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ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका, बगावत के अगले ही दिन शुभेंदु के साथ मंच पर नजर आए सांसद देव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। TMC में बगावत के बीच सांसद देव के शुभेंदु अधिकारी के साथ मंच साझा करने से ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 20 सांसदों के कथित पत्र और NDA में शामिल होने की चर्चाओं ने सियासी हलचल तेज कर दी है।

Posts by : Jhanvi Gupta | Updated on: Tue, 09 Jun 2026 3:52:29

ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका, बगावत के अगले ही दिन शुभेंदु के साथ मंच पर नजर आए सांसद देव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल लगातार तेज होती जा रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर उभरी बड़ी बगावत के बाद अब एक और राजनीतिक तस्वीर सामने आई है, जिसने ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। घाटाल से सांसद और अभिनेता दीपक अधिकारी उर्फ देव अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से आयोजित एक अहम प्रशासनिक बैठक में मंच साझा करते नजर आए हैं। एक दिन पहले ही बागी सांसदों के समूह में शामिल होने की चर्चाओं के बीच उनका कोलाघाट में शुभेंदु अधिकारी के साथ मुख्य मंच पर दिखना राजनीतिक गलियारों में कई नए संकेत दे रहा है। इसी बैठक में टीएमसी की सांसद जून मालिया की मौजूदगी ने भी चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

20 सांसदों की चिट्ठी से शुरू हुआ बड़ा घटनाक्रम


सोमवार को यह दावा किया गया था कि टीएमसी के कुल 29 लोकसभा सांसदों में से 20 ने एक साथ लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की इच्छा जताई है। यह पत्र काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में भेजा गया बताया जा रहा है। इसी सूची में घाटाल से सांसद देव का नाम भी शामिल होने की बात सामने आई थी। इसके अलावा इस कथित समूह में रचना बनर्जी, शताब्दी रॉय और जून मालिया जैसे कई ऐसे नाम भी चर्चा में रहे, जिन्हें कभी ममता बनर्जी के बेहद करीबी नेताओं में गिना जाता था। इस घटनाक्रम ने यह धारणा मजबूत कर दी है कि अब केवल विधानसभा ही नहीं, बल्कि संसद में भी टीएमसी की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

कोलाघाट बैठक में मुख्य मंच पर दिखे देव

मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्वी मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जिलों से जुड़ी प्रशासनिक समीक्षा बैठक कोलाघाट के ‘बलाका मंच’ पर आयोजित की। इस बैठक में विकास कार्यों और प्रशासनिक योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। पिछले दिन भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई बैठक में देव की प्रत्यक्ष मौजूदगी नहीं थी, लेकिन इस बार वे प्रशासनिक बैठक का हिस्सा बने।

देव दोपहर 12 बजकर 3 मिनट पर बैठक स्थल पर पहुंचे। देर से आने के बावजूद उन्हें सीधे मुख्य मंच पर स्थान दिया गया, जो राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक में पश्चिमी मेदिनीपुर क्षेत्र से जुड़े दो टीएमसी सांसद और दो विधायक भी मौजूद रहे, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर नई बहस शुरू हो गई है।

मंच पर दिखे कई प्रमुख चेहरे

कोलाघाट में आयोजित इस प्रशासनिक बैठक के मुख्य मंच पर कुल चार सांसदों की उपस्थिति ने ध्यान आकर्षित किया। इनमें सौमेंदु अधिकारी, देव (दीपक अधिकारी), अभिजीत गंगोपाध्याय और जून मालिया शामिल रहे। इनके अलावा विधायक शिउली साहा भी बैठक में उपस्थित थीं। प्रशासनिक स्तर पर इस बैठक में झाड़ग्राम के जिलाधिकारी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जो अपने-अपने कार्यालयों से बस के जरिए कार्यक्रम स्थल पहुंचे।

राजनीति से दूरी की बात से लेकर सक्रिय वापसी तक

देव का राजनीतिक सफर भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व में राजनीति की शुरुआत की थी और टीएमसी के टिकट पर घाटाल से लगातार लोकसभा चुनाव जीतते रहे हैं। 2024 के आम चुनावों से पहले उन्होंने राजनीति से दूरी बनाने की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी के साथ हुई बैठकों के बाद उन्होंने अपना निर्णय बदल लिया।

उस दौरान ममता बनर्जी ने सार्वजनिक मंच से यह भी कहा था कि राज्य सरकार उनके महत्वाकांक्षी ‘घाटाल मास्टर प्लान’ को आगे बढ़ाएगी। चुनाव प्रचार के दौरान भी देव टीएमसी के लिए सक्रिय रूप से काम करते नजर आए थे, हालांकि तेज धूप में प्रचार के दौरान उनकी तबीयत भी खराब हो गई थी। इसके बावजूद वे लगातार पार्टी गतिविधियों में सक्रिय रहे।

चुनाव परिणामों के बाद उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक हलकों में चर्चा पैदा कर दी थी, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदर्शन की सराहना करते हुए उसे बधाई दी थी। अब हालिया घटनाक्रम और मंच साझा करने की घटनाएं उनकी राजनीतिक दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर रही हैं, जिससे बंगाल की राजनीति में अनिश्चितता और बढ़ती दिखाई दे रही है।

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