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नेपाल बॉर्डर से दबोचे गए TMC नेता जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई; विदेश भागने की तैयारी पर फिरा पानी

नेपाल बॉर्डर के पास TMC नेता जहांगीर खान की STF द्वारा गिरफ्तारी से पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई है। चुनावी नतीजों के बाद फरार चल रहे जहांगीर खान पर मतदाता सूची अनियमितताओं, धमकी और EVM विवाद जैसे गंभीर आरोप थे। विदेश भागने की कोशिश नाकाम होने के बाद उनकी गिरफ्तारी ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Mon, 08 Jun 2026 12:09:08

नेपाल बॉर्डर से दबोचे गए TMC नेता जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई; विदेश भागने की तैयारी पर फिरा पानी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में चर्चित नाम बन चुके तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता जहांगीर खान आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गए हैं। लंबे समय से फरार चल रहे जहांगीर खान को राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार उन्हें सोमवार सुबह एक विशेष अभियान के दौरान हिरासत में लिया गया। चुनावी नतीजों के बाद से ही वह लगातार जांच एजेंसियों की नजर में थे और उनकी तलाश तेज़ी से की जा रही थी।

कई मामलों में घिरे थे जहांगीर खान


जहांगीर खान का नाम चुनावी प्रक्रिया के दौरान सामने आए कई विवादों में जुड़ चुका था। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के समय से ही उन पर मतदाता सूची से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि उन्होंने बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को प्रभावित करने की कोशिश की और मृत व्यक्तियों के नाम भी मतदाता सूची में शामिल करवाने में भूमिका निभाई। इन आरोपों के बाद उनके खिलाफ राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर लगातार सवाल उठते रहे।

विपक्ष ने भी खोला था मोर्चा

भारतीय जनता पार्टी ने भी जहांगीर खान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने सार्वजनिक रूप से उनके खिलाफ आवाज उठाई थी और चुनावी माहौल को प्रभावित करने के आरोप लगाए थे। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर लोगों को डराने-धमकाने और दबाव बनाने के आरोप भी सामने आए थे। हालात की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के चर्चित पुलिस अधिकारी अजय पाल शर्मा को विशेष पर्यवेक्षक के तौर पर डुंडी थाना क्षेत्र में तैनात किया था।

मतदान के दौरान EVM विवाद से बढ़ी मुश्किलें


फालता विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दौरान कई अनियमितताओं की शिकायतें दर्ज हुई थीं। चुनाव के दिन कुछ ईवीएम मशीनों पर सेलोटेप लगाए जाने का मामला सामने आया, जिसने राजनीतिक हलकों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भी जहांगीर खान का नाम सामने आया था। मामले की जांच के बाद चुनाव आयोग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फालता सीट पर पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया था।

नतीजों के बाद अचानक हो गए थे लापता

4 मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद जहांगीर खान सार्वजनिक रूप से नजर आना बंद हो गए थे। बताया जाता है कि 21 मई तक वह पूरी तरह से भूमिगत हो चुके थे। दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने मतदान से ठीक दो दिन पहले अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद से उनकी लोकेशन को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं और सुरक्षा एजेंसियां उनकी तलाश में जुटी थीं।

नेपाल के रास्ते देश छोड़ने की थी योजना

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए जहांगीर खान ने अदालत से सुरक्षा की मांग भी की थी। हालांकि राज्य सरकार ने उस सुरक्षा को वापस लेने के लिए भी कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी थी। जांच एजेंसियों को शक था कि वह नेपाल के रास्ते किसी अन्य देश भागने की कोशिश कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि इसी योजना को अमलीजामा पहनाने से पहले STF ने उन्हें सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया और उनका पूरा प्लान धरा का धरा रह गया।

बंगाल में बढ़ी राजनीतिक हलचल

राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कई तृणमूल कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज हुई है। विभिन्न मामलों में जांच एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं और आरोपों के आधार पर कई नेताओं से पूछताछ तथा गिरफ्तारियां की जा रही हैं। राजनीतिक दबाव और जांच के बीच कुछ नेताओं ने पार्टी से दूरी भी बना ली है, जबकि कई अन्य नेताओं पर भी जांच की तलवार लटक रही है।

जहांगीर खान की गिरफ्तारी को बंगाल की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। आने वाले दिनों में उनसे पूछताछ के दौरान कई और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, जिस पर राजनीतिक दलों और प्रशासन दोनों की नजरें टिकी हुई हैं।

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