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अमेरिका, कनाडा और यूरोप में भारतीय गैंग नेटवर्क पर सबसे बड़ी कार्रवाई, 24 आरोपी गिरफ्तार; 10 की तलाश जारी

अमेरिका, कनाडा और यूरोप में भारतीय गैंग नेटवर्क पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई में 24 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। जानें लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़, ऑपरेशन हार्ड बॉल, ड्रग्स तस्करी, हथियार बरामदगी और अमेरिकी चार्जशीट से जुड़े सभी बड़े खुलासे।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Wed, 08 Jul 2026 8:57:39

अमेरिका, कनाडा और यूरोप में भारतीय गैंग नेटवर्क पर सबसे बड़ी कार्रवाई, 24 आरोपी गिरफ्तार; 10 की तलाश जारी

भारतीय मूल के अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध सिंडिकेट के खिलाफ अमेरिका ने अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त अभियान चलाया है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) की अगुवाई में अमेरिका, कनाडा और यूरोप की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मिलकर 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' (Operation Hard Ball) को अंजाम दिया, जिसके तहत 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस व्यापक कार्रवाई के दौरान कुल 37 लोगों के खिलाफ अमेरिका की संघीय अदालत में तीन अलग-अलग आरोपपत्र दाखिल किए गए हैं। इन आरोपपत्रों में भारत की जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, उसके करीबी सहयोगी गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा, जग्गू भगवानपुरिया समेत कई अन्य आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं।

जांच एजेंसियों के मुताबिक यह आपराधिक नेटवर्क केवल भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक फैला हुआ था। अधिकारियों का दावा है कि यह गिरोह सुपारी लेकर हत्या, रंगदारी वसूली, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियारों की सप्लाई, अपहरण, मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे कई गंभीर अपराधों में सक्रिय था। इसी वजह से विभिन्न देशों की एजेंसियों ने मिलकर इस नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए संयुक्त अभियान चलाया।

24 आरोपी दबोचे गए, 10 अभी भी कानून की पकड़ से बाहर

ऑपरेशन के दौरान अमेरिका में कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 11 आरोपी कैलिफोर्निया से, एक इंडियाना और एक जॉर्जिया से पकड़ा गया। इसके अलावा कनाडा में तीन और स्पेन में एक आरोपी को हिरासत में लिया गया।

जांच एजेंसियों ने बताया कि सात अन्य आरोपी पहले से ही अलग-अलग मामलों में जेल में बंद हैं। हालांकि, अब भी 10 आरोपी फरार हैं। इनमें सात अमेरिका में, दो भारत में और एक यूरोप में छिपा होने की आशंका जताई गई है। इनकी गिरफ्तारी के लिए विभिन्न देशों की एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं।

कार्रवाई के दौरान भारी मात्रा में ड्रग्स और हथियार जब्त

संयुक्त अभियान के दौरान अधिकारियों ने करीब 1,000 किलोग्राम कोकीन, एक किलोग्राम हेरोइन, 40 हजार अमेरिकी डॉलर नकद और 12 हथियार बरामद किए। इसके अलावा कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो क्षेत्र में 23 और लॉस एंजिलिस क्षेत्र में 11 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन तलाशी अभियानों से गिरोह की गतिविधियों से जुड़े कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी उनके हाथ लगे हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

लॉरेंस बिश्नोई पर लगाए गए गंभीर आरोप

अमेरिकी आरोपपत्र के अनुसार 33 वर्षीय लॉरेंस बिश्नोई कई वर्षों से भारत की जेल में बंद है, लेकिन इसके बावजूद वह कथित तौर पर जेल के भीतर से ही अपने पूरे आपराधिक नेटवर्क का संचालन कर रहा था। जांच एजेंसियों का दावा है कि तस्करी के जरिए जेल के अंदर पहुंचाए गए मोबाइल फोन और इंटरनेट कॉलिंग (VOIP) तकनीक के माध्यम से वह अपने सहयोगियों को निर्देश देता था और विभिन्न देशों में गतिविधियों का संचालन करता था।

