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भाजपा समर्थक खेमे से जुड़ने के बाद पहली बार बोलीं सायोनी घोष, कहा- वक्त आने पर सब बताऊंगी

भाजपा समर्थक गुट से जुड़ने की चर्चाओं के बीच तृणमूल सांसद सायोनी घोष ने पहली बार चुप्पी तोड़ी। दिल्ली पहुंचकर उन्होंने कहा कि सही समय आने पर वह पूरे मामले पर अपनी बात रखेंगी। उनके बयान से बंगाल की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sun, 14 Jun 2026 4:19:30

भाजपा समर्थक खेमे से जुड़ने के बाद पहली बार बोलीं सायोनी घोष, कहा- वक्त आने पर सब बताऊंगी

तृणमूल कांग्रेस में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पार्टी सांसद सायोनी घोष ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। ममता बनर्जी के नेतृत्व से दूरी बनाकर बागी खेमे का हिस्सा बनने के बाद सायोनी पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आईं। हालांकि उन्होंने फिलहाल किसी भी राजनीतिक विवाद पर विस्तार से बोलने से इनकार कर दिया और संकेत दिया कि वह उचित समय आने पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगी।

रविवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचीं सायोनी घोष से जब एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने तृणमूल कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह और उनके नए राजनीतिक रुख को लेकर सवाल पूछे, तो उन्होंने बेहद संयमित जवाब दिया। सायोनी ने कहा कि अभी वह इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहतीं और समय आने पर सभी सवालों का जवाब देंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनका पहला दायित्व अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों के प्रति है और वह मीडिया से पहले अपने मतदाताओं को जवाब देना उचित समझती हैं।

दिल्ली पहुंचीं सायोनी, लेकिन बयान देने से किया परहेज

एयरपोर्ट पर मौजूद पत्रकारों ने जब उनसे बागी सांसदों के नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर सवाल किए, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, "मैं इस समय कुछ नहीं कहूंगी। जब सही वक्त आएगा, तब अपनी बात रखूंगी।"

सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस से अलग रुख अपनाने वाले सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकता है। माना जा रहा है कि इस बैठक में बागी सांसद लोकसभा में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था और स्वतंत्र पहचान की मांग उठा सकते हैं।

ममता के खिलाफ बढ़ता जा रहा असंतोष

तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे इस राजनीतिक संकट ने अब और व्यापक रूप ले लिया है। सायोनी घोष के अलावा कई अन्य सांसद भी दिल्ली पहुंच चुके हैं। इनमें माला रॉय, काकोली घोष, यूसुफ पठान सहित कई प्रमुख चेहरे शामिल बताए जा रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि करीब 19 से 20 सांसदों का एक समूह पार्टी नेतृत्व से असहमति जताते हुए अलग लाइन पर चल रहा है। इन नेताओं ने कथित तौर पर ममता बनर्जी के नेतृत्व से दूरी बनाते हुए एक अलग गुट का समर्थन किया है, जिसे भाजपा समर्थक रुख वाला माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल और बढ़ा दी है।

इससे पहले शनिवार को भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर देखा गया था। उनके साथ बागी सांसद शताब्दी रॉय भी मौजूद थीं। इस मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी।

महुआ मोइत्रा ने अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता पर साधा निशाना

पार्टी के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं। कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने वरिष्ठ नेता सुदीप बंद्योपाध्याय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि बंद्योपाध्याय ने पार्टी नेतृत्व को अपनी वास्तविक लोकेशन को लेकर गुमराह किया।

महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि सुदीप बंद्योपाध्याय ने पार्टी के नेताओं को बताया था कि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण उन्हें कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लेकिन बाद में उन्हें राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के निवास पर देखा गया।

महुआ ने इस घटनाक्रम को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि पार्टी को वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं दी गई थी। उनके इस बयान ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी तनाव को और उजागर कर दिया है।

सायोनी घोष पर ममता बनर्जी का एक्शन

राजनीतिक बगावत की खबरों के बीच ममता बनर्जी ने संगठन में बड़े बदलाव भी किए हैं। सायोनी घोष को युवा तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह युवा नेता अर्णब बनर्जी को संगठन की कमान सौंपी गई है।

पार्टी ने महिला संगठन में भी बदलाव करते हुए तृणमूल महिला कांग्रेस की जिम्मेदारी नए नेतृत्व को सौंप दी है। कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय की जगह नदिया जिले के कालिगंज से विधायक अलीफा अहमद को संगठन का नया अध्यक्ष बनाया गया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये बदलाव पार्टी नेतृत्व द्वारा संगठन पर नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा हैं। चूंकि सायोनी घोष और माला रॉय दोनों ही बागी खेमे के साथ जुड़ी मानी जा रही हैं, इसलिए इन नियुक्तियों को सीधे तौर पर संगठनात्मक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी यह असंतोष अब केवल व्यक्तिगत मतभेदों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संगठनात्मक और राजनीतिक स्वरूप ले चुका है। बड़ी संख्या में सांसदों और नेताओं के अलग रुख अपनाने से पार्टी नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

सायोनी घोष की चुप्पी और "सही समय आने पर बोलने" वाले बयान ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में बागी सांसद कौन-सा कदम उठाते हैं और तृणमूल कांग्रेस इस संकट से कैसे निपटती है।

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