न्यूज़
CJP Yogi Adityanath Jyotish Narendra Modi Rahul Gandhi

जाने क्या है 1985 का असम समझौता और नागरिकता संशोधन बिल को लेकर क्यों हो रहा है प्रदर्शन?

नागरिकता संशोधन बिल को लेकर असम में हिंसक प्रदर्शन जारी है। पूर्वोत्तर के नागरिक इस बिल का पुरजोर विरोध कर रहे हैं और इसे उनकी स्थानीय अस्मिता पर हमला मान रहे हैं।

Posts by : Priyanka Maheshwari | Updated on: Thu, 12 Dec 2019 1:00:36

जाने क्या है 1985 का असम समझौता और  नागरिकता संशोधन बिल को लेकर क्यों हो रहा है प्रदर्शन?

नागरिकता संशोधन बिल को लेकर असम में हिंसक प्रदर्शन जारी है। पूर्वोत्तर के नागरिक इस बिल का पुरजोर विरोध कर रहे हैं और इसे उनकी स्थानीय अस्मिता पर हमला मान रहे हैं। यही कारण है कि सड़कों पर प्रदर्शन हो रहा है। असम के छाबुआ, पानितोला रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों ने हंगामा किया है और आग लगा दी। इसके अलावा दिब्रूगढ़, तिनसुकिया के रेलवे स्टेशन को अलर्ट पर रखा गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया- मैं असम के अपने भाइयों और बहनों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि बिल के पारित होने के बाद उन्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। मैं उन्हें कहना चाहता हूं कि कोई भी आपके अधिकारों, विशिष्ट पहचान और संस्कृति को नहीं छीन सकता। यह हमेशा फलता-फूलता और विकसित होती रहेगी। केंद्र सरकार संवैधानिक सुरक्षा, भाषा, संस्कृति और असम की क्षेत्रीय संस्कृति को लेकर प्रतिबद्ध है।

बता दे, नागरिकता (संशोधन) विधेयक (Citizen Amedment Bill) को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन के बीच सुप्रीम कोर्ट में पहली याचिका दायर की गई है। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के 4 सांसदों ने इस बिल के खिलाफ याचिका दाखिल की। याचिका में कहा गया है कि भारत का संविधान धर्म के आधार पर वर्गीकरण की इजाजत नहीं देता। ऐसे में नागरिकता संशोधन बिल असंवैधानिक है। ये बिल संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत ट्वीन टेस्ट पर खरा नहीं उतरता है। वही असम में प्रदर्शनकारियों ने दिसपुर में सचिवालय को घेर रखा है। इन प्रदर्शनों के चलते कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा है। यहां तक कि अब राज्य में सेना तैनात कर दी गई है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 साल 1985 में हुए असम समझौते का उल्लघंन है। इससे वहां के मूल निवासियों की भावनाओं और हितों को नुकसान पहुंचा है। आइए जानते हैं कि असम अकॉर्ड आखिर क्या है? यह नागरिकता संशोधन विधेयक कितना अलग है?

आखिर क्या है 1985 में हुआ असम समझौता?

1979 के लोकसभा उपचुनाव में मंगलदोई सीट पर वोटरों की संख्या में अत्यधिक इजाफा हुआ। जब पता किया गया तो जानकारी मिली कि वोटरों की संख्या में बढ़ोतरी बांग्लादेशी अवैध शरणार्थियों की वजह से हुई है। इसके बाद अवैध शरणार्थियों के खिलाफ असम के मूल निवासियों ने हिंसक धरना-प्रदर्शन शुरू किया। ये प्रदर्शन और विरोध तकरीबन 6 साल तक चला। इस दौरान 885 लोग मारे गए।

राजीव गांधी ने 1995 में असम समझौता किया

मामला तब शांत हुआ जब उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1995 में असम समझौता किया। समझौते में कहा गया था कि 25 मार्च 1971 के बाद असम में आए विदेशियों की पहचान कर उन्हें देश ने बाहर निकाला जाए। दूसरे राज्यों के लिए यह समय सीमा 1951 थी। जबकि, नागरिकता संशोधन बिल-2019 में नई समय सीमा 2014 तय की गई है। इसी बात पर प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नई समय सीमा से असम समझौते का उल्लघंन हो रहा है। असम समझौते में कहा गया था कि नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंश (NRC) को लागू किया जाएगा। ताकि विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें देश से बाहर निकाला जा सके। हालांकि, 35 सालों तक NRC पर कोई काम नहीं हुआ। जब 31 अगस्त 2019 को असम NRC पर काम शुरू हुआ तो उसकी सूची में से 19 लाख लोगों के नाम इससे बाहर हो गए। जो लोग बाहर हुए उसमें ज्यादातर हिंदू और मूल आदिवासी समुदाय के लोग थे। अब असम के प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नागरिकता बिल आने से NRC का प्रभाव खत्म हो जाएगा। इससे अवैध शरणार्थियों को नागरिकता मिल जाएगी।

cab,cab news,cab protest,cab protest in assam,cab bill news,cab today news,citizenship amendment bill,citizenship amendment bill 2019,citizenship amendment bill protest,news,news in hindi

असम की हिंसा के पीछे का कारण क्या है?

- प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नागरिकता बिल से असम समझौते के नियम-6 का भी उल्लघंन हो रहा है।

- इस नियम के तहत असम के मूल निवासियों की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं भाषाई पहचान और उनके धरोहरों के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए संवैधानिक, कार्यकारी और प्रशासनिक व्यवस्था की गई है।

- असम के मूल निवासियों को इस बात की आशंका है कि कानून बदलने से बांग्लादेश से आए हिंदुओं को नागरिकता मिल जाएगी।

- ये बांग्लादेशी हिंदू असम के मूल निवासियों के अधिकारों को चुनौती देंगे।

- असम के मूल निवासियों की संस्कृति, भाषा, परंपरा, रीति-रिवाजों पर असर पड़ेगा।

असम अब और शरणार्थियों का बोझ नहीं उठा सकता

नागरिकता संशोधन बिल-2019 के तहत नागरिकता के लिए भारत में निवास की समयसीमा 2014 तय है। वहीं, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि असम में 1951 से 1971 तक लाखों शरणार्थी आए। अब वह और शरणार्थियों का बोझ नहीं उठा सकता। केंद्र सरकार ने नए कानून से 1985 के असम समझौते का उल्लघंन होगा।

आपको बता दे, नागरिकता बिल के पास होने के बाद सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन असम में हो रहा है। गुवाहाटी में राज्य सरकार ने कर्फ्यू लगा दिया है, जो गुरुवार रात 7 बजे तक जारी रहेगा। असम में छात्र संगठनों की अगुवाई में चल रहे प्रदर्शन में काफी तोड़फोड़ की गई थी। असम में छात्र संगठन सड़कों पर उतर गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने एक रेलवे स्टेशन पर हमला किया है, जिसके बाद गुवाहाटी से गुजरने वाली सभी ट्रेनें कैंसिल कर दी गई हैं, वहीं कई फ्लाइट भी रद्द हो गई हैं।

राज्य
View More

Shorts see more

UPI PIN कैसे बदलें? जानें आसान तरीका और कब करना चाहिए PIN रीसेट

UPI PIN कैसे बदलें? जानें आसान तरीका और कब करना चाहिए PIN रीसेट

  • UPI से पैसे भेजना आसान है, इसलिए इसकी सुरक्षा के लिए PIN का ध्यान रखना जरूरी है।
  • समय-समय पर UPI PIN बदलने से ऑनलाइन फ्रॉड का खतरा कम होता है।
  • PIN भूलने पर डेबिट कार्ड और OTP से आसानी से रीसेट किया जा सकता है।
read more

ताजा खबरें
View More

नितिन गडकरी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर साधा निशाना, पीएम मोदी पर टिप्पणी को बताया अनुचित
नितिन गडकरी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर साधा निशाना, पीएम मोदी पर टिप्पणी को बताया अनुचित
किरण रिजिजू ने राहुल गांधी को दीं 7 सलाह, बोले- कांग्रेस को ज्यादा सांसद जिताने हैं तो करें ये काम
किरण रिजिजू ने राहुल गांधी को दीं 7 सलाह, बोले- कांग्रेस को ज्यादा सांसद जिताने हैं तो करें ये काम
'अंग्रेज चले गए, औलादों को छोड़ गए', बिहार में सुधाकर सिंह का RSS और बीजेपी पर हमला
'अंग्रेज चले गए, औलादों को छोड़ गए', बिहार में सुधाकर सिंह का RSS और बीजेपी पर हमला
SIR पर बहस को तैयार सरकार! अमित शाह ने राहुल गांधी को संसद में चर्चा की दी चुनौती
SIR पर बहस को तैयार सरकार! अमित शाह ने राहुल गांधी को संसद में चर्चा की दी चुनौती
₹2 करोड़ का फ्लैट बेच FD में लगाए पैसे, अब हर महीने औसतन मिल रहा ₹1.08 लाख ब्याज, समझे पूरी गणित
₹2 करोड़ का फ्लैट बेच FD में लगाए पैसे, अब हर महीने औसतन मिल रहा ₹1.08 लाख ब्याज, समझे पूरी गणित
भारत में जन्मीं प्रमिला जयपाल का अमेरिका में जलवा, 88% वोटों के साथ छठी बार बनीं सांसद
भारत में जन्मीं प्रमिला जयपाल का अमेरिका में जलवा, 88% वोटों के साथ छठी बार बनीं सांसद
शाहनवाज हुसैन का राहुल गांधी पर हमला, बोले- देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं कांग्रेस नेता
शाहनवाज हुसैन का राहुल गांधी पर हमला, बोले- देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं कांग्रेस नेता
2027 में शनि बदलेंगे चाल, इन 5 राशियों की जिंदगी में आने वाला है बड़ा बदलाव!
2027 में शनि बदलेंगे चाल, इन 5 राशियों की जिंदगी में आने वाला है बड़ा बदलाव!
खाना खाने के बाद बिस्तर पर जाते ही होने लगती है पेट में जलन? इसके पीछे हो सकती हैं ये समस्याएं
खाना खाने के बाद बिस्तर पर जाते ही होने लगती है पेट में जलन? इसके पीछे हो सकती हैं ये समस्याएं
'रामायण' के सेट पर राहा संग दिखे रणबीर कपूर, आलिया भट्ट ने शेयर कीं अनदेखी BTS तस्वीरें
'रामायण' के सेट पर राहा संग दिखे रणबीर कपूर, आलिया भट्ट ने शेयर कीं अनदेखी BTS तस्वीरें
सालभर स्वाद का मजा देगा घर का बना आंवले का अचार, जानें सही रेसिपी
सालभर स्वाद का मजा देगा घर का बना आंवले का अचार, जानें सही रेसिपी
सफाई के बाद भी घर में दिखते हैं मकड़ी के जाले? इन आसान उपायों से मिलेगी राहत
सफाई के बाद भी घर में दिखते हैं मकड़ी के जाले? इन आसान उपायों से मिलेगी राहत
नहाने के बाद कुछ लोगों के शरीर से घंटों आती है अच्छी खुशबू, जानें उनकी बॉडी केयर का राज
नहाने के बाद कुछ लोगों के शरीर से घंटों आती है अच्छी खुशबू, जानें उनकी बॉडी केयर का राज
बिना चीनी के घर पर बनाएं मिष्टी दोई, स्वाद और क्रीमी टेक्सचर के लिए अपनाएं ये तरीका
बिना चीनी के घर पर बनाएं मिष्टी दोई, स्वाद और क्रीमी टेक्सचर के लिए अपनाएं ये तरीका