में नहीं लिया जाएगा और उसे अपनी नागरिकता साबित करने का हरसंभव मौका दिया जाएगा।

ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी का नाम इस लिस्ट में नहीं आता है तो फिर उसका क्या होगा या कह सकते है कि अब उनके पास कौनसे विकल्प बाकि है?

- केंद्र सरकार ने कहा है कि NRC की लिस्ट में जिसका नाम नहीं होगा उसे तुरंत विदेशी घोषित नहीं किया जाएगा। बल्कि उसे कानूनी लड़ाई लड़ने का समय दिया जाएगा। वे फॉरनर्स ट्रिब्यूनल में 120 दिन में अपील कर सकते हैं। असम सरकार राज्य के 400 विदेशी न्यायाधिकरणों की स्थापना करेगी, ताकि उन लोगों के मामलों से निपटा जा सके, जिन्हें अंतिम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से बाहर रखा गया है।

- गृह मंत्रालय ने कहा है कि मामले के निपटारे के लिए 1000 ट्रायब्यूनल अलग-अलग फेज में खोले जाएंगे। 100 ट्रायब्यूनल पहले से ही काम कर रहे हैं, जबकि सितंबर के पहले हफ्ते में 200 और ट्रायब्यूनल की शुरुआत की जाएगी।

- फॉरनर्स ट्रिब्यूनल अर्ध न्यायिक कोर्ट होते हैं, जो एनआरसी सूची से निकाले गए लोगों की अपील सुनते हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह राजनीति) कुमार संजय कृष्णा ने कहा 'ये ट्रिब्यूनल याचिका दायर करने और सुनवाई को बिना किसी रुकावट के सुनिश्चित करने के लिए सुविधाजनक स्थानों पर बनाए जाएंगे।'

- संजय कृष्णा ने कहा NRC की लिस्ट में जिनका नाम नहीं होगा, उन्हें तुरंत गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। जब तक फॉरनर्स ट्रिब्यूनल अपना फैसला नहीं सुना देते। ये लोग पहले फॉरनर्स ट्रिब्यूनल (एफटी) जा सकते हैं और अगर एफटी के आदेश से भी संतुष्ट नहीं होते तो वे हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं।

जाने एनआरसी लिस्ट है क्या?

आसान भाषा में हम एनआरसी को असम में रह रहे भारतीय नागरिकों की एक लिस्ट के तौर पर समझ सकते हैं। ये प्रक्रिया दरअसल राज्य में अवैध तरीक़े से घुस आए तथाकथित बंगलादेशियों के ख़िलाफ़ असम में हुए छह साल लंबे जनांदोलन का नतीजा है। इस जन आंदोलन के बाद असम समझौते पर दस्तख़त हुए थे और साल 1986 में सिटिज़नशिप ऐक्ट में संशोधन कर उसमें असम के लिए विशेष प्रावधान बनया गया।

असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिजेंस (एनआरसी) को सबसे पहले 1951 में बनाया गया था ताकि ये तय किया जा सके कि कौन इस राज्य में पैदा हुआ है और भारतीय है और कौन पड़ोसी मुस्लिम बहुल बांग्लादेश से आया हुआ हो सकता है।

इस रजिस्टर को पहली बार अपडेट किया जा रहा है। इसमें उन लोगों को भारतीय नागरिक के तौर पर स्वीकार किया जाना है जो ये साबित कर पाएं कि वे 24 मार्च 1971 से पहले से राज्य में रह रहे हैं। ये वो तारीख है जिस दिन बांग्लादेश ने पाकिस्तान से अलग होकर अपनी आज़ादी की घोषणा की थी। भारत सरकार का कहना है कि राज्य में ग़ैर क़ानूनी रूप से रह रहे लोगों को चिह्नित करने के लिए ये रजिस्टर ज़रूरी है। 30 जुलाई 2018 में सरकार ने एक फ़ाइनल ड्राफ़्ट प्रकाशित किया था जिसमें तकरीबन 41 लाख लोगों का नाम नहीं थे, जो असम में रह रहे हैं। इसमें बंगाली लोग हैं, जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों शामिल हैं। फिर इसी साल की 26 जून को प्रकाशित हुई एक नई अतिरिक्त लिस्ट में तक़रीबन एक लाख नए नामों को सूची से बाहर किया गया। इसके बाद सरकार ने लोगों को एक मौका और दिया। इसके लिए उन्हें अपनी 'लेगेसी' और 'लिंकेज' को साबित करने वाले काग़ज़ एनआरसी के दफ्तर में जमा करने थे।

इन काग़ज़ों में 1951 की एनआरसी में आया उनका नाम, 1971 तक की वोटिंग लिस्ट में आए नाम, ज़मीन के काग़ज़, स्कूल और यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के सबूत, जन्म प्रमाण पत्र और माता-पिता के वोटर कार्ड, राशन कार्ड, एलआईसी पॉलिसी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, रेफ़्यूजी रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट जैसी चीज़ें शामिल हैं।

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