
उपभाेक्ता विवाद प्रतिताेष आयाेग ने आईसीआईसीआई बैंक द्वारा ग्राहक की कैश डिपोजिट की एक एंट्री हटाने के मामले में बैंक को 10 हजार का जुर्माना लगाया है। अब बैंक को जमा कराई राशि के 45 हजार और जुर्माने के 10 हजार सहित 55 हजार ग्राहक को दो माह में देने होंगे।
आयाेग के अपनी टिप्पणी में कहा- बैंक में जिस तरह से ऑनलाइन छलकपट हो रहे हैं, ऐसे में विश्वसनीयता संदेह के घेरे में आने की प्रबल संभावना बन रही है। पुराेहिताें की मादड़ी निवासी मांगीलाल कुम्हार ने बैंक की मादड़ी इंडस्ट्रियल एरिया शाखा के खिलाफ परिवाद दर्ज कराया था। मांगीलाल ने 10 जनवरी 2013 को दो बार में 45-45 हजार खाते में जमा करवाए। जिसकी एंट्री पासबुक में करवाई। इसी बीच चेक बुक और पासबुक गुम हाेने पर बैंक से नई जारी करवाई। लेकिन डायरी में 45 हजार की एक एंट्री में गायब मिली।
बैंक ने आयाेग में जवाब दिया कि परिवादी ने 45 हजार ही जमा करवाए। प्रिंटिंग के दौरान तकनीकी खामी सेे दो बार एंट्री हो गई। आयोग ने कहा कि परिवादी ने दो बार राशि जमा नहीं करवाई गई तो उसी दिन पासबुक में दो एंट्री कैसे हुई। यह मानवीय या तकनीकी त्रुटि थी तो पुरानी पासबुक में 30 दिसंबर 2013 तक बैलेंस कैसे बताया। आयोग अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र पगारीया, सदस्य अंजना जोशी और डाॅ. भारत भूषण झा ने बैंक को एक माह में परिवादी के खाते में 45 हजार रुपए जमा करने, मानसिक कष्ट के 5 हजार, समय और धन के अपव्यय के मद में 2 हजार, परिवाद व्यय के 3 हजार रुपए दो माह के अन्दर देने के आदेश दिए हैं।














