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ममता की पार्टी में बड़ी हलचल, 16 सांसदों के फोन बंद, 22 MP के टूटने की चर्चा तेज; शुभेंदु अधिकारी ने दिल्ली में डाला डेरा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी की पार्टी TMC में बड़ी हलचल तेज हो गई है। 16 सांसदों के फोन बंद होने और 22 सांसदों के अलग गुट में जाने की चर्चा ने सियासी माहौल गरमा दिया है। शुभेंदु अधिकारी के दिल्ली में डेरा डालने से राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। इस पूरे घटनाक्रम को टीएमसी में संभावित टूट और बड़े राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Sat, 06 Jun 2026 11:43:24

ममता की पार्टी में बड़ी हलचल, 16 सांसदों के फोन बंद, 22 MP के टूटने की चर्चा तेज; शुभेंदु अधिकारी ने दिल्ली में डाला डेरा

पश्चिम बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) एक बार फिर बड़े राजनीतिक भूचाल के केंद्र में आ गई है। विधानसभा चुनाव में झटका लगने और कई विधायकों की बगावत के बाद अब पार्टी के संसदीय ढांचे में भी टूट की आशंका तेज हो गई है। ताजा खबरों के मुताबिक, दिल्ली में टीएमसी के भीतर एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम आकार ले रहा है, जिसमें कम से कम 22 सांसदों के एक अलग गुट में जाने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में गर्म है। बताया जा रहा है कि अगले सप्ताह जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक के लिए दिल्ली पहुंचेंगे, उसी समय यह बड़ा बदलाव सामने आ सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इस संभावित बगावत की कमान बारासात से लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार के हाथों में बताई जा रही है। यह दावा भी किया जा रहा है कि इस खेमे में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के सांसद शामिल हैं और वे खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” के रूप में स्थापित करने की तैयारी में हैं। अगर यह घटनाक्रम आगे बढ़ता है तो यह टीएमसी के लिए अब तक का सबसे बड़ा संसदीय संकट माना जाएगा।

दिल्ली में बीजेपी नेताओं की सक्रियता बढ़ी

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य इस समय दिल्ली में सक्रिय नजर आ रहे हैं। राजनीतिक हलकों में उनकी मौजूदगी को इस उथल-पुथल से जोड़कर देखा जा रहा है। दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि तृणमूल के कई सांसद लगातार उनसे संपर्क में हैं।

उन्होंने कहा, “हां, फोन कॉल्स आ रहे हैं। टीएमसी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और कई सांसद संपर्क साध रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस का राजनीतिक अस्तित्व कमजोर पड़ सकता है और यह पार्टी इतिहास के एक छोटे हिस्से तक सीमित रह जाएगी। उनके इस बयान ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।

बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव लॉकेट चटर्जी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव परिणामों के बाद से ही कई सांसद लगातार पार्टी के संपर्क में हैं। उनके मुताबिक, फोन कॉल्स, मैसेज और अन्य माध्यमों से लगातार संवाद चल रहा है और कई नेता पाला बदलने की तैयारी में हैं।

दलबदल कानून और गणित की जटिलता

संसद में किसी भी प्रकार के आधिकारिक विभाजन को वैधता देने के लिए संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दो-तिहाई सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। यह नियम दलबदल कानून के अंतर्गत आता है, जिससे बचना किसी भी बागी गुट के लिए बेहद जरूरी होता है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, हाजी नुरुल इस्लाम के निधन के बाद लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं, जबकि राज्यसभा में 13 सदस्य मौजूद हैं।

यदि किसी गुट को आधिकारिक रूप से मान्यता दिलानी है तो लोकसभा में कम से कम 19 और राज्यसभा में 9 सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा। सूत्रों का दावा है कि इस समय बागी खेमे में दोनों सदनों को मिलाकर लगभग 22 सांसदों का समर्थन जुटाने की बात सामने आ रही है, जो पार्टी के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है।

एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि यह गुट सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात कर खुद को असली टीएमसी के रूप में पेश कर सकता है। इसे ममता बनर्जी के लिए बेहद अप्रत्याशित और कठिन राजनीतिक क्षण बताया जा रहा है।

सांसदों के फोन बंद, सस्पेंस गहराया

इसी बीच टीएमसी के भीतर हलचल और भी तेज हो गई है। पार्टी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने भी संकेत दिए हैं कि संसदीय दल में विभाजन की स्थिति अब लगभग तय मानी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल समय की बात है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि शुक्रवार को जब कई सांसदों से संपर्क करने की कोशिश की गई तो 16 में से 15 सांसदों के फोन लगातार बंद मिले। इनमें कुछ सांसद फिल्म और खेल जगत से जुड़े हैं, जबकि कई पहली बार संसद पहुंचे चेहरे भी शामिल बताए जा रहे हैं।

सूत्रों का यह भी दावा है कि तीन ऐसे सांसद भी इस खेमे में शामिल हो चुके हैं, जिन्हें पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मिलने से इनकार कर दिया था। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। वहीं जिन सांसदों के नाम इस चर्चा में हैं, उनमें प्रमुख बताई जा रही काकोली घोष दस्तीदार से संपर्क करने की कोशिशें भी नाकाम रहीं।

बताया जाता है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर अमेरिकी नेताओं के उद्धरण साझा करते हुए अपनी राजनीतिक लड़ाई को चार दशकों के संघर्ष से जोड़ते हुए एक तरह से कड़ा संदेश दिया है। उनके बयान में “ततैया के छत्ते में हाथ मत डालो” जैसी चेतावनी ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है।

बयानबाजी और सियासी तंज से बढ़ी गर्मी

इस पूरे मामले पर कोलकाता में बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने भी तंज भरे अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने जब कुछ सांसदों से संपर्क करने की कोशिश की तो उनके फोन लगातार बंद मिले। उनके अनुसार यह स्थिति अपने आप बहुत कुछ संकेत देती है।

उन्होंने यह भी कहा कि डर और साहस दोनों ही संक्रामक होते हैं और आने वाले दिनों में तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी। इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है और सभी की निगाहें अब दिल्ली में होने वाली संभावित बैठकों पर टिक गई हैं।

फिलहाल टीएमसी के भीतर चल रही इस हलचल ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। यदि यह दावा सच साबित होता है तो यह ममता बनर्जी के नेतृत्व के लिए अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकती है।

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