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बंगाल में बदले राजनीतिक समीकरण, TMC छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए कई नेता

पश्चिम बंगाल में TMC को बड़ा झटका लगा है। कूचबिहार की मेखलीगंज नगरपालिका के अध्यक्ष समेत कई पार्षद कांग्रेस में शामिल हो गए हैं, जिससे नगर निकाय में सत्ता का समीकरण बदल गया है। जानें पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की अहम बातें।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 06 Jun 2026 8:14:17

बंगाल में बदले राजनीतिक समीकरण, TMC छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए कई नेता

पश्चिम बंगाल की राजनीति में लगातार बदलते समीकरणों के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा झटका लगा है। विधानसभा चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद पार्टी पहले ही संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है। इसी बीच शुक्रवार (5 जून) को उत्तर बंगाल से आई एक राजनीतिक खबर ने ममता बनर्जी की पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कूचबिहार जिले की मेखलीगंज नगरपालिका के अध्यक्ष सहित पांच पार्षदों ने TMC छोड़कर कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। इस घटनाक्रम के बाद नगर निकाय में सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल गया और कांग्रेस ने बहुमत हासिल कर लिया।

उत्तर बंगाल के इस इलाके में हुए दलबदल को राज्य की राजनीति में अहम माना जा रहा है। लंबे समय से TMC के नियंत्रण में रही मेखलीगंज नगरपालिका अब कांग्रेस के प्रभाव में आ गई है। नौ वार्डों वाली इस नगरपालिका में पहले आठ पार्षद TMC के थे, जबकि एक सीट भाजपा के पास थी। लेकिन अध्यक्ष प्रभात पाटनी समेत पांच पार्षदों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। अब कांग्रेस के पास बहुमत है और उसने नगरपालिका की सत्ता पर अपना दावा मजबूत कर लिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ एक नगरपालिका तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि यह TMC के भीतर चल रही असंतोष की लहर का संकेत भी माना जा रहा है। हाल के महीनों में पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के असंतोष की खबरें सामने आई हैं, जिससे संगठन के अंदरूनी हालात पर सवाल उठने लगे हैं।

कांग्रेस में शामिल होने के बाद क्या बोले प्रभात पाटनी?

मेखलीगंज नगरपालिका के अध्यक्ष प्रभात पाटनी ने कांग्रेस में शामिल होने के बाद कहा कि आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने कोलकाता स्थित कांग्रेस कार्यालय में औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है। पाटनी के अनुसार, मेखलीगंज लौटने के बाद दो अन्य पार्षद भी कांग्रेस में शामिल होने की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

हालांकि, नगरपालिका के एक पार्षद ने संकेत दिया है कि वह फिलहाल TMC में बने रहेंगे। इसके बावजूद कांग्रेस का दावा है कि उसके पक्ष में समर्थन लगातार बढ़ रहा है और निकट भविष्य में और भी नेता पार्टी से जुड़ सकते हैं।

TMC छोड़ने की वजह भी बताई

प्रभात पाटनी ने TMC छोड़ने के पीछे पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों और गुटबाजी को प्रमुख कारण बताया। उनका कहना है कि संगठन के अंदर लगातार बढ़ रहे आंतरिक विवादों की वजह से जनहित के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में TMC के भीतर रहकर लोगों के लिए प्रभावी तरीके से काम करना बेहद कठिन हो गया है।

पाटनी ने कहा, "पार्टी का अधिकांश समय और ऊर्जा अंदरूनी संघर्षों में खर्च हो रही है। ऐसे माहौल में जनता की समस्याओं पर ध्यान देना मुश्किल हो गया है। मैंने क्षेत्र के विकास, स्थानीय जरूरतों और आम लोगों के हितों को प्राथमिकता देते हुए कांग्रेस में शामिल होने का फैसला लिया है।"

भाजपा के खिलाफ कांग्रेस को बताया विकल्प

कांग्रेस में शामिल होने के बाद पाटनी ने भाजपा पर भी हमला बोला और कहा कि देश में विपक्ष की भूमिका को मजबूत करने की जरूरत है। उनका मानना है कि भाजपा के खिलाफ प्रभावी राजनीतिक लड़ाई कांग्रेस के नेतृत्व में ही लड़ी जा सकती है।

उन्होंने कहा, "भाजपा ने सत्ता में आने से पहले लोगों को डरमुक्त वातावरण और बेहतर अवसर देने का वादा किया था, लेकिन आज आम नागरिक कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस को मजबूत करना जरूरी है ताकि जनता की आवाज को प्रभावी मंच मिल सके।"

पाटनी ने यह भी आरोप लगाया कि छोटे कारोबारियों और रेहड़ी-पटरी लगाकर जीवनयापन करने वाले लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे व्यवसाय करने वाले लोगों को हटाने जैसी कार्रवाइयों से हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो रही है। उनके मुताबिक, आने वाले समय में कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर आंदोलन और जनसंपर्क अभियान चलाएगी।

जिला नेतृत्व पर भी उठाए सवाल

TMC नेतृत्व से संपर्क न करने के सवाल पर प्रभात पाटनी ने कहा कि उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत की कोशिश नहीं की क्योंकि जिला स्तर का नेतृत्व पहले से ही कई राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियों में उलझा हुआ था। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति नहीं थी कि गंभीर मुद्दों पर कोई सार्थक चर्चा हो पाती।

मेखलीगंज नगरपालिका में हुए इस बदलाव ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। एक ओर कांग्रेस इसे अपने संगठनात्मक विस्तार और वापसी के संकेत के रूप में देख रही है, वहीं दूसरी ओर TMC के लिए यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी को अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

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