आरोपपत्र में कहा गया है कि बिश्नोई हत्या, राजनीतिक हत्याओं की साजिश, रंगदारी, अपहरण, ड्रग्स तस्करी, मानव तस्करी और फायरिंग जैसी आपराधिक घटनाओं की योजना बनाने और उन्हें अंजाम दिलाने में कथित रूप से शामिल रहा। अमेरिकी एजेंसियों का आरोप है कि उसके निर्देश पर विभिन्न देशों में गैंग के सदस्य सक्रिय रहते थे।

सोशल मीडिया के जरिए तैयार की कथित राष्ट्रवादी छवि

अमेरिकी जांच एजेंसियों का यह भी दावा है कि लॉरेंस बिश्नोई ने सोशल मीडिया पोस्ट और इंटरव्यू के माध्यम से खुद को राष्ट्रवादी, धार्मिक और समाजसेवा से जुड़ी छवि वाले व्यक्ति के रूप में पेश करने की कोशिश की। अधिकारियों के मुताबिक इसी छवि का इस्तेमाल कर वह भारत के अलावा अमेरिका और अन्य देशों में रहने वाले युवाओं को अपने नेटवर्क से जोड़ने का प्रयास करता था। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल गैंग के विस्तार और भर्ती के लिए किस स्तर तक किया गया।

गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा को बताया अहम ऑपरेशनल कमांडर

चार्जशीट में गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा की भूमिका को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार गोल्डी बराड़ उत्तर अमेरिका में जबकि रोहित गोदारा यूरोप में बिश्नोई गैंग की गतिविधियों का संचालन करता था। दोनों को लॉरेंस बिश्नोई का सबसे भरोसेमंद सहयोगी बताते हुए आरोप लगाया गया है कि वे उसके निर्देशों को अलग-अलग देशों में लागू करवाने और गैंग की हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने में प्रमुख भूमिका निभाते थे।

हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड का भी आरोपपत्र में जिक्र


अमेरिकी आरोपपत्र में जून 2023 में कनाडा में हुई हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का भी उल्लेख किया गया है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि इस हत्याकांड का आदेश कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने दिया था। हालांकि, यह आरोप अमेरिकी जांच एजेंसियों की चार्जशीट का हिस्सा हैं और इनकी पुष्टि या अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

अभिनेता के घर पर फायरिंग का भी मामला चार्जशीट में शामिल

अमेरिकी आरोपपत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि नवंबर 2023 में कनाडा में रह रहे एक प्रमुख भारतीय अभिनेता और गायक के आवास पर हुई फायरिंग की जिम्मेदारी कथित तौर पर बिश्नोई गैंग ने ली थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, घटना के बाद सोशल मीडिया पर पंजाबी भाषा में एक धमकी भरा संदेश साझा किया गया, जिसमें लिखा गया था कि "तुम्हें कोई नहीं बचा सकता।" अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के संदेशों का उद्देश्य डर का माहौल बनाकर लोगों पर दबाव डालना था।

WhatsApp और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए मांगी जाती थी रंगदारी


जांच एजेंसियों का आरोप है कि गैंग कारोबारियों और प्रभावशाली लोगों को धमकाने के लिए WhatsApp सहित अन्य एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता था। आरोप है कि लॉस एंजिलिस और थाउज़ेंड ओक्स में रहने वाले कई लोगों से करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगी गई। एक मामले में करीब 50 लाख अमेरिकी डॉलर की फिरौती मांगने का भी आरोप लगाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, धमकी देने के लिए डिजिटल माध्यमों का सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल किया जाता था।

अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी से होता था करोड़ों का कारोबार

चार्जशीट के मुताबिक, गैंग की आय का सबसे बड़ा स्रोत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी थी। जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि नवंबर 2024 में अमेरिका से कनाडा भेजी जा रही 49 किलोग्राम कोकीन की खेप पकड़ी गई थी, जिसका संबंध इसी नेटवर्क से जोड़ा गया।

