पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार, 28 अक्टूबर को विधानसभा में नंदीग्राम सीट छोड़ने और भवानीपुर से विधायक बने रहने के फैसले की वजह बताई। उन्होंने कहा कि यदि वह भवानीपुर सीट खाली कर देते, तो पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी को उपचुनाव लड़ने का एक और मौका मिल जाता। अधिकारी ने ममता बनर्जी को चुनावी राजनीति से दूर रहने और घर पर आराम करने की सलाह भी दी। विधानसभा में यह बयान उस समय आया, जब नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव जीतने वाले भाजपा के दो नवनिर्वाचित विधायक हसीरानी रथ और शंखरव सरकार ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। हसीरानी रथ, शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ की मई में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अपने पूर्व सहयोगी की हत्या का मामला भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि चंद्रनाथ रथ को निशाना बनाए जाने के पीछे शुभेंदु अधिकारी से उनका जुड़ाव एक वजह था। अधिकारी ने कहा कि जांच में सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन कथित तौर पर हत्या के लिए दी गई दो करोड़ रुपये की सुपारी का पैसा किसने दिया था, इसका पता लगना अभी बाकी है।
शुभेंदु अधिकारी ने क्यों छोड़ी नंदीग्राम सीट?
भवानीपुर सीट अपने पास रखने और नंदीग्राम से इस्तीफा देने के फैसले का बचाव करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वह ममता बनर्जी को दोबारा चुनाव लड़ने का अवसर नहीं देना चाहते थे। उनके मुताबिक, भवानीपुर सीट खाली करने पर वहां उपचुनाव होता और ममता बनर्जी को एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरने का मौका मिल सकता था।
अधिकारी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा, "अगर मैंने भवानीपुर सीट छोड़ दी होती, तो जिस व्यक्ति को मैंने दो बार हराया है, उसे चुनाव लड़ने का एक और मौका मिल जाता। मैं उन्हें वह मौका नहीं देना चाहता था।" उन्होंने आगे कहा कि भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को बड़े अंतर से हराया था और अब उन्हें चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। अधिकारी ने उनकी उम्र का जिक्र करते हुए कहा कि वह 75 वर्ष से अधिक की हो चुकी हैं और उन्हें चुनावी राजनीति से हटकर घर पर आराम करना चाहिए।
इस बयान के जरिए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भवानीपुर सीट अपने पास रखने का उनका फैसला केवल निर्वाचन क्षेत्र चुनने तक सीमित नहीं था। उनके अनुसार, इस फैसले का एक उद्देश्य ममता बनर्जी को दोबारा उपचुनाव के जरिए विधानसभा पहुंचने का अवसर नहीं देना भी था।
नंदीग्राम के लोगों को दिया भरोसा, हसीरानी रथ की जीत का किया जिक्र
शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के मतदाताओं की नाराजगी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र छोड़ने के फैसले से वहां के लोग खुश नहीं थे, लेकिन उन्होंने जनता को अपने निर्णय की वजह समझा दी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, नंदीग्राम के लोगों से किए गए वादों को पूरा करने की जिम्मेदारी वह अब भी निभाएंगे।
उन्होंने कहा कि नंदीग्राम के मतदाताओं ने हसीरानी रथ को 1.22 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत दिलाई है। इस जीत के जरिए वह क्षेत्र की जनता से किए गए वादों को पूरा करेंगे।
नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की उम्मीदवार हसीरानी रथ ने कांग्रेस के मिलन प्रधान को 1,22,753 वोटों से हराया। चुनाव परिणाम के अनुसार, हसीरानी रथ को 1,64,427 वोट मिले, जबकि मिलन प्रधान को 41,674 वोट हासिल हुए। हसीरानी रथ के चुनाव मैदान में उतरने का संबंध उनके बेटे चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद बने राजनीतिक घटनाक्रम से भी रहा।
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में दो करोड़ रुपये की सुपारी का सवाल
विधानसभा में अपने पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या का मुद्दा उठाते हुए शुभेंदु अधिकारी ने जांच को लेकर सवाल किए। उन्होंने आरोप लगाया कि चंद्रनाथ की हत्या इसलिए की गई, क्योंकि वह उनसे जुड़े हुए थे। हालांकि, यह आरोप है और कथित साजिश के पीछे किसका हाथ था, इस बारे में जांच का अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
अधिकारी ने कहा कि मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शूटरों और कॉन्ट्रैक्ट किलर्स सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने दावा किया कि अब जांच में यह पता लगाना बाकी है कि हत्या के लिए कथित तौर पर दी गई दो करोड़ रुपये की सुपारी किसने दी थी और यह रकम कहां से आई थी।
मुख्यमंत्री ने इस सिलसिले में तीन स्थानों का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि कथित सुपारी के पैसे का संबंध कैमक स्ट्रीट, कालीघाट या डायमंड हार्बर से था या नहीं। उनके मुताबिक, पैसे के स्रोत का पता चलने पर जांच की कड़ियां जुड़ सकेंगी।
इन स्थानों का जिक्र राजनीतिक रूप से भी अहम है। कैमक स्ट्रीट पर तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी का कार्यालय है। कालीघाट ममता बनर्जी का निवास क्षेत्र है, जबकि डायमंड हार्बर अभिषेक बनर्जी का संसदीय निर्वाचन क्षेत्र है। हालांकि, शुभेंदु अधिकारी के सवालों को किसी व्यक्ति के खिलाफ साबित हो चुके आरोप के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। हत्या के लिए कथित तौर पर दी गई रकम के स्रोत और इसके पीछे की साजिश को लेकर जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।
रेजीनगर में भी भाजपा की जीत, विपक्ष पर साधा निशाना
शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों विधानसभा उपचुनावों में भाजपा की जीत का जिक्र करते हुए विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष दोनों सीटों पर प्रभावी चुनौती पेश नहीं कर पाया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, नंदीग्राम में मतदान से पहले ही विपक्ष का चुनाव अभियान कमजोर पड़ गया था। वहीं, रेजीनगर में विपक्षी उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। उनके बयान का मकसद दोनों उपचुनावों में भाजपा के प्रदर्शन को रेखांकित करना था।
रेजीनगर में भाजपा के शंखरव सरकार ने भी बड़े अंतर से जीत दर्ज की। चुनाव परिणामों के अनुसार, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 75 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया। इन दोनों सीटों पर जीत के बाद हसीरानी रथ और शंखरव सरकार ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायक पद की शपथ ली।














