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  • मसूद के खिलाफ 2009 में यूपीए के वक्त अकेला था भारत लेकिन अब 21 देश भारत के साथ - सुषमा

मसूद के खिलाफ 2009 में यूपीए के वक्त अकेला था भारत लेकिन अब 21 देश भारत के साथ - सुषमा

By: Pinki Fri, 15 Mar 2019 5:05 PM

मसूद के खिलाफ 2009 में यूपीए के वक्त अकेला था भारत लेकिन अब 21 देश भारत के साथ - सुषमा

जैश सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर चौथी बार चीन ने अडंगा लगा दिया है। वीटो का इस्तेमाल करते हुए चीन ने पाकिस्तान के लाडले मसूद को बचा लिया। इसके साथ ही ये प्रस्ताव रद्द हो गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चीन के रवैये से निराशा हुई। वहीं कांग्रेस ने इसे मोदी सरकार की कूटनीतिक विफलता करार दिया है। कांग्रेस द्वारा इस बयान के बाद सुषमा स्वराज ने कहा कि यूपीए के वक्त मसूद पर प्रस्ताव पेश करने वाला भारत अकेला देश था। 2019 में इस प्रस्ताव को ब्रिटेन, फ्रांस और अमेरिका ने पेश किया। इन्हें मिलाकर 21 देशों ने इसे समर्थन दिया। वही चीन द्वारा मसूद को बचाने के बाद अब फ्रांस ने इस आतंकवादी संगठन पर खुद से ऐक्शन लेने का फैसला कर लिया है। फ्रांस ने अब जैश सरगना मसूद की संपत्ति को जब्त करने का फैसला किया है। जैश के खिलाफ फ्रांस की अबतक की यह सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। मसूद अजहर पाकिस्तान में है और 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए फिदायीन हमले का दोषी है। चीन ने बुधवार रात प्रस्ताव में तकनीकी खामी बताकर इसे रोका। उसने कहा था कि वह बिना सबूतों के कार्रवाई के खिलाफ है। जबकि 10 से अधिक देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था। मसूद के मामले में चीन के विरोध पर भारत के बाद अमेरिकी ने भी निराशा जताई। अमेरिकी सांसद इलियट एंजेल ने कहा कि चीन और पाकिस्तान को अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्व पूरे करने का पर्याप्त मौका मिला है।

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चीन के प्रयासों से कामयाबी नहीं मिल रही: अमेरिका

अमेरिका की ओर से यूएनएससी में कड़ा बयान दिया गया कि अगर चीन लगातार इस तरह की अड़चन बनता रहा, तो जिम्मेदार देशों को कोई और कदम उठाना पड़ेगा। सख्त भाषा का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका ने कहा कि अगर इसी तरह चीन मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित होने से बचाता रहा तो सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों को सख्त रुख अपनाना पड़ेगा। लेकिन हालात यहां तक नहीं आने चाहिए।

अमेरिका की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान चीन की मदद से कई बार जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित होने से बचाता रहा है। ये चौथी बार है जब चीन ने इस तरह से मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित होने से बचाया है।

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फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन ने तीसरी बार दिया भारत का साथ

2009 : भारत ने मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए पहली बार यूएन में प्रस्ताव दिया था।

2016 : भारत ने एक बार फिर अमेरिका, यूके और फ्रांस (पी-3) के साथ मिलकर अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया। प्रस्ताव में कहा गया कि जनवरी 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हमले का मास्टरमाइंड अजहर ही था।

2017 : पी-3 राष्ट्रों ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में मसूद को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के लिए प्रस्ताव दिया।

भारत में कई हमलों का जिम्मेदार है मसूद

मसूद अजहर भारत में कई बार आतंकी हमलों को साजिश रचने के साथ उन्हें अंजाम दे चुका है। वह 2001 में संसद पर हुए हमले का भी दोषी है। इस दौरान नौ सुरक्षाकर्मियों की जान गई थी। इसके अलावा जनवरी 2016 में जैश के आतंकियों ने पंजाब के पठानकोट एयरबेस और इसी साल सितंबर में उरी में सेना के हेडक्वार्टर पर हमला किया था।

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चीन और पाकिस्तान 'ऑल वेदर फ्रेंड्स'

माना जा रहा है कि चीन और पाकिस्तान 'ऑल वेदर फ्रेंड्स' की तरह हैं और चीन भारत को एक प्रतियोगी और यहां तक ​​कि एक बड़े खतरे के रूप में भी देखता है। चीन का अजहर का समर्थन करना भारत को तकलीफ पहुंचाने और पाकिस्तान को खुश करने का एक तरीका है। इसके अलावा चीन और पाकिस्तान कई समझौतों के साझीदार भी हैं। चीन ने पाकिस्तान के साथ हाल में ही $51 बिलियन वन रोड वन बेल्ट (OROB) योजना सहित अन्य विकास परियोजनाओं में निवेश किया है। 1950 में चीन ने तिब्बत पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 1959 में तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को भारत ने शरण दी। चीन इस बात से भी खफा है, चीन का मानना है कि दलाई लामा चीन के लिए वही है जो भारत के लिए हाफिज सईद है।

कौन है आतंक का आका मसूद अजहर?

गौरतलब है कि भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद का ध्यान इस ओर आकर्षित कर रहा है कि जैश पर संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंध लगाया है, लेकिन उससे संस्थापक को बैन नहीं किया जा रहा। अजहर पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के बहावलपुर में कौसर कालोनी में रहता है। जनवरी 2016 में पंजाब के पठानकोट में भारतीय वायु सेना के बेस पर जैश के हमले के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से अजहर पर प्रतिबंध लगाने को लेकर अपनी कोशिशें तेज कर दी थीं। इसमें भारत को अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस का भी समर्थन मिला था, लेकिन चीन ने इसका विरोध किया था।

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