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  • रहस्यों से भरा हैं वृंदावन का निधिवन मंदिर, गोपियों संग रास रचाते है श्रीकृष्ण

रहस्यों से भरा हैं वृंदावन का निधिवन मंदिर, गोपियों संग रास रचाते है श्रीकृष्ण

By: Anuj Wed, 12 Feb 2020 12:24 PM

रहस्यों से भरा हैं वृंदावन का निधिवन मंदिर, गोपियों संग रास रचाते है श्रीकृष्ण

भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो अनोखे और बेहद चमत्कारिक हैं। ऐसा ही एक मंदिर वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण का है। यह मंदिर निधिवन में है। भगवान श्रीकृष्ण का यह मंदिर इतना चमत्कारिक है जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे। दरअसल यह अपने आप ही खुलता है और खुद ही बंद हो जाता है। मान्यता है कि यहां आज भी हर रात श्रीकृष्ण गोपियों के साथ रास रचाते हैं। यही कारण है कि हर शाम आरती के बाद निधिवन को बंद कर दिया जाता है, उसके बाद वहां कोई नहीं रहता। यहां तक कि दिनभर निधिवन में रहने वाले पशु-पक्षी भी शाम होते ही निधिवन को छोड़कर चले जाते हैं। मंदिर में शयन के लिए आते हैं भगवान श्री कृष्ण-यहां के पुजारियों का मानना है कि इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण रोजाना शयन के लिए आते हैं। मंदिर में भगवान के शयन के लिए हर दिन बिस्तर लगाया जाता है। बिस्तर में साफ सुथरे गद्दे और चादर बिछायी जाती है। जब यह मंदिर खुलता है तो बिस्तर में पड़ी सलबटें ये बताती हैं कि यहां कोई सोने के लिए आया था।

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जो भी देखता है रासलीला हो जाता है पागल

शाम होते ही सभी लोगों को यहां से बाहर निकाल कर निधिवन को बंद कर दिया जाता है, क्योंकि इस जगह को लेकर एक मान्यता प्रचलित है कि हर रात यहां भगवान श्रीकृष्ण आते हैं और गोपियों के साथ रास रचाते हैं। इतना ही नहीं जो भी मनुष्य रासलीला देखने की कोशिश करता है, वह या तो पागल हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है। यह बात जानते हुए भी कई लोगों ने निधिवन की झाडियों में छुपकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन करना चाहा, परिणाम के तौर पर या तो वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठे या उनकी मृत्यु ही हो गई।

माखन मिश्री लगाते हैं भोग

मंदिर की दूसरी चमत्कारिक घटना ये है कि इस मंदिर में प्रतिदिन माखन-मिश्री का प्रसाद बांटा जाता है, वहीं जो प्रसाद बच जाता है। उसे मंदिर में ही रख दिया जाता है। लेकिन बचा हुआ प्रसाद सुबह तक समाप्त हो जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण माखन मिश्री को चट कर जाते हैं।

संत हरिदास ने साक्षात किए थे राधा

कृष्ण के दर्शन-मान्यता अनुसार इस मंदिर को तानसेन के गुरु संत हरिदास ने अपने भजन से राधा−कृष्ण के युग्म रूप को साक्षात प्रकट किया था। यहां कृष्ण और राधा विहार करने आते थे। यहीं पर स्वामी जी की समाधि भी बनी है। इस मंदिर मे राधा-कृष्ण के सोने की व्यवस्था भी की गयी है।

तुलसी के दौ पौधे हैं राधा की गोपियां


मंदिर परिसर में तुलसी के दो खास पौधे हैं, कहते हैं रात के समय ये पौधे राधा की गोपियां बन जाती हैं और उनके साथ नृत्य करते हैं। इस तुलसी का पत्ता तोड़ने की खास मनाही है ।

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