इसके अलावा आरोप है कि मार्च 2024 से जुलाई 2025 के बीच बिश्नोई गैंग ने प्रतिद्वंद्वी ड्रग तस्करों से लगभग 520 किलोग्राम कोकीन लूटने की घटनाओं को भी अंजाम दिया। जांचकर्ताओं का कहना है कि इस अवैध कारोबार से होने वाली कमाई का इस्तेमाल गैंग अपने नेटवर्क का विस्तार करने, नए सदस्यों की भर्ती और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को मजबूत करने में करता था।

जग्गू भगवानपुरिया नेटवर्क पर भी बड़ा शिकंजा

दूसरे आरोपपत्र में जग्गू भगवानपुरिया और उसके 16 सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है। अमेरिकी जांच एजेंसियों का दावा है कि इस गिरोह का नेटवर्क दुनिया के कई देशों में फैला हुआ है और इसके एक हजार से अधिक सदस्य एवं सहयोगी सक्रिय हैं। अकेले अमेरिका में ही इस गैंग के सौ से ज्यादा सदस्यों के सक्रिय होने का दावा किया गया है।

जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क पर हत्या, सुपारी किलिंग, अपहरण, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियारों की सप्लाई और रंगदारी वसूली जैसे कई गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं।

भारत में भ्रष्ट अधिकारियों की मदद लेने का आरोप

अमेरिकी चार्जशीट में यह भी आरोप लगाया गया है कि भगवानपुरिया गैंग ने भारत में कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों और सरकारी अधिकारियों की कथित मदद ली। जांच एजेंसियों का दावा है कि गिरोह अपने विरोधियों के खिलाफ झूठे आपराधिक मामले दर्ज करवाने की साजिश रचता था और बाद में उन्हीं मामलों में समझौते के नाम पर उगाही करता था।

एक आरोपी पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उसने अमेरिका में बैठकर भारत में एक परिवार के खिलाफ झूठे हत्या के मामले में कार्रवाई करवाने की कोशिश की। हालांकि इन सभी आरोपों की पुष्टि अदालत में सुनवाई के बाद ही होगी।

कनाडा-अमेरिका ड्रग्स कॉरिडोर का भी खुलासा

तीसरे आरोपपत्र में कनाडा के रविंदर सिंह ढांडा उर्फ रैंडी, रॉलेक्स और जॉन विक समेत 11 लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक यह नेटवर्क अमेरिका से कनाडा तक हर सप्ताह सैकड़ों किलोग्राम कोकीन और मेथामफेटामाइन की तस्करी करता था।

आरोप है कि ड्रग्स की खेप लंबी दूरी तय करने वाले ट्रकों और कई बार खेती-बाड़ी में इस्तेमाल होने वाले वाहनों में छिपाकर सीमा पार पहुंचाई जाती थी। चार्जशीट में जुलाई 2023 से नवंबर 2024 के बीच 430 किलोग्राम से अधिक कोकीन की तस्करी किए जाने का भी आरोप दर्ज किया गया है।

दोष सिद्ध होने पर हो सकती है उम्रकैद

अमेरिकी न्याय विभाग ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सभी संबंधित व्यक्तियों पर केवल आरोप लगाए गए हैं और अदालत में आरोप सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानून की नजर में निर्दोष माने जाएंगे। हालांकि, यदि अदालत में आरोप साबित हो जाते हैं तो कई आरोपियों को 10 वर्ष की अनिवार्य सजा से लेकर आजीवन कारावास तक का सामना करना पड़ सकता है।

कई देशों की एजेंसियों ने मिलकर चलाया अभियान


इस अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई में अमेरिका की Federal Bureau of Investigation (FBI), Royal Canadian Mounted Police (RCMP), लॉस एंजिलिस पुलिस, अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी, Drug Enforcement Administration (DEA), स्पेन की सुरक्षा एजेंसियों समेत कई देशों की जांच और कानून प्रवर्तन संस्थाओं ने संयुक्त रूप से भाग लिया।

अमेरिकी न्याय विभाग का कहना है कि यह अभियान केवल शुरुआती कदम है। अधिकारियों के मुताबिक, दुनिया के विभिन्न देशों में सक्रिय संगठित आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह के समन्वित और व्यापक अभियान जारी रखे जाएंगे।

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