
नरेन्द्र मोदी 30 मई को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे और इस समारोह में शामिल होने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को आमंत्रित किया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान के अनुसार, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 30 मई को शाम 7 बजे राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री एवं मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। विदेश मंत्रालय की तरफ से नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने मेहमानों की पुष्टि कर दी है। भारत में जिन नेताओं को पीएम का धुर विरोधी माना जाता है, उन्होंने भी समारोह में आने के लिए हामी भर दी है। इन नेताओं में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) मुख्य हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) इस समारोह में शामिल नहीं होंगी। पहले उन्होंने कहा था कि वे इस औपचारिक समारोह में हिस्सा लेंगी। ममता ने बुधवार को कहा कि वे शपथ ग्रहण में जाने का मन बना चुकी थीं, लेकिन पिछले कुछ घंटों के दौरान सामने आई मीडिया रिपोर्ट्स को देखने के बाद उन्होंने मन बदल लिया। ममता ने कहा कि रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि बंगाल में हिंसा के दौरान 54 लोगों की जान गई। भाजपा का यह दावा पूरी तरह से गलत है। ममता ने कहा- मोदीजी मैं माफी चाहती हूं, मैं समारोह में नहीं आ सकती।
ममता ने एक पत्र के जरिए शपथ ग्रहण में शामिल न होने की जानकारी दी। उन्होंने लिखा- नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी बधाई। मेरी योजना थी कि आपका न्योता स्वीकार करूं और शपथ ग्रहण समारोह में आऊं। शपथ ग्रहण लोकतंत्र को मनाने का गरिमामय मौका होता है। यह ऐसा मौका नहीं होता है, जिसकी गरिमा को कोई दल अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करके कम कर दे। मुझे माफ करें।
हिंसा में मारे गए कार्यकर्ताओं के परिवार शपथग्रहण में होंगे शामिल
नरेंद्र मोदी गुरुवार को एक भव्य समारोह में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में होने वाले इस समारोह में करीब 7000 मेहमान शिरकत कर सकते हैं। इन मेहमानों की लिस्ट में उन बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिजनों का भी नाम है जिन्होंने चुनावी हिंसा में अपनी जान गंवा दी। 30 मई यानी गुरुवार को होने जा रहे शपथ-ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए करीब 50 बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिजनों को न्यौता मिला है। इनके ट्रेन से गुरुवार को दिल्ली पहुंचने की संभावना है। इसे लेकर जहां कार्यकर्ताओं में खुशी है, वहीं इसे 2021 में पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश देने के तौर पर भी देखा जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, पिछले 6 वर्षों में पंचायत चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक करीब 50 बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई। पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में भी चुनावी हिंसा के दौरान एक बीजेपी कार्यकर्ता मनु हंसदा की हत्या कर दी गई थी, जिनके बेटे अब पीएम मोदी के शपथ-ग्रहण समारोह में शिरकत करने जा रहे हैं। उन्होंने अपने पिता की हत्या का आरोप राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के 'गुंडों' पर लगाया। उन्होंने कहा, 'मेरे पिता की हत्या तृणमूल के गुंडों ने कर दी। हम खुश हैं कि हम दिल्ली जा रहे हैं। हमारे इलाके में अब शांति है।'














