बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) की फिल्म 'छपाक' (Chhapaak) इस शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। हालाकि फिल्म का पहला दिन कुछ खास नहीं रहा। फिल्म ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर मात्र 4.77 करोड़ से अपनी शुरुआत की थी। हालाकि, फिल्म के दूसरे दिन की कमाई में थोड़ा उछाल देखा गया और फिल्म ने शनिवार को 6.90 करोड़ का कारोबार कर लिया। इस मुताबिक फिल्म तीसरे दिन यानि रविवार को 7 से 7.50 करोड़ रुपये का कमाई कर ली है। इस हिसाब से दीपिका पादुकोण की फिल्म ने 19 करोड़ का कारोबार कर लिया है।
#Chhapaak witnesses an upward trend on Day 2, but the 2-day total is underwhelming... Decent at premium multiplexes, but unable to connect *and* collect beyond metros... Needs to cover lost ground on Day 3... Fri 4.77 cr, Sat 6.90 cr. Total: ₹ 11.67 cr. #India
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बता दे, दीपिका पादुकोण की फिल्म 'छपाक' के साथ-साथ अजय देवगन (Ajay Devgn) की फिल्म 'तानाजी: द अनसंग वॉरियर' ने बॉक्स ऑफिस पर दस्तक दी थी। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाकेदार शुरुआत की है। फिल्म ने पहले दिन 14.50 करोड़ की कमाई कर ली थी। वही फिल्म ने दूसरे दिन यानि शनिवार को 20.57 करोड़ का कारोबार किया था। 'तानाजी: द अनसंग वॉरियर' का 50 पर्सेंट से ज्यादा बिजनस मुंबई/ महाराष्ट्र के सर्किल में हुआ है। क्षेत्रीय टच होने के कारण बाकी हिस्सों में इसका बिजनस थोड़ा ठंडा रहा है।
#Tanhaji roars on Day 2... Metros *and* mass belt, multiplexes *and* single screens, #Tanhaji is simply remarkable... #Maharashtra is record-smashing... Other circuits - decen
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आपको बता दे, लगभग 35 करोड़ के बजट में तैयार हुई दीपिका पादुकोण की फिल्म 'छपाक' (Chhapaak) की कहानी मालती यानी दीपिका पादुकोण की है। जो एसिड अटैक सरवाइवर है और इस घटना के बावजूद अपनी जिंदगी की जंग को पूरी ताकत और हिम्मत के साथ लड़ रही है। दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) ने बहुत ही मजबूती के साथ मालती के कैरेक्टर को परदे पर जिया है, और मालती की जिंदगी की हर बारीकी को पकड़ने की कोशिश की है। फिर वह चाहे मालती का दर्द हो, खुशी हो या कोर्ट कचहरी या जिंदगी की जंग हो, हर मोर्चे पर दीपिका पादुकोण ने दिल जीता है। मालती की इस जंग में उसके साथी हैं अमोल (विक्रांत मैसे) और उनकी वकील (मधुरजीत सर्गी)। इस तरह फिल्म की कहानी कहीं भी अत्यधिक नाटकीय नहीं होती और मालती के संघर्ष और इच्छाशक्ति की ओर इशारा करती है। इस तरह मेघना गुलजार ने पूरी कहानी को कहीं भी उपदेशात्मक नहीं होने दिया है। यही बात 'छपाक' की खासियत भी बनकर उभरती है